फ़िरोज़ा

अन्य रत्नों की तरह ही फ़िरोजा को भी धारण करने की सलाह ज्योतिषाचार्य उपाय के रूप में देते हैं। ज्योतिषियों का मत है कि हर एक व्यक्ति को राशिनुसार ज्योतिषीय परामर्श लेकर रत्न धारण करना चाहिए। इससे जातक को रत्न का शुभफल प्राप्त होता है। इस लेख में हम फ़िरोज़ा के ज्योतिषीय महत्व, फ़िरोज़ा धारण करने के लाभ, इसके किस राशि के जातक धारण कर सकते हैं? तथा धारण करने की विधि क्या है? बारे में जानेंगे।


फ़िरोज़ास क्या है?

फ़िरोज़ा एक प्राकृतिक, हल्का नीला से लेकर गहरे नीले-हरे रंग का, फॉस्फेट खनिज द्वारा निर्मित कीमती रत्न है। यह रत्न अमेरिका, ईरान, मिश्र, तिब्बत, मेक्सिको, एरिजोना व टर्की सहित अन्य देशों में पाया जाता है। बाजार में फ़िरोज़ा पत्थर कई तरह के पाए जाते हैं जिनमें से हरा फ़िरोज़ा, जामुनी फ़िरोज़ा और सफेद फ़िरोज़ा को अधिक प्रभावी माना जाता है। विशेषज्ञों के अनुसार, एरिजोना फ़िरोज़ और किंगमैन फ़िरोज़ा खदान से आने वाली अमेरिकी फ़िरोज़ा अच्छी गुणवत्ता के होते हैं। फ़िरोज़ा के बारे में यह कहा जाता है कि ये कई ज्योतिषीय और औषधीय उपचार में लाभ पहुँचाता है।


फ़िरोज़ा का ज्योतिष महत्व

वैदिक ज्योतिष के अनुसार, फ़िरोज़ा ग्रह बृहस्पति से जुड़ा हुआ रत्न है। ऐसा माना जाता है कि फ़िरोज़ा रत्न धारण करने से यह कुंडली में बृहस्पति को मजबूत करता है जिससे धारण करने वाले को वित्तीय सफलता, ज्ञान और अच्छे स्वास्थ्य का आशीर्वाद मिलता है। फ़िरोज़ा एक हल्का रत्न माना जाता है जो पहनने वाले के जीवन पर कोई नकारात्मक प्रभाव नहीं डालता। इसलिए, प्राथमिक परामर्श के बाद इसे किसी के द्वारा पहना जा सकता है। पश्चिमी ज्योतिष में फ़िरोज़ा रत्न को दिसंबर महीने में जन्म लेने वाले जातकों बर्थ-स्टोन के रूप में धारण करने की सलाह दी जाती है।


फ़िरोज़ा धारण करने के लाभ?

सदियों से फ़िरोज़ा रत्न अपने आध्यात्मिक और उपचार गुणों के लिए बेशकीमती बना हुआ है। यह आभूषण के लिए एक पवित्र व शुभ पत्थर माना जाता है जो पहनने वाले के जीवन में सकारात्मकता, खुशी, भाग्य, धन और उसकी सेहत को बनाता है। इसके साथ ही जैसा कि हम पहले ही बता चुके हैं कि यह गुरू बृहस्पति से संबंधित रत्न है जिससे गुरू भी बलबान होते हैं।
शिक्षाविदों और रचनात्मक कैरियर में सफलता
फ़िरोज़ा रत्न को धारण करने से बृहस्पति शक्तिशाली होते हैं। जिनके प्रभावी होने से ज्ञान, शिक्षा या सीखने व सिखाने के क्षेत्र से जुड़े लोगों, जैसे विद्वानों, शोधकर्ताओं, वकीलों, शिक्षकों आदि के लिए बहुत ही लाभ पहुँचाते हैं। इसके साथ ही फ़िरोज़ा से निर्णय लेने के कौशल और सोचने की क्षमता में सुधार होता है।
बेहतर वित्तीय स्थिति और सामाजिक उत्थान
वैदिक ज्योतिष में, फ़िरोज़ा रत्न धन और समृद्धि से संबंधित है। ज्योतिष जीवन में वित्तीय स्थिरता लाने के लिए फ़िरोज़ा की आध्यात्मिक क्षमताओं में विश्वास रखते हैं। ऐसा माना जाता है कि फ़िरोज़ा रत्न पहनने वाले की सामाजिक स्थिति और जीवनशैली पर सकारात्मक प्रभाव पड़ता है।
यकृत और फेफड़े के विकार को ठीक करता है?
प्राचीन काल से फ़िरोज़ा के उपचार के गुणों का उपयोग किया जा रहा है। यह गुर्दे, यकृत या प्रतिरक्षा संबंधी बीमारियों से पीड़ित लोगों के लिए प्रभावी है। यहां तक कि पीलिया, तपेदिक, मधुमेह आदि जैसी बीमारियों से राहत पाने के लिए चिकित्सक इसके गुणों में विश्वास रखते हैं।


किस राशि के जातक फ़िरोज़ा धारण करें?

भारतीय ज्योतिष शास्त्र धनु राशि के जातकों के लिए फ़िरोज़ा रत्न धारण करने की पैरवी करता है। पश्चिमी ज्योतिष में भी धनु राशि वालों के लिए फ़िरोज़ा को बर्थ-स्टोन के रूप में धारण करने की सिफारिश की जाती है। इसके अलावा इसे मेष, कर्क, सिंह और वृश्चिक राशि के लोग भी धारण सकते हैं।


फ़िरोज़ा धारण करने की विधि

इस रत्न को धारण करने के लिए दो धातु का उपयोग किया जा सकता है वो है सोना व तांबा।  इन दोनों ही धातुओं की अंगूठी में इसे धारण कर सकते हैं। इससे पहले इसे एक रात के लिए दूध, शहद, मिश्री व गंगाजल के घोल में डूबा कर रख दें। इसके बाद शुभ दिन देख कर इसे धारण कर लें। परंतु यह रत्न धारण करने से पहले ज्योतिषीय परामर्श जरूर लें ताकि आपको धारण करने की ज्योतिषीय विधि व अधिक लाभ मिल सके। यदि आप बिना ज्योतिषीय परामर्श के इसे धारण करते हैं तो हो सकता है आपको इसका लाभ न मिलें। इसलिए आपको एक बार ज्योतिषाचार्यों से बात कर संतुष्ट हो लेना चाहिए। अभी ज्योतिषाचार्य से बात करने के लिए यहां क्लिक करें या 9999091091 पर कॉल करें।


भारत के शीर्ष ज्योतिषियों से ऑनलाइन परामर्श करने के लिए यहां क्लिक करें!



एस्ट्रो लेख

राशिनुसार कैसे करें शिव की पूजा

चंद्र ग्रहण 2020 - इन चार राशियों पर लगेगा ग्रहण! जानिए

सावन - शिव की पूजा का माह है श्रावण

गुरु पूर्णिमा 2020 - गुरु की पूजा करने का पर्व

Chat now for Support
Support