Skip Navigation Links
कृष्ण जन्माष्टमी: कृष्ण भगवान की भक्ति का त्यौहार


कृष्ण जन्माष्टमी: कृष्ण भगवान की भक्ति का त्यौहार

हिन्दू धर्म में उपासकों के लिए सबसे अहम पर्वों में से एक है कृष्ण जन्माष्टमी। यह तिथि भगवान श्रीकृष्ण की जन्मतिथि के रूप में मनाई जाती है। वर्ष 2016 में कृष्ण जन्माष्टमी 25 अगस्त को मनाई जाएगी।  


इस अत्यंत शुभावसर पर श्रीकृष्ण के भक्त, उनके उपासक व्रत करते हैं और और प्रभु का ध्यान करते हैं। कुछ उपासक रात्रि जागरण भी करते हैं और कृष्ण के नाम के भजन-कीर्तन करते हैं।  कृष्ण की जन्मभूमि मथुरा और वृन्दावन में जन्माष्टमी भव्य रूप से मनाया जाता है।  यहाँ की रासलीला केवल भारत में ही नहीं बल्कि विदेश में भी प्रसिद्ध है।  इन रासलीला में कृष्ण के जीवन के मुख्य वृतांतों को दर्शाया जाता है और राधा के प्रति उनके प्रेम का अभिनन्दन किया जाता है।


कईं शहरों में झांकियां भी बनाई जाती हैं जिनमें ना केवल श्रीकृष्ण और राधा बल्कि अन्य देवी-देवताओं के रूप में उनके भक्त विराजमान रहते हैं और बाकी के उपासक उनके दर्शन करते हैं।  महाराष्ट्र में विशेष रूप से इस दिन मटकी फोड़ने की प्रथा प्रचलित है। उपासकों द्वारा इंसानी मीनार बनाकर धरती से कईं फुट ऊंची मटकी को तोड़कर यह प्रथा पूर्ण होती है।  बड़ी तादाद में भक्तजन एकत्रित होते है और गाना-बजाना, नृत्य आदि करते हैं।


कृष्णभूमि द्वारका में इस विशेष अवसर पर बड़ी धूमधाम होती है।  इस दिन यहाँ देश-विदेश से बहुत पर्यटक आते हैं।  इस भव्य समारोह को कृष्ण जन्मोत्सव के नाम से भी जाना जाता है।


व्रत विधि                                    

जन्माष्टमी की पूर्व रात्रि हल्का भोजन करें और ब्रह्मचर्य का पालन करें। प्रातःकाल स्नानादि नित्यकर्मों से निवृत्त होकर सूर्य, सोम, यम, काल, संधि, भूत, पवन, दिक्‌पति, भूमि, आकाश, खचर, अमर और ब्रह्मादि को नमस्कार कर पूर्व या उत्तर दिशा की ओर मुख कर बैठें। इसके बाद हाथ में जल लेकर संकल्प करें।  


अब मध्याह्न के समय काले तिलों के जल से स्नान कर देवकीजी के लिए प्रसूति-गृह  का निर्माण करें।  तत्पश्चात भगवान श्रीकृष्ण की मूर्ति या चित्र स्थापित करें।


मूर्ति या प्रतिमा में बालकृष्ण को स्तनपान कराती हुई देवकी अथवा लक्ष्मीजी उनके चरण स्पर्श किए हों। या ऐसी कृष्ण के जीवन के किसी भी अहम वृतांत का भाव हो।

तत्पश्चात विधि-विधान से पूजन करें और प्रभु कृष्ण का आशीर्वाद प्राप्त करें।


व्रत अगले दिन सूर्योदय के पश्चात ही तोड़ा जाना चाहिए। इसका ध्यान रखना चाहिए कि व्रत अष्टमी तिथि और रोहिणी नक्षत्र के समाप्त होने के पश्चात ही तोड़ा जाएं। किन्तु यदि अष्टमी तिथि और रोहिणी नक्षत्र सूर्यास्त से पहले समाप्त ना हो, तो किसी एक के समाप्त होने के पश्चात व्रत तोड़े। किन्तु यदि यह सूर्यास्त तक भी संभव ना हो, तो दिन में व्रत ना तोड़े और अष्टमी तिथि और रोहिणी नक्षत्र में से किसी भी एक के समाप्त होने की प्रतीक्षा करें या निशिता समय में व्रत तोड़े। ऐसी स्थिति में दो दिन तक व्रत न कर पाने में असमर्थ, सूर्योदय के पश्चात कभी भी व्रत तोड़ सकते हैं।


जन्माष्टमी का शुभ मुहूर्त

निशिथ पूजा– 00:00 से 00:45 (25 अगस्त)

पारण– 10:35 (26 अगस्त) के बाद

रोहिणी समाप्त- 10:35 (26 अगस्त)

अष्टमी तिथि आरंभ – 22:17 (24 अगस्त)

अष्टमी तिथि समाप्त – 20:07 (25 अगस्त)


श्रीकृष्ण जन्माष्टमी के इस शुभावसर पर एस्ट्रोयोगी.कॉम की तरफ से बहुत-बहुत शुभकामनाएं। 


यह भी पढ़ें

भक्तों की लाज रखते हैं भगवान श्री कृष्ण   |   सावन के बाद आया, श्रीकृष्ण जी का माह ‘भादों‘   |   श्री कृष्ण जन्माष्टमी - 2016   |   गीता सार   |   राधावल्लभ मंदिर वृंदावन   |   

श्री कृष्ण चालीसा   |   कुंज बिहारी आरती   |   बांके बिहारी आरती   |   बुधवार - युगल किशोर आरती  




एस्ट्रो लेख संग्रह से अन्य लेख पढ़ने के लिये यहां क्लिक करें

दस साल बाद आषाढ़ में होगी शनि अमावस्या करें शनि शांति के उपाय

दस साल बाद आषाढ़ म...

अमावस्या की तिथि पितृकर्मों के लिये बहुत खास मानी जाती है। आषाढ़ में मास में अमावस्या की तिथि 23 व 24 जून को पड़ रही है। संयोग से 24 जून को अ...

और पढ़ें...
शनि परिवर्तन - वक्री होकर शनि कर रहे हैं राशि परिवर्तन जानें राशिफल

शनि परिवर्तन - वक्...

शनि की माया से तो सब वाकिफ हैं। ज्योतिषशास्त्र में शनि को एक दंडाधिकारी एक न्यायप्रिय ग्रह के रूप में जाना जाता है हालांकि इनकी टेढ़ी नज़र से...

और पढ़ें...
आषाढ़ अमावस्या 2017 – पितृकर्म अमावस्या 23 जून तो 24 को रहेगी शनि अमावस्या

आषाढ़ अमावस्या 201...

प्रत्येक मास में चंद्रमा की कलाएं घटती और बढ़ती रहती हैं। चंद्रमा की घटती बढ़ती कलाओं से ही प्रत्येक मास के दो पक्ष बनाये गये हैं। जिस पक्ष म...

और पढ़ें...
जगन्नाथ रथयात्रा 2017 - सौ यज्ञों के बराबर पुण्य देने वाली है पुरी रथयात्रा

जगन्नाथ रथयात्रा 2...

उड़िसा में स्थित भगवान जगन्नाथ का मंदिर हिन्दुओं के चार धामों में शामिल है। जगन्नाथ मंदिर, सनातन धर्म के पवित्र तीर्थस्थलों में से एक है। हिन...

और पढ़ें...
ईद - इंसानियत का पैगाम देता है ईद-उल-फ़ितर

ईद - इंसानियत का प...

भारत में ईद-उल-फ़ितर 26 जून 2017 को मनाया जाएगा। इस्लामी कैलेंडर के नौवें महीने को रमदान का महीना कहते हैं और इस महीने में अल्लाह के सभी बंदे...

और पढ़ें...