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विश्वास और प्यार का एक पवित्र बंधन - रक्षा बंधन


विश्वास और प्यार का एक पवित्र बंधन - रक्षा बंधन

श्रावण मास की पूर्णिमा में एक ऐसा पर्व मनाया जाता है जिसमें पूरे देश के भाई-बहनों का आपसी प्यार दिखाई देता है – रक्षा बंधन| वर्ष 2016 में रक्षा बंधन 18 अगस्त, बृहस्पतिवार को मनाया जाएगा| भाई-बहन के प्यार, स्नेह को दर्शाते इस त्योहार की परंपरा आज लगभग हर धर्म में मनाई जाती है| धर्म-मज़हब से परे यह त्योहार भाई-बहन के प्रेम का प्रतीक है|


किसी भी रिश्तें की मजबूती की बुनियाद होता है विश्वास| और यही विश्वास एक बहन अपने भाई पर रखती है जब वह इस पर्व के दिन भाई की कलाई पर एक धागा जिसे राखी कहते है, बांधती है| अपने हाथ में राखी बंधवाकर भाई यह प्रतिज्ञा करता है कि वह अपनी बहन की सदैव रक्षा करेगा चाहे परिस्थिति कितनी ही विषम क्यों ना हो| राखी का धागा केवल रक्षा ही नहीं बल्कि प्रेम और निष्ठा से दिलों को भी जोड़ता है|


इस दिन का महत्त्व इतना अधिक है कि यदि कोई बहन अपने भाई से इस दिन मिल नहीं पाती तो भी डाक द्वारा उन्हें राखी अवश्य भेजती है| रक्षा बंधन से जुड़ीं कईं ऐसी कथाएँ हैं जिनमें राखी बाँधने वाली बहन नहीं बल्कि पत्नी या ब्राह्मण भी हैं| क्योंकि यह सूत्र, यह धागा एक रक्षासूत्र होता है|

पौराणिक कथाओं के अनुसार एक समय देवों और असुरों के बीच लम्बे समय से युद्ध चला जा रहा था| इस युद्ध में देवों की निरंतर हार हो रही थी और इस बात से दुखी देवराज इंद्र अपने गुरु बृहस्पति के पास परामर्श लेने गए| वहाँ इंद्र की पत्नी इन्द्राणी भी थी| इंद्र की व्यथा सुनकर इन्द्राणी ने उनसे कहा कि वह श्रावण की शुक्ल पूर्णिमा में विधि-विधानपूर्वक एक रक्षासूत्र तैयार करेंगी| इन्द्राणी ने इंद्र से वह रक्षासूत्र ब्राह्मणों से बंधवाने के लिए कहा और कहा कि उनकी अवश्य ही विजय होगी| और वाकई ऐसा करने पर देवताओं की विजय हुईं| तभी से ब्रहामणों द्वारा रक्षासूत्र बंधवाने की यह प्रथा प्रचलित है|


एक कथा के अनुसार ग्रीक नरेश महान सिकंदर की पत्नी ने सिकंदर के शत्रु पुरुराज की कलाई में राखी बांधी थी ताकि युद्ध में उनके पति की रक्षा हो सके| और ऐसा हुआ भी, युद्ध के दौरान कईं अवसर ऐसे आए जिनमें पुरुराज ने जब भी सिकंदर पर प्राण घातक प्रहार करना चाहा, किन्तु अपनी कलाई पर बंधी राखी देख पुरुराज ने सिकंदर को प्राणदान दिया|


महाभारतकाल में जब श्रीकृष्ण ने अपने सुदर्शन चक्र से शिशुपाल का वध किया था तो उस समय उनकी ऊँगली कट गयी थी| श्रीकृष्ण के ऊँगली से रक्त बहता देख द्रौपदी ने अपनी साड़ी का पल्ला फाड़ कर उनकी ऊँगली पर बाँध दिया था| वह साड़ी का एक टुकड़ा किसी रक्षासूत्र से कम नहीं था अतः श्रीकृष्ण ने द्रौपदी को सदैव उनकी रक्षा करने का वचन दिया| और जब आगे जाकर भरी सभा में दु:शासन द्रपुदी का चीरहरण कर रहा था और पांडव और अन्य सभी उनकी सहायता नहीं कर पा रहे थे तब श्रीकृष्ण ने द्रौपदी की लाज राखी और अपना वचन पूर्ण किया|


पुराणों में एक और रोचक कथा का वर्णन है| एक समय भगवान विष्णु राजा बलि को दिए गए अपने वचन को पूरा करने के लिए बैकुण्ड छोड़ कर बलि के राज्य चले गए थे और बलि के राज्य की रक्षा करने लगे| माँ लक्ष्मी ने भगवान को वापस लाने के लिए एक दिन एक ब्राह्मणी के रूप में राजा बलि की कलाई पर राखी बाँध कर उसके लिए मंगलकामना की| राजा बलि ने भी ब्राह्मणी रुपी माँ लक्ष्मी को अपनी बहन माना और उनकी रक्षा का वचन दिया| तब माँ लक्ष्मी अपनी असल रूप में आई और राजा बलि से विनती की कि वह श्रीविष्णु जी को अपने वचन से मुक्त कर पुनः बैकुण्ड लौट जाने दे| राजा बलि ने अपनी बहन को दिए वचन की लाज रखी और प्रभु को अपने वचन से मुक्त कर दिया|


रक्षा बंधन के दिन राखी बाँधने के अतिशुभ मुहूर्त अपराह्न का समय होता है| यदि कभी अपराह्न मुहूर्त किन्ही ज्योतिषी कारणों से उपलब्ध ना हो, तो प्रदोष मुहूर्त भी अनुष्ठान के लिए शुभ माना जाता है|  भद्रा समय किसी भी प्रकार के शुभ कार्य के लिए अशुभ माना जाता है इसलिए इस समय अनुष्ठान न करे|


शुभ महूर्त

रक्षा बंधन तिथि          :           18 अगस्त 2016, बृहस्पतिवार

अनुष्टान समय            :           05:55 से 14:56

अपराह्न मुहूर्त             :          13:46 से 14:56

पूर्णिमा तिथि प्रारंभ      :          सांय 16:27 बजे, 17 अगस्त 2016

पूर्णिमा तिथि समाप्त    :          दोपहर बाद 14:56 बजे, 18 अगस्त 2016

भद्रा समय                :          भद्रा सूर्योदय से पहले समाप्त हो रही है।


एस्ट्रोयोगी की तरफ से सभी पाठकों को रक्षा बंधन की हार्दिक शुभकामनाएं और हम आशा करते है कि आप के बीच यूँही प्रेम, स्नेह बना रहें|


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