शिव पातालेश्वर मंदिर - यहाँ भगवान शिव को भेंट की जाती है झाड़ू

Tue, Jul 27, 2021
Team Astroyogi  टीम एस्ट्रोयोगी के द्वारा
Tue, Jul 27, 2021
Team Astroyogi  टीम एस्ट्रोयोगी के द्वारा
शिव पातालेश्वर मंदिर - यहाँ भगवान शिव को भेंट की जाती है झाड़ू

ईश्वर भी कितना महान है, ना कोई इच्छा होती है ना कोई चाह होती है भक्त जो भी दे प्यार से सब स्वीकार कर लेता है। शायद यही एक बात है जो भगवान को महान बना देती है। “जो जैसा आया, उसको वैसे ही अपनाया।” जी हाँ, भारत में ऐसा ही एक शिव मंदिर है जहाँ लोग फूल और दूध के साथ-साथ, झाड़ू भी ईश्वर को समर्पित करते हैं।

 

कहां है पातालेश्वर मंदिर? 

पातालेश्वर मंदिर, एक छोटे से गाँव सदत्बदी जो मुरादाबाद और आगरा  राजमार्ग पर स्थित है। इस मंदिर में भगवान शिव की पूजा होती है और भगवान शिव यहाँ भक्तों की भेट झाड़ू को भी स्वीकार करते हैं। यहां के लोगो का मानना है कि अगर भगवान शिव को झाड़ू चढ़ाई जाये तो व्यक्ति के सभी प्रकार के त्वचा के रोग ठीक हो जाते है। सदियों पुराने इस मंदिर में वह लोग अधिक आते है जो त्वचा के रोगों से ग्रस्त है। सोमवार भगवान शिव की पूजा के लिए शुभ दिन माना जाता है इस लिए सोमवार को यहाँ भारी भीड़ दर्शन करने आती है।

 

मंदिर की क्या है मान्यता

इस प्राचीन शिव पातालेश्वर मंदिर में श्रद्धालु अपने त्वचा संबंधी रोगों से छुटकारा पाने और मनोकामना पूर्ण करने के लिए झाड़ू चढाते हैं। आसपास के लोग बताते हैं कि यह मंदिर करीब 150  वर्ष पुराना है। इसमें झाड़ू चढ़ाने की रस्म प्राचीन काल से ही है। इस शिव मंदिर में कोई मूर्ति नहीं बल्कि एक शिवलिंग है, जिस पर श्रद्धालु झाड़ू अर्पित करते हैं। सोमवार को यहां हजारों की संख्या में श्रद्धालु आते हैं। धारणा है कि इस मंदिर की चमत्कारी शक्तियों से त्वचा के रोगों से मुक्ति मिल जाती है।

 

भगवान शिव की कृपा पाने के सरल ज्योतिषीय उपाय जानने के लिये परामर्श करें एस्ट्रोयोगी ज्योतिषाचार्यों से। अभी बात करने के लिये यहां क्लिक करें।

 

इस चमत्कार के पीछे एक कहानी बताई जाती है कि गांव में कभी एक भिखारीदास नाम का एक व्यापारी रहता था, जो गांव का सबसे धनी व्यक्ति था और वह त्वचा रोग से ग्रसित था। उसके शरीर पर काले धब्बे पड़ गये थे, जिनसे उसे पीड़ा होती थी।

 

पौराणिक कथा

एक दिन वह निकट के गांव के एक वैद्य से उपचार कराने जा रहा था कि रास्ते में उसे जोर की प्यास लगी। तभी उसे एक आश्रम दिखाई पड़ा। जैसे ही भिखारीदास पानी पीने के लिए आश्रम के अंदर गया वैसे ही आश्रम की सफाई कर रहे महंत के झाड़ू से उसके शरीर का स्पर्श हो गया। झाड़ू के स्पर्श होने के क्षण भर के अंदर ही भिखारीदास का दर्द ठीक हो गया। जब भिखारीदास ने महंत से चमत्कार के बारे में पूछा तो उसने कहा कि वह भगवान शिव का प्रबल भक्त है। यह चमत्कार उन्हीं की वजह से हुआ है। भिखारीदास ने महंत से कहा कि उसे ठीक करने के बदले में सोने की अशर्फियों से भरी थैली स्वीकार करे। किन्तु महंत ने अशर्फी लेने से इंकार करते हुए कहा कि वास्तव में अगर वह कुछ लौटाना चाहते हैं तो आश्रम के स्थान पर शिव मंदिर का निर्माण करवा दें। कुछ समय बाद भिखारीदास ने वहां पर शिव मंदिर का निर्माण करवा दिया। धीरे-धीरे मान्यता हो गई कि इस मंदिर में दर्शन कर झाड़ू चढ़ाने से त्वचा के रोगों से मुक्ति मिल जाती है।

 

आज का पंचांग ➔  आज की तिथिआज का चौघड़िया  ➔ आज का राहु काल  ➔ आज का शुभ योगआज के शुभ होरा मुहूर्त  ➔ आज का नक्षत्रआज के करण

 

आज यहाँ इस तरह के हज़ारों लोग आते हैं जो त्वचा रोग से पीड़ित हैं और आसपास के लोग यह भी बताते हैं कि अधिकतर लोगों को यहाँ आने और झाड़ू चढ़ाने के बाद, इस रोग से मुक्ति भी मिलती है। लेकिन भगवान शिव की महिमा तो वैसे भी अपरम्पार है तो यहाँ लोग त्वचा रोग के अलावा, अपने और सभी दुःख भी लेकर आते हैं।

इस चमत्कारिक शिवलिंग में लाखों लोग सालभर में आते हैं और अपने दुखों से मुक्ति प्राप्त करते हैं। 

 

यह भी पढ़ें 

शिव वृषभ अवतार - क्यों किया विष्णु पुत्रों का संहार?   |   शिव मंदिर – भारत के प्रसिद्ध शिवालय   |   नटराज – सृष्टि के पहले नर्तक भगवान शिव   |  आखिर क्यों भस्म में सने रहते हैं भगवान भोलेनाथ   |   विज्ञान भी है यहाँ फेल, दिन में तीन बार अपना रंग बदलता है यह शिवलिंग   |   चमत्कारी शिवलिंग, हर साल 6 से 8 इंच बढ़ रही है इसकी लम्बाई

Spirituality
Spiritual Retreats and Travel

आपके पसंदीदा लेख

नये लेख


Spirituality
Spiritual Retreats and Travel
आपका अनुभव कैसा रहा
facebook whatsapp twitter
ट्रेंडिंग लेख

यह भी देखें!

chat Support Chat now for Support