Skip Navigation Links
मार्गशीर्ष अमावस्या 2018 – अगहन अमावस्या का महत्व व व्रत पूजा विधि


मार्गशीर्ष अमावस्या 2018 – अगहन अमावस्या का महत्व व व्रत पूजा विधि

मार्गशीर्ष माह को हिंदू धर्म में काफी महत्वपूर्ण माना जाता है। इसे अगहन मास भी कहा जाता है यही कारण है कि मार्गशीर्ष अमावस्या को अगहन अमावस्या भी कहा जाता है। वैसे तो प्रत्येक अमावस्या का अपना खास महत्व होता है और अमावस्या तिथि स्नान-दान-तर्पण आदि के लिये जानी जाती है। लेकिन चूंकि मार्गशीर्ष माह के बारे में स्वयं श्री कृष्ण कहते हैं कि महीनों में वह मार्गशीर्ष हैं इसका महत्व और अधिक बढ़ जाता है। जिस गीता को हिंदूओं में जीवन का दर्शन माना जाता है उस गीता का ज्ञान मान्यतानुसार भगवान श्री कृष्ण ने इसी माह में दिया था। अत: इस माह की अमावस्या तिथि भी बहुत ही पुण्य फलदायी मानी जाती है।


अगहन अमावस्या व्रत महत्व

शास्त्रों में कहा गया है कि देवताओं से पहले अपने पूर्वज़ों पितरों को प्रसन्न करना चाहिये। अक्सर अपने पितरों को प्रसन्न करने के प्रयास करते भी हैं। लेकिन जिस प्रकार श्राद्ध पक्ष की अमावस्या को सर्वपितृ अमावस्या मनाई जाती है उसी प्रकार अगहन अमावस्या यानि मार्गशीर्ष अमावस्या को व्रत रखने से भी पितर प्रसन्न किये जा सकते हैं। जिन जातकों की कुंडली में पितृ दोष हों, जिनकी कुंडली के योगों में संतान प्राप्ति के लक्षण ही न दिखाई देते हों, या फिर भाग्य स्थान में राहू नीच के हों इस प्रकार के पीड़ित योग वाले जातकों को इस अमावस्या का उपवास अवश्य करना चाहिये। मान्यता है कि इसके रखने से उपासक को मनोवांछित फल प्राप्त होते हैं। पौराणिक ग्रंथों में तो यहां तक कहा गया है कि इस अमावस्या के उपवास से न केवल पितृगण बल्कि ब्रह्मा, इंद्र, रूद्र, अश्विनीकुमार, सूर्य, अग्नि, पशु-पक्षियों सहित सब भूत-प्राणियों की तृप्ति होती है।

यदि आप भी महसूस करते हैं कि आपके बनते हुए काम अचानक से बिगड़ जाते हैं और सफलता से कुछ ही कदम पहले आप असफल हो जाते हैं तो हो सकता है आपके पितर आपसे नाराज़ हों। अपनी कुंडली के बारे में ज्योतिषाचार्यों से एक बार अवश्य परामर्श करें, मार्गदर्शन हो सकता है। ज्योतिषियों से अभी बात करने के लिये यहां क्लिक करें।


मार्गशीर्ष अमावस्य व्रत पूजा विधि

प्रत्येक अमावस्या की तिथि पर स्नान दान का बहुत अधिक महत्व माना जाता है। मार्गशीर्ष अमावस्या के अवसर पर भी यमुना नदी में स्नान करना विशेषकर पुण्य फलदायी माना जाता है। इस दिन व्रत रखने के साथ साथ श्री सत्यनारायाण भगवान की पूजा व कथा करनी चाहिये। मान्यता है कि जो विधि विधान से यह पूजा करता है उसके लिये यह उपवास अमोघ फलदायी होता है। व्रती को स्नाना आदि के पश्चात सामर्थ्य अनुसार दान-दक्षिणा अवश्य देनी चाहिये इससे उसके समस्त पाप नष्ट हो जाते हैं।


मार्गशीर्ष अमावस्या 2018 में कब है?

मार्गशीर्ष अमावस्या जिसे अगहन अमावस्य भी कहते हैं। मार्गशीर्ष माह के कृष्ण पक्ष की अंतिम तिथि होती है। अंग्रेजी कैलेंडर के अनुसार साल 2018 में यह तिथि 7 दिसंबर को शुक्रवार के दिन है।

मार्गशीर्ष अमावस्या तिथि – 7 दिसंबर 2018

मार्गशीर्ष अमावस्या आरंभ – 12:12 बजे से (6 दिसंबर 2018)

मार्गशीर्ष अमावस्या समाप्त – 12:50 बजे तक (7 दिसंबर 2018)


संबंधित लेख

अमावस्या 2018 – कब-कब हैं अमावस्या तिथि   |   फाल्गुन अमावस्या   |   वैशाख अमावस्या   |   ज्येष्ठ अमावस्या

आषाढ़ अमावस्या   |   सावन अमावस्या   |   भाद्रपद अमावस्या   |   अश्विन सर्वपितृ अमावस्या   |   माघ मौनी अमावस्या





एस्ट्रो लेख संग्रह से अन्य लेख पढ़ने के लिये यहां क्लिक करें

शुक्र मार्गी - शुक्र की बदल रही है चाल! क्या होगा हाल? जानिए राशिफल

शुक्र मार्गी - शुक...

शुक्र ग्रह वर्तमान में अपनी ही राशि तुला में चल रहे हैं। 1 सितंबर को शुक्र ने तुला राशि में प्रवेश किया था व 6 अक्तूबर को शुक्र की चाल उल्टी हो गई थी यानि शुक्र वक्र...

और पढ़ें...
वृश्चिक सक्रांति - सूर्य, गुरु व बुध का साथ! कैसे रहेंगें हालात जानिए राशिफल?

वृश्चिक सक्रांति -...

16 नवंबर को ज्योतिष के नज़रिये से ग्रहों की चाल में कुछ महत्वपूर्ण बदलाव हो रहे हैं। ज्योतिषशास्त्र के अनुसार ग्रहों की चाल मानव जीवन पर व्यापक प्रभाव डालती है। इस द...

और पढ़ें...
कार्तिक पूर्णिमा – बहुत खास है यह पूर्णिमा!

कार्तिक पूर्णिमा –...

हिंदू पंचांग मास में कार्तिक माह का विशेष महत्व होता है। कृष्ण पक्ष में जहां धनतेरस से लेकर दीपावली जैसे महापर्व आते हैं तो शुक्ल पक्ष में भी गोवर्धन पूजा, भैया दूज ...

और पढ़ें...
गोपाष्टमी 2018 – गो पूजन का एक पवित्र दिन

गोपाष्टमी 2018 – ग...

गोपाष्टमी,  ब्रज  में भारतीय संस्कृति  का एक प्रमुख पर्व है।  गायों  की रक्षा करने के कारण भगवान श्री कृष्ण जी का अतिप्रिय नाम 'गोविन्द' पड़ा। कार्तिक शुक्ल ...

और पढ़ें...
देवोत्थान एकादशी 2018 - देवोत्थान एकादशी व्रत पूजा विधि व मुहूर्त

देवोत्थान एकादशी 2...

देवशयनी एकादशी के बाद भगवान श्री हरि यानि की विष्णु जी चार मास के लिये सो जाते हैं ऐसे में जिस दिन वे अपनी निद्रा से जागते हैं तो वह दिन अपने आप में ही भाग्यशाली हो ...

और पढ़ें...