वक्री शनि करेंगे मकर राशि में गोचर, किन राशियों को करेंगे प्रभावित

bell icon Tue, Jul 05, 2022
गुरु श्रीराम गुरु श्रीराम के द्वारा
शनि का मकर राशि में गोचर, कई राशियों पर डालेगा प्रतिकूल प्रभाव

Saturn वक्री शनि के मकर राशि में प्रवेश करते ही प्रत्येक राशि के जातकों के जीवन में कई बदलाव होंगे। आइयें जानते हैं कि इस परिवर्तन का आपकी जीवन पर क्या प्रभाव पड़ेगा।

शनि ग्रह ज्ञान, अनुशासन और कर्म का प्रतीक हैं जो आपके जीवन के उन क्षेत्रों पर प्रकाश डालने के लिए जाने जाते हैं जिसमे आपकी वृद्धि संभव है। शनि धीमी गति से चलने वाला ग्रह है और ये मानव जीवन में न्याय का प्रतिनिधित्व करते हैं। यह जन्म कुंडली में 10वें और 11वें भाव का स्वामी हैं। शनि कर्म के देवता हैं और व्यक्ति को उसके कर्म के अनुसार फल देते हैं। शनि 12 जुलाई को सुबह 10:28 बजे (भारतीय मानक समय) मकर राशि में गोचर करेंगे और 17 जनवरी 2023 तक रहेंगे। इस अवधि के दौरान मिथुन और तुला राशि, शनि की ढैय्या व मकर,कुंभ और धनु राशि, शनि की साढ़ेसाती का सामना करेंगी। जो राशियां शनि की साढ़ेसाती के अंतर्गत आ रहीं हैं, उस राशि के जातकों को इस दौरान किसी प्रकार का जोखिम लेने से बचना होगा।

शनि के मकर राशि में प्रवेश का क्या होगा आपके जीवन पर असर? जानने के लिए अभी परामर्श करें ज्योतिषाचार्य गुरु श्रीराम से।

आइये जानते हैं कि इस गोचर का विभिन्न राशियों पर क्या प्रभाव पड़ेगा।?

वक्री शनि के मकर राशि में गोचर का मेष राशि पर प्रभाव :

शनि दसवें और ग्यारहवें भाव के स्वामी हैं और मेष राशि के दसवें भाव में स्थित होंगे। इस अवधि में जातक को कार्य में कठिनाइयों का सामना करना पड़ सकता है। निवेश से लाभ कम रहेगा। प्रेमियों को अपने पार्टनर के साथ किसी भी मुद्दे पर चर्चा करने में परेशानी होगी। वहीं, व्यापार से जुड़े लोगों को लाभ मिलेगा। यह इस बात को निर्धारित करने का सही समय है कि आपको कहां निवेश करना चाहिए। इस समय आपका स्वास्थ्य प्रभावित हो सकता है। गृहणियों को परिवार के सदस्यों के साथ तालमेल बिठाने में दिक्कतों का सामना करना पड़ सकता है। जो विद्यार्थी सरकारी परीक्षाओं की तैयारी कर रहे हैं, वे आसानी से चुनौतियों का सामना करने में सफल होंगे।

उपाय: प्रतिदिन 108 बार "ओम नमः शिवाय" का पाठ करें।

वक्री शनि के मकर राशि में गोचर का वृषभ राशि पर प्रभाव:

वृषभ राशि के जातकों के लिए शनि, भाग्य, गुरु और विदेश यात्रा के भाव में स्थित होंगे। जो लोग विदेश यात्रा पर जाने की योजना बना रहे हैं, वे बिना किसी कठिनाई के यात्रा पर जा सकेंगे। विद्यार्थियों को एक अच्छी नौकरी पाने के लिए व परीक्षा में उत्तीर्ण होने के लिए अतिरिक्त प्रयास करने की आवश्यकता है। नौकरीपेशा लोगों को अधिकारियों की ओर से दिक्कतों का सामना करना पड़ सकता है। विवाहित जोड़ों के संबंधों में मधुरता आयेगी। विचार-विमर्श और विश्लेषण के बाद निवेश की नई योजना बनानी होगी। नए रिश्ते में आने के लिए यह एक अच्छा समय है।

उपाय: प्रतिदिन हनुमान चालीसा का पाठ करें।

वक्री शनि के मकर राशि में गोचर का मिथुन राशि पर प्रभाव:

शनि का गोचर अष्टम भाव में हो रहा है। यह मिथुन राशि के जातकों की आर्थिक स्थिति को सकारात्मक रूप से प्रभावित करेगा। फाइनेंशियल प्लानिंग के लिए भी यह अच्छा रहेगा। अगर जीवन में कोई समस्या है, तो उसका समाधान होगा। अत: यह गोचर उन लोगों के लिए अच्छा होगा, जो सफल होने के लिए प्रयास कर रहे हैं। विद्यार्थी चुनौतियों का सामना करने में सक्षम होंगे। प्रेमियों के लिए यह समय सकारात्मक रहेगा और उन्हें भावनात्मक के साथ-साथ सामाजिक सहयोग भी मिलेगा। आर्थिक रूप से यह समय कर्मचारियों के लिए भी अच्छा है। सच्चाई के मार्ग पर चलने वालों के लिए इस अवधि में विकास करना आसान होगा। सोच-समझकर और ध्यानपूर्वक व्यापार करने से व्यवसाय को समृद्धि एवं वृद्धि की प्राप्ति होगी। स्वास्थ्य संबंधी समस्याएं आपको प्रभावित कर सकती हैं। इसके लिए आपको स्वास्थ्य पर ध्यान देने की आवश्यकता है।

उपाय: प्रतिदिन श्रीमद्भागवत गीता के पांचवें अध्याय का पाठ करें।

वक्री शनि के मकर राशि में गोचर का कर्क राशि पर प्रभाव :

 

कर्क राशि के स्वामी चंद्रमा हैं और यह गोचर सप्तम भाव में होगा। यह रिश्तों पर प्रतिकूल प्रभाव डालेगा। जो लोग साझेदारी में व्यापार कर रहे हैं, उन्हें परेशानी का सामना करना पड़ सकता है। इससे बचने के लिए अपने पार्टनर से सभी मुद्दों पर बात करें। इस अवधि में प्रेम संबंध प्रगाढ़ होंगे,साथ ही इस समय किया गया निवेश उचित रिटर्न देगा। नए प्रोजेक्ट को शुरू करने से बचें, क्योंकि इससे नुकसान हो सकता है। हो सकता है कि इस अवधि में आपको परिवार का सहयोग कम मिलेगा, इसलिए धैर्य रखें। इस गोचर के दौरान कर्क राशि के जातकों का स्वास्थ्य उत्तम रहेगा। विद्यार्थियों को अच्छे परिणाम प्राप्त करने के लिए अधिक परिश्रम की आवश्यकता है। इस समय उचित परिणाम प्राप्त करने के लिए आपको सच्चाई का साथ देना होगा।

उपाय: प्रतिदिन गुरुगीता पढ़ने से लाभ होगा।

वक्री शनि के मकर राशि में गोचर का सिंह राशि पर प्रभाव:

सिंह राशि के स्वामी सूर्य हैं और शनि का यह गोचर छठवें भाव में होगा, जो सिंह राशि के जातकों पर प्रतिकूल और सकारात्मक दोनों तरह से प्रभाव डालेगा। आपको अपने रिश्तों को संभालने में सावधानी बरतनी होगी। बातचीत की कमी आपके लिए परेशानी खड़ी कर सकती है। इस समय आपकी आर्थिक स्थिति अच्छी रहेगी, लेकिन कोई नया प्रोजेक्ट शुरू करने से पहले थोड़ा विश्लेषण करना होगा। इस दौरान कुछ आर्थिक संकट उत्पन्न हो सकते हैं, लेकिन आप अपने प्रयासों से उन्हें दूर करने में सफल रहेंगे। हिचकिचाहट और प्रयास की कमी आपको असफलता की ओर ले जा सकती है। वहीं, ध्यान और प्रयास आपको सफलता की ओर ले जाएगा। इस अवधि में आपकी सेहत में भी सुधार होगा।

उपाय: प्रतिदिन "गण गणपतये नमः" का जाप करें।

वक्री शनि के मकर राशि में गोचर का कन्या राशि पर प्रभाव:

कन्या राशि के स्वामी बुध हैं और शनि का यह गोचर पंचम भाव, प्रेम, बुद्धि और शिक्षा के भाव में होगा। कन्या राशि के जातकों को प्रेम संबंधों में दिक्कतों का सामना कर पड़ सकता है। इस गोचर की अवधि में आपकी आर्थिक स्थिति ठीक रहेगी। जीवन में आपको पार्टनर मिलने की संभावना हैं। वेतनभोगी वर्ग के लोगों के वेतन में वृद्धि होने की संभावना है। व्यापार, निवेशकों को उचित रिटर्न भी देगा। नई अवधारणाएं और नए विचार दिमाग में आएंगे और उन पर अमल करने से आपको अधिकतम लाभ प्राप्त करने में मदद मिल सकती है। स्वास्थ्य संबंधी परेशानियों का सामना करना पड़ सकता है, लेकिन समय के साथ सेहत में सुधार होगा।

उपाय: प्रतिदिन प्रातः काल विष्णु सहस्त्रनाम का पाठ करें।

वक्री शनि के मकर राशि में गोचर का तुला राशि पर प्रभाव:

 

तुला राशि के स्वामी शुक्र हैं और शनि का यह गोचर चतुर्थ भाव में होगा। प्रॉपर्टी और कारों की खरीद के लिए यह समय अच्छा है। आर्थिक रूप से भले ही आप मजबूत हों, लेकिन फिर भी पैसा खर्च करते समय उचित सावधानी बरतना आवश्यक है। नौकरी के लिए प्रयास कर रहे जातकों के लिए यह एक अच्छी अवधि है, क्योंकि इस गोचर के दौरान उन्हें नौकरी के बेहतर अवसर मिलेंगे, जो अंततः उन्हें आर्थिक रूप से मजबूत बनाएंगे। आपको शेयर बाजार में पैसा लगाना चाहिए क्योंकि यह उचित रिटर्न देगा। प्रेमी जोड़े इस समय खुद को रोमांटिक मूड में पाएंगे। शादीशुदा जोड़े भी इस अवधि का पूरा आनंद उठाएंगे।

उपाय: महामृत्युंजय मंत्र का प्रतिदिन 108 बार जाप करें।

वक्री शनि के मकर राशि में गोचर का वृश्चिक राशि पर प्रभाव:

शनि, वृश्चिक राशि के तीसरे भाव में गोचर करेंगे, जो साहस और प्रयास का घर है। जब आप सफलता पाने के लिए प्रयास करेंगे, तब ही आपको सफलता प्राप्त होगी। नई परियोजना व पहल को क्रियान्वित करने के लिए बहुत अधिक प्रयास की आवश्यकता होगी। इस गोचर के दौरान वृश्चिक राशि के जातकों के प्रेम संबंधों में मधुरता आयेगी। इस अवधि में आपको सच्चा प्यार मिलने की संभावना है। अगर आप नौकरी बदलने का सोच रहें हैं तो इस अवधि में आपको नए अवसर मिलेंगे इसलिए नौकरी बदलने का यह सही समय है। जो लोग सरकारी नौकरी की तलाश कर रहे हैं, उनकोे सफलता मिलेगी। नई परियोजनाओं के लिए व्यवसायी वर्ग के लोग मजबूत स्थिति में होंगे।

उपाय: प्रतिदिन "ओम हं हनुमते नमः" का 108 बार जाप करें।

वक्री शनि के मकर राशि में गोचर का धनु राशि पर प्रभाव:

शनि, धनु राशि के दूसरे भाव के स्वामी हैं, यह भाव धन के साथ-साथ वाणी को भी प्रभावित करता है। इस राशि के जातकों की वाणी में कड़वाहट आ सकती है, जो आपके कम्यूनिकेशन स्किल को प्रभावित कर सकती है। इसके लिए आपको दूसरों से बात करते समय सावधान रहने की आवश्यकता है। आपकी वाणी उनके जीवन में परेशानी का कारण बन सकती है। आप आर्थिक रूप से चिंतित रहेंगे, लेकिन इसका आप पर कोई प्रतिकूल प्रभाव नहीं पड़ेगा। प्रेमी जोड़ों के लिए यह समय अच्छा रहेगा, सकारात्मक ऊर्जा का प्रवाह बना रहेगा, मन प्रसन्न रहेगा। इस अवधि में आपकी सेहत में भी सुधार होगा। इस अवधि में आपका दिमाग ऐसे विचारों से भरा होगा, जो चीजों को सकारात्मक रूप से प्रभावित करेंगे। यदि आपके विचार प्रासंगिक हैं और आप उनके अनुसार कार्य भी करते हैं तो आपके अपने अधिकारियों व कंपनी से संबंध मधुर होंगे। यह आपकी प्रोडक्चिविटी को बढ़ायेगा। इससे आप और कंपनी दोनों को फायदा होगा।

उपाय: प्रतिदिन 15 मिनट "ओम" का जाप करें।

वक्री शनि के मकर राशि में गोचर का कुंभ राशि पर प्रभाव:

शनि, कुंभ राशि में बारहवें भाव के स्वामी हैं। जो लोग विदेश यात्रा की योजना बना रहे हैं उन्हें इस अवधि में सफलता मिलेगी, लेकिन इससे आपके खर्चे बढ़ेंगे। जोड़ों और प्रेमियों के लिए यह समय थोड़ा मुश्किल भरा रहेगा। पार्टनर के बीच झगड़े या विवाद की संभावना है, लेकिन वे उन्हें दूर करने में सफल रहेंगे। इस अवधि में निर्यात और आयात का कारोबार अच्छा रहेगा। आपको किसी तीर्थ यात्रा पर जाने का अवसर मिल सकता है जो अंततः अध्यात्म में आपके विश्वास को बढ़ाएगा। प्रेमियों को नये रिश्ते में जाने का मौका मिलेगा। इस दौरान नए प्रोजेक्ट आसानी से स्थापित हो सकते हैं। विद्यार्थियों को अपने कार्यों में सफलता मिलेगी। कर्मचारियों के लिए यह एक अच्छी अवधि है क्योंकि उन्हें पदोन्नति मिलेगी, जिससे उनकी सामाजिक स्थिति के साथ-साथ उनके वित्तीय क्षेत्र में भी वृद्धि होगी।

उपाय: प्रतिदिन 15 मिनट तक रामचरितमानस का पाठ करें।

वक्री शनि के मकर राशि में गोचर का मीन राशि पर प्रभाव:

शनि ग्यारहवें भाव में गोचर करेंगे, जो लाभ का भाव है। इससे मीन राशि के जातकों को आर्थिक लाभ मिलेगा। प्रेमी जोड़ों को एक दूसरों का साथ मिलेगा। अगर आप रियल स्टेट के कारोबार में हैं तो आपकी आर्थिक स्थिति मजबूत रहेगी। मीन राशि के जातकों के आध्यात्मिक विकास के लिए यह अवधि अच्छी रहेगी। कारोबारियों को इस अविध में बेहतर लाभ मिलेगा। आपको अपने स्वास्थ्य का ध्यान रखना चाहिए क्योंकि यह चिंता का कारण बन सकता है। शेयर बाजार में पैसा लगाने से पहले आपको विश्लेषण करना चाहिए। इस अवधि में शादीशुदा जोड़े खुश रहेंगे। हालांकि, जो लोग रिलेशनशिप में हैं उनके लिए अपने पार्टनर के साथ तालमेल बिठाना मुश्किल होगा।

उपाय: प्रतिदिन 108 बार गायत्री मंत्र का जाप करें।

निष्कर्ष:

शनि के मकर राशि में गोचर को लेकर हम सभी को आशान्वित और उत्साहित रहने की जरूरत है। इस अवधि के दौरान अधिक से अधिक लाभ प्राप्त करने के लिए सच्चा और ईमानदार होना सबसे अच्छा उपाय है। शनि न्याय के देवता हैं इसलिए, यदि आप अपनी नैतिकता से जीते हैं तो यह गोचर आपको पर्याप्त सकारात्मक परिणाम देगा।

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✍️ By- गुरु श्रीराम

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