मंत्र ध्यान

एक मंत्र एक शब्दांश, शब्द या वाक्यांश है जिसे ध्यान के दौरान दोहराया जाता है। मंत्रों को मन में बोला जा सकता है, जप किया जा सकता है, फुसफुसाया जा सकता है या दोहराया जा सकता है। अधिकांश मंत्र ध्यान (Mantra Meditation) तकनीकों में दो आवश्यक घटक होते हैं: माइंडफुलनेस मेडिटेशन और मंत्रों का जाप। हालांकि मंत्र ध्यान करने से साधक अपने लक्ष्यों के करीब आ जाते हैं और यह ध्यान उनके लक्ष्यों में पाने में मदद करता है। 


आखिरकार मंत्र है क्या? 


मंत्र एक ध्वनि कंपन है जिसके माध्यम से हम अपने विचारों, भावनाओं, ध्यान और इरादों पर ध्यान केंद्रित करते हैं। मंत्र, मेडिटेशन के लिए उपयोग की जाने वाली सबसे आम वस्तुओं में से एक हैं और सबसे शक्तिशाली ध्यान में से एक। आमतौर पर लोग अलग-अलग कारणों से मंत्र साधना करते हैं। कुछ के लिए, यह अवांछित विकर्षणों या भावनाओं के खिलाफ एक प्रकार की मानसिक सुरक्षा के रूप में कार्य करता है, जैसे कि नींद से जूझना या यात्रा से जुड़े डर का सामना करना। दूसरों के लिए, मंत्र ध्यान एक गहन आध्यात्मिक उद्देश्य प्रदान करता है। उदाहरण के लिए, मंत्र का उपयोग मन-हृदय को केंद्रित करने और परमात्मा के साथ जुड़ने के लिए किया जाता है।


तो मंत्र कहां से आया? मंत्र एक संस्कृत शब्द है जो दो जड़ों से निकला है: मन (जिसका अर्थ है "मन" या "सोचना") और तंत्र का अर्थ है "रक्षा करना", से "मुक्त करना", या "साधन / उपकरण"। इसलिए मंत्र मन का एक उपकरण है, जो ध्यान साधकों को एक उच्च शक्ति हासिल करने और उनके स्वयं की खोज करने में मदद करने के लिए डिज़ाइन किया गया है। प्राचीन ध्यान परंपराओं ने कहा है कि मंत्र और ध्यान एक ही सिक्के के दो पहलू की तरह हैं।


आपको बता दें कि दुनियाभर में 10 मिलियन से ज्याद मंत्र अस्तित्व में हैं। परंतु ध्यान में सबसे सार्वभौमिक रूप से गायन मंत्रों में से एक पवित्र हिंदू शब्द ‘ओम’ है, जिसे ब्रह्मांड के निर्माण की ध्वनि माना जाता है। माना जाता है कि ओम ध्वनि में हर कंपन होता है जो कहीं न कहीं मौजूद होता है। वास्तव में, जब आप ओम नम: शिवाय का जाप करते हैं तो आप आंतरिक आत्मा की तरफ ध्यान केंद्रित करते हैं। यह मंत्र आंतरिक क्षमता और शक्ति को बढ़ाता है और सकारात्मक ऊर्जा का संचार करता है। वैसे तो अधिकांश मंत्र संस्कृत में हिंदू मूल के हैं, लेकिन आपको विभिन्न आध्यात्मिक परंपराओं में मंत्र मिल जाएंगे जैसे कि यह हिब्रू, लैटिन, अंग्रेजी आदि में।


मंत्र साधना कैसे करें


मंत्र ध्यान (Mantra Meditation) पांच से 20 मिनट तक या अधिक समय तक आप कर सकते हैं। वैसे तो हम एक से दो मिनट के लिए चरण 1 और 2 में रहने की सलाह देते हैं; तीन से पांच मिनट के लिए चरण 3 में; और पांच से 15 मिनट के लिए चरण 4 में।


  • मंत्र ध्यान का पहला कदम होता है किसी एक अच्छे मंत्र की खोज करना। फिर एक शांत स्थान की तलाश करना और अधिक रोशनी से बचना क्योंकि यह ध्यान के दौरान आपकी एकाग्रता में बाधा डाल सकती है। 
  • इसके बाद किसी आरामदायक मुद्रा में बैठ जाएं या लेट भी सकते हैं। यदि बैठे हैं तो आपकी रीढ़ की हड्डी और गर्दन सीधी होनी चाहिए और पलथी मारकर बैठें।
  • अब अपनी आंखें बंद कर लें और कुछ धीमी, मध्यम और गहरी सांस ले और श्वास छोड़े वक्त चुपचाप मंत्र को दोहराएं। लेकिन अपना ध्यान श्वास पर बनाए रखें।
  • अपने मन को शांत रखें और मन में आने वाले अवांछित विचारों पर ध्यान न दें और फिर से मंत्र को दोहराएं। 
  • आप जब तक चाहें मंत्र ध्यान कर सकते हैं। कम से कम 10 बार मंत्रोच्चारण अवश्य करें। फिर ध्यान साधना के अंत में मंत्र को जाने दें और सांस पर ध्यान केंद्रित करें। ऐसा करने से आप आसपास के वातावरण के प्रति सजग हो जाएंगे और अपने नियमित जीवन में वापस जाने के लिए तैयार होंगे।

मंत्र ध्यान के लाभ


ध्यान के लिए मंत्र जप का लाभ भक्ति, विश्वास और मंत्र की निरंतर पुनरावृत्ति के माध्यम से ही अनुभव किया जा सकता है। सबसे अच्छी बात यह है कि सभी मंत्रों में तीव्र और सकारात्मक शारीरिक और मनोवैज्ञानिक लाभ हैं।


  • यह ध्यान तनाव दूर करता है। मंत्र जप की लय और ध्वनि पूरे शरीर में ऊर्जा ले आती है। ऊर्जा की गति हमारे दिमाग में रसायनों को नियंत्रित करती है। यह तनाव हार्मोन को अवरुद्ध करता है और एंडोर्फिन जारी करता है।
  • मंत्र ध्यान हृदय गति को नियंत्रित करता है।
  • मंत्र सकारात्मक अल्फा, गामा, डेल्टा और दिमागी तरंगों को बढ़ाते हैं - मस्तिष्क की तरंगें जो विश्राम के दौरान हमें परेशान करती हैं।
  • जप करने से प्रतिरोधक क्षमता बढ़ती है, और रक्तचाप कम होता है। मंत्र की ध्वनि के माध्यम से नकारात्मक विचारों को दबा दिया जाता है, तो मन में सकारात्मक विचारों के लिए जगह बन जाती है।
  • मंत्र मेडिटेशन विचारों को प्रबंधित करने एवं शारीरिक और मानसिक कल्याण प्राप्त करने का एक स्वतंत्र और आसान तरीका है।
  • मंत्रों का जाप से भय कम होता है। भय के समय में फोबिया वाले लोग अक्सर मंत्रों का ही उच्चारण करते हैं।
  • यह हमारी आध्यात्मिक पहचान को जाग्रत करके करुणा का संचार करता है। इसके परिणामस्वरूप करुणा के लिए हमारे दिल और दिमाग खुल जाते हैं जहाँ हम ईर्ष्या, द्वेष और अहंकार से मुक्त अपना जीवन जी सकते हैं।
  • चंचल मन पर इसका गहरा गहरा प्रभाव पड़ता है। मंत्रों का जाप हमें समय और स्थान की सीमा से परे ले जाता है। यह भौतिक दुनिया के स्थलों, ध्वनियों और सिमुलेशन से हमें छुटकारा दिलाता है और हमें एक दिव्य आध्यात्मिक स्थान पर ले जाता है। 




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