बुध यंत्र

नवग्रहों में बुध ग्रह को सुकुमार और युवराज ग्रह माना जाता है। यह ग्रह बुद्धि और खूबसूरती का कारक है और इसे संचार यानि कम्युनिकेशन का ग्रह कहा जाता है। कुंडली में बुध की स्थिति से पता चलता है कि आप कैसा बोलते हैं, कैसा व्यवहार करते हैं, आपका व्यक्तित्व कैसा है और आपकी बुद्धि कितनी चलती है। जिसकी कुंडली में बुध की स्थिति अच्छी होती है उसे व्यापार में सफलता मिलने की संभावना बढ़ जाती है। जिसकी कुंडली में बुध स्वामी होता है वे लोग तेज दिमाग वाले और तेज सोचने की शक्ति रखने वाले होते हैं। यदि किसी कुंडली में बुध कमजोर होता है तो व्यक्ति के सोचने और समझने की शक्ति कमजोर हो जाती है और मन भटकने लगता है। ऐसे में बुध यंत्र (Budh Yantra) की पूजा करने से व्यक्ति के जीवन में सुख-शांति बनी रहती है। 


बुध यंत्र लाभ

बुध यंत्र को स्थापित करने से जीवन में सकारात्मक ऊर्जा और आत्मविश्वास की वृद्धि होती है। 
बुध यंत्र का प्रयोग किसी कुंडली में अशुभ बुद्ध द्वारा बनाए जाने वाले दोषों को कम करने के लिए या उनके निवारण के लिए किया जा सकता है। 
जिन विद्यार्थियों का मन पढ़ने- लिखने में नहीं लगता है या उन्हें हमेशा पढ़ाई का स्ट्रेस बना रहता है, उनके लिए बुध यंत्र पेडेंट को धारण करना लाभदायक रहता है। 
बुध यंत्र (Budh Yantra) का शुभ प्रभाव व्यवसाय और व्यापार के माध्यम से अधिक धन अर्जित करने और अधिक सफलता प्राप्त करने में भी मदद करता है। 
बुध यंत्र संगीत, एक्टिंग, डायरेक्शन, राइटिंग आदि के क्षेत्रों से जुड़े जातकों को शुभ फल प्रदान करता है। 
यदि किसी की कुंडली में बुध कमजोर है तो बुध यंत्र से उसके अशुभ प्रभाव को कम किया जा सकता है। 
जिन ब्यक्तियों को अस्थमा या श्वसन सम्बंधी परेशानी होने पर, बदहजमी, (Indigestion), कान से सम्बंधित रोग, तुतलाना या रुक रुक के बोलने पर, याददाशत कमजोर होने पर तथा चर्म रोग से बचने के लिये यह यंत्र धारण करना चाहिए।


ध्यान रखने योग्य बातें

बुध यंत्र को स्थापित करते वक्त इसके शुद्धिकरण और प्राण प्रतिष्ठा जैसे महत्वपूर्ण चरण सम्मिलित होने चाहिए। प्राण प्रतिष्ठा करवाए बिना बुध यंत्र विशेष लाभ प्रदान नहीं करता है। इसलिए इस यंत्र को स्थापित करने से पहले सुनिश्चित करें कि यह विधिवत बनाया गया हो और इसकी प्राण प्रतिष्ठा हुई हो। बुध यंत्र खरीदने के पश्चात किसी अनुभवी ज्योतिषी की सलाह लेकर उसे घर की सही दिशा में स्थापित करना चाहिए। अभ्यस्त और सक्रिय बुध यंत्र को बुधवार के दिन स्थापित करना चाहिए।


स्थापना विधि

बुध यंत्र (Budh Yantra) को स्थापित करने के लिए सबसे पहले प्रातकाल उठकर स्नानादि से निवृत्त होकर गुरु यंत्र को पूजन स्थल पर रखकर 11 या 21 बार गुरु के बीज मंत्र का “ऊँ ब्रां ब्रीं ब्रौं स: बुधये नम:” का जाप करें। इसके बाद बुध यंत्र को गौमूत्र, गंगाजल और कच्चे दूध से शुद्ध करें और बुधदेव से हाथ जोड़कर प्रार्थना करें कि वह अधिक से अधिक शुभ फल प्रदान करें। तत्पश्चात, बुध यंत्र स्थापित करने के पश्चात इसे नियमित रूप से धोकर इसकी पूजा करें ताकि इसका प्रभाव कम ना हो। यदि आप इस यंत्र के पेडेंट को बटुए या गले में धारण करते हैं तो स्नानादि के बाद अपने हाथ में यंत्र को लेकर उपरोक्त विधिपूर्वक  इसका पूजन करें। 

बुध यंत्र का मंत्र - ऊँ ब्रां ब्रीं ब्रौं स: बुधये नम:


भारत के शीर्ष ज्योतिषियों से ऑनलाइन परामर्श करने के लिए यहां क्लिक करें!

एस्ट्रो लेख

कजरी तीज 2020

5 अगस्त को क्यों रखा गया श्रीराम मंदिर भूमि पूजन का मुहूर्त? जानिए ज्योतिष की दृष्टि से

भाद्रपद - भादों मास के व्रत व त्यौहार

भाई की सुख समृद्धि हेतु राशिनुसार बांधे इस रंग की राखी

Chat now for Support
Support