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श्री शिव यंत्र

शिव शब्द संस्कृत से लिया गया है जिसका अर्थ है कल्याणकारी और शुभकारी। शि का अर्थ है पापों का नाश करने वाला और व का अर्थ है दाता। शिव का सृष्टि का प्राण माना जाता है। शिव जीवनदाता भी है और संहारकारक भी। हिंदू धर्म में शिव को अति शीघ्र प्रसन्न होने वाले देवता के रूप में पूजा जाता है। भगवान भोलेनाथ की कृपा पाने के लिए और उन्हे प्रसन्न् करने के लिए शिव यंत्र (Shiv Yantra) भी लाभकारी है। वैदिक ज्योतिष के अनुसार श्री शिव यंत्र की विधिवत पूजा करने से विभिन्न प्रकार को दोष और कष्टों का निवारण हो जाता है। शिव यंत्र को स्थापित करने से दीर्घायु, स्वास्थ्य, सुख, समृद्धि, आध्यात्मिक विकास और सभी मनोरथ की पूर्ति हो जाती है। 


श्री शिव यंत्र के लाभ

जीवन में आनी वाली सभी बाधाओं को दूर करने के लिए आपको अपने घऱ में श्री शिव यंत्र की स्थापना करनी चाहिए।
घर में नकारात्मक ऊर्जा को दूर करने के लिए शिव यंत्र को स्थापित करने से सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।
इस यंत्र को स्थापित करने से काम, क्रोध, मोह और माया दूर होती है और मन में शांति और सकारात्मकता आती है।
ज्योतिष के अनुसार ग्रहों के अशुभ प्रभावों को कम करने के लिए इस यंत्र को धारण करना भी लाभकारी सिद्ध होता है। 
सभी रोगों और कमजोरियों से निजात पाने के लिए शिव यंत्र धारण करना रामबाण उपाय है। 
इस यंत्र को स्थापित करने से बौद्धिक विकास और सही निर्णय लेने की क्षमता पैदा होती है। 
किसी भी प्रकार के मुकदमों में जीत हासिल करने के लिए आपको शिव यंत्र की स्थापना करनी चाहिए।


ध्यान रखने योग्य बातें

श्री शिव यंत्र (Shiv Yantra) की स्थापना से प्राप्त होने वाले लाभ किसी जातक को तभी प्राप्त हो सकते हैं। जब इस यंत्र को शुद्धिकरण, प्राण प्रतिष्ठा और ऊर्जा संग्रही की प्रक्रियाओं के माध्यम से विधिवत बनाया गया हो। साथ ही शिव यंत्र को खरीदने के पश्चात किसी अनुभवी ज्योतिषी द्वारा अभिमंत्रित करके उसे घऱ की सही दिशा में स्थापित करना चाहिेए। अभ्यस्त और सक्रिय श्री शिव यंत्र को सोमवार के दिन स्थापित करना चाहिए लेकिन महाशिवरात्रि के दिन स्थापित करने से सर्वाधिक लाभ प्राप्त होता है।


शिव यंत्र स्थापना विधि

आमतौर पर महाशिवरात्रि में इस यंत्र को स्थापित करना शुभ फलदायी होता है लेकिन आप इसे सोमवार को स्थापित कर सकते हैं। स्थापना से पूर्व प्रातकाल स्नानादि के पश्चात पूजास्थल पर शिव प्रतिमा के समक्ष इस यंत्र को स्थापित करना चाहिए। फिर यंत्र के सामने घी का दीपक जलाना चाहिए और यंत्र का पंचामृत से अभिषेक करना चाहिए। तत्पश्चात यंत्र पर चंदन, सफेद पुष्प और सफेद भोग अर्पित करना चाहिए। इसके पश्चात श्री शिव यंत्र (Shiv Yantra) के बीज मंत्र "ऊं नम: शिवाय" का 11 या 21 बार जाप करना चाहिए। इसके बाद भगवान शिव की आराधना करते हुए यंत्र को यथास्थान स्थापित कर देना चाहिए। इस यंत्र को स्थापित करने के पश्चात इसे नियमित रूप से धोकर इसकी पूजा करें ताकि इसका प्रभाव कम ना हो। यदि आप इस यंत्र को बटुए या गले में धारण करते हैं तो स्नानादि के बाद अपने हाथ में यंत्र को लेकर उपरोक्त विधिपूर्वक इसका पूजन करें। 

शिव यंत्र का बीज मंत्र - ऊँ नम: शिवाय


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