नवग्रह यंत्र

ज्योतिषशास्त्र के अनुसार हमारे जीवन में नवग्रह का बहुत महत्व है, सीधे-सीधे हमारी राशियों पर प्रभाव डालते हैं। सभी ग्रह भगवान शिव के रूद्र से अवतरित हुए हैं। वहीं व्यक्ति के जीवन में घटित होने वाली अच्छी और बुरी घटनाएं भी ग्रहों की चाल पर निर्भर करती हैं। यदि आपके घर में बिना बात के कलह होने लगे, हर काम बनते-बनते बिगड़ने लगे, कोई शत्रु आपको परेशान करने लगे, आपकी सेहत ठीक नहीं रह रही हो, आपको समाज में मान-सम्मान नहीं मिल रहा हो और आप संतान से परेशान हो तो ज्योतिषशास्त्र के अनुसार इसका मतलब होता है कि आप नवग्रह दोषों से ग्रसित हैं। आपके ग्रहों ने चाल बदली है और कोई न कोई ग्रह कमजोर है या खराब स्थिति में है। कुंडली में नवग्रहों के नौ देवता भी होते हैं। यदि आपकी कुंडली में कोई ग्रह कमजोर है तो आप उस ग्रह के स्वामी की पूजा करके शुभ फल प्राप्त कर सकते हैं। हालांकि नवग्रहों में से प्रत्येक ग्रह के लिए एक विशेष यंत्र होता है लेकिन कुछ वैदिक ज्योतिषी नवग्रहो के एक संयुक्त यंत्र जिसे नवग्रह यंत्र कहा जाता है, उसके प्रयोग करने की सलाह देते हैं। धारणा यह है कि नवग्रह यंत्र (Navgrah Yantra) की पूजा करने से जातक किसी भी प्रकार की समस्या से निजात पा सकता है, परंतु इसकी पूजा केवल उस स्थिति में होनी चाहिए, जब आप की व्यक्तिगत कुंडली में नौ ग्रह दूषित होते हैं। 

 

नवग्रह यंत्र के लाभ

नवग्रह यंत्र (Navgrah Yantra) की स्थापना से अशांत ग्रह शांत हो जाते हैं और उनके दुष्प्रभावों को कम भी किया जा सकता है। 
जीवन में सुख-समृद्धि, प्रसन्नता और सफलता के लिए इस यंत्र की स्थापना करना शुभ रहता है। 
यह यंत्र आपको स्वास्थ्य संबंधी परेशानियों को दूर करने और ऋण से राहत प्रदान करने में मदद करता है। 
इस यंत्र को अपने घर या ऑफिस में स्थापित करने से सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है। 
घर की सही दिशा में इस यंत्र को स्थापित करने से इसका प्रभाव निरंतर बढ़ता है। 
यह यंत्र सभी ग्रहों को पुरुषोचित प्रभाव को दूर करने के लिए उपयोगी है। 

ध्यान रखने योग्य बातें


नवग्रह यंत्र को स्थापित करते वक्त इसके शुद्धिकरण और प्राण प्रतिष्ठा जैसे महत्वपूर्ण चरण सम्मिलित होने चाहिए। प्राण प्रतिष्ठा करवाए बिना नवग्रह यंत्र विशेष लाभ प्रदान नहीं करता है। इसलिए इस यंत्र को स्थापित करने से पहले सुनिश्चित करें कि यह विधिवत बनाया गया हो और इसकी प्राण प्रतिष्ठा हुई हो। नवग्रह यंत्र खरीदने के पश्चात किसी अनुभवी ज्योतिषी की सलाह लेकर उसे घर की सही दिशा में स्थापित करना चाहिए। अभ्यस्त और सक्रिय नवग्रह यंत्र को शुक्ल पक्ष के रविवार को स्थापित करना चाहिए।


स्थापना विधि

नवग्रह यंत्र को स्थापित करने के लिए सबसे पहले प्रातकाल उठकर स्नानादि से निवृत्त होकर बुध यंत्र को पूजन स्थल पर रखकर 11 या 21 बार नवग्रह के बीज मंत्र का “
ब्रह्मा मुरारी त्रिपुरान्तकारी भानुः
शशि भूमि - सूतो बुधश्च
गुरुश्च शुक्रः शनि राहु केतवः
सर्वे ग्रहा शांति करा भवन्तु।” 
का जाप करें। इसके बाद नवग्रह यंत्र को गौमूत्र, गंगाजल और कच्चे दूध से शुद्ध करें और नवग्रह से हाथ जोड़कर प्रार्थना करें कि वह अधिक से अधिक शुभ फल प्रदान करें। इसके अलावा नवग्रह शांति यंत्र को लाल रंग की पृष्ठ पर चमकीले या स्वर्ण स्याही से बनाना उचित माना जाता है। इसकी स्थापना अगर नवरात्रों के दिनों में की जाए तो यह और भी अधिक फल देता है।
तत्पश्चात, नवग्रह यंत्र (Navgrah Yantra) स्थापित करने के पश्चात इसे नियमित रूप से धोकर इसकी पूजा करें ताकि इसका प्रभाव कम ना हो। यदि आप इस यंत्र के पेडेंट को बटुए या गले में धारण करते हैं तो स्नानादि के बाद अपने हाथ में यंत्र को लेकर उपरोक्त विधिपूर्वक  इसका पूजन करें। 


नवग्रह यंत्र का मंत्र -

ब्रह्मा मुरारी त्रिपुरान्तकारी भानुः
शशि भूमि - सूतो बुधश्च
गुरुश्च शुक्रः शनि राहु केतवः
सर्वे ग्रहा शांति करा भवन्तु।”


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