हनुमान यंत्र

कार्यों में आने वाली सभी बाधाओं को दूर करने के लिए, संकट टालने के लिए, प्रेतबाधा को दूर करने के लिए, काला जादू और अन्य प्रकार के जादू टोनों का निवारण करने के लिए अजर अमर हनुमान जी की भक्ति की जाती है। हिंदू धर्म में प्रत्येक देवी- देवता को प्रसन्न करने के लिए कई तरह की पूजा विधियां विदयमान हैं। ऐसे में यदि आप ब्रह्मचारी महावीर को शीघ्र प्रसन्न करना चाहते हैं तो सबसे कारगर उपाय हनुमान यंत्र है। इस यंत्र की मदद से आप शीघ्र हनुमान जी की कृपा पा सकते हैं। हनुमान यंत्र (Hanuman Yantra) को हनुमान जी का ही स्वरूप माना जाता है। यदि आप कोई नया काम शुरू करने जा रहे हैं तो आपको अपने कार्यस्थल पर हनुमान यंत्र को स्थापित करना चाहिए ताकि आपको सफलता प्राप्त हो सके।


हनुमान यंत्र के लाभ

समस्त कष्टों के निवारण के लिए हनुमान यंत्र की साधना एक रामबाण उपाय है, क्योंकि इस यंत्र में स्वयं अजरअमर महावीर विराजमान रहते हैं। 
यदि किसी जातक की कुंडली में मंगल या शनि दोष उपस्थित है तो यह यंत्र उनके बुरे प्रभावों को दूर कर देता हैं। 
हनुमान यंत्र को स्थापित करने से नेतृत्व गुण को प्रोत्साहन मिलता है, जिससे आप किसी ग्रुप या संगठन का नेतृत्व करने में सक्षम होते हैं। 
इस यंत्र को स्थापित करने से जीवन में सफलता, शक्ति और समृद्धि आती है। 
हनुमान यंत्र को स्थापित करने से नकारात्मक ऊर्जा का नाश होता है और सकारात्मक शक्तियों का संचार होता है।
इस यंत्र को प्रतिष्ठित करने से आपको अपने शत्रुओं पर विजय प्राप्त हो सकती है। 
कर्ज से मुक्ति पाने के लिए आप अपने घर में या कार्यस्थल पर हनुमान यंत्र को स्थापित कर सकते हैं। 
यदि आपके घर में कोई व्यक्ति लंबे वक्त से बीमार है तो इस यंत्र की मदद से रोंगों से छुटकारा मिल सकता है।


ध्यान रखने योग्य बातें

हनुमान यंत्र (Hanuman Yantra) का पूर्णफल तभी प्राप्त हो सकता है जब इस यंत्र की शुद्धिकरण, प्राण प्रतिष्ठा और ऊर्जा संग्रही की प्रक्रियाओं के माध्यम से विधिवत बनाया गया हो। इस यंत्र को खरीदने के पश्चात किसी अनुभवी ज्योतिषी द्वारा अभिमंत्रित करके उसे घर की सही दिशा में स्थापित करना चाहिए। अभ्यस्त और संक्रिय हनुमान यंत्र को मंगलवार के दिन प्रतिष्ठित करना चाहिए। हनुमान यंत्र को हनुमान जी का एक स्वरूप ही माना जाता है इसलिए इस यंत्र को पूजास्थल मे रखना चाहिए। 


स्थापना विधि

हनुमान यंत्र (Hanuman Yantra) को किसी भी शुक्ल पक्ष के प्रथम सोमवार को खरीदकर घर ला सकते हैं। अगले दिन मंगलवार को प्रातकाल जागकर स्नानादि से निवृत्त होकर पूजास्थल में पूर्व की दिशा की तरफ एक चौकी की स्थापना करें और इसेक ऊपर लाल रंग का कपड़ा बिछा दें। इस पर यंत्र को स्थापित करें और यंत्र के सामने घी का दीपक प्रज्जवलित करें। अब लाल रंग के आसान पर विराजमान हो कर इस यंत्र को गंगाजल या कच्चे दूध से अभिमार्जित करें इसके पश्चात् 11 या 21 बार ”ॐ हं हनुमते रुद्रात्मकाय हुं फट् स्वाहा ” का जाप करना चाहिए। वहीं अधिक शुभ पाने के लिए बजरंगबली से प्रार्थना करें ताकि वह आपको शुभ फल प्रदान करते रहें। इस यंत्र को स्थापित करने के पश्चात इसे नियमित रूप से धोकर इसकी पूजा करें ताकि इसका प्रभाव कम ना हो। यदि आप इस यंत्र को बटुए या गले में धारण करते हैं तो स्नानादि के बाद अपने हाथ में यंत्र को लेकर उपरोक्त विधिपूर्वक इसका पूजन करें।

हनुमान यंत्र का बीज मंत्र - ॐ हं हनुमते रुद्रात्मकाय हुं फट् स्वाहा 


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