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Bhagwan Kaal Bhairav: हिंदू धर्म में कुछ देव रूप ऐसे भी होते हैं, जिनका स्मरण करने मात्र से मन में श्रद्धा, भय और विश्वास तीनों भाव एक साथ जाग उठते हैं। भगवान काल भैरव उन्हीं में से एक देव हैं। भगवान काल भैरव भगवान शिव के उग्र और अत्यंत शक्तिशाली स्वरूप माने जाते हैं। शास्त्रों में उन्हें “काल का स्वामी” कहा गया है, यानी वे समय पर नियंत्रण रखने वाले, समय को बांधने वाले और समय के पार देखने वाले देवता हैं। जब जीवन में भय, असुरक्षा, नकारात्मकता या अज्ञात का डर घेर ले, तब काल भैरव की उपासना मन को साहस और स्थिरता देती है।
‘भैरव’ शब्द संस्कृत के “भय” से जुड़ा है, जिसका अर्थ है डर। भैरव वह हैं जो भय को नष्ट कर देते हैं। काल भैरव का स्वरूप भले ही उग्र, भयानक और रौद्र दिखाई देता हो, लेकिन भक्तों के लिए वे करुणामय रक्षक की तरह होते हैं। उनके हाथों में त्रिशूल, डमरू और खप्पर दर्शाए जाते हैं। उनके साथ
कुत्ते को काल भैरव का वाहन माना गया है, जो सतर्कता और निष्ठा का प्रतीक है। काल भैरव का यह उग्र रूप वास्तव में जीवन के उन कठोर सत्यों का प्रतीक है, जिनसे हम अक्सर भागते हैं। वे हमें बताते हैं कि समय से कोई नहीं बच सकता, और जो अहंकार, अन्याय या अधर्म करेगा, उसे काल के नियमों का सामना करना ही पड़ेगा।
हिंदू परंपरा में काशी का विशेष स्थान है। माना जाता है कि काशी में प्रवेश करने से पहले भी काल भैरव की अनुमति आवश्यक है। इसी कारण उन्हें काशी के कोतवाल कहा जाता है। आज भी वाराणसी में स्थित काल भैरव मंदिर में भक्त पहले दर्शन करते हैं, फिर अन्य शिव मंदिरों में जाते हैं।
यह मान्यता दर्शाती है कि काल भैरव केवल आध्यात्मिक ही नहीं, बल्कि सामाजिक व्यवस्था के भी रक्षक हैं। वे नगर, समाज और व्यवस्था को संतुलित रखते हैं।
मध्य प्रदेश के पवित्र नगर उज्जैन में स्थित काल भैरव मंदिर भगवान शिव के उग्र रूप काल भैरव को समर्पित है। क्षिप्रा नदी के तट के पास स्थित यह मंदिर उज्जैन के संरक्षक देवता के रूप में प्रसिद्ध है। यहां शराब अर्पित करने की अनोखी परंपरा तांत्रिक पंचमकार से जुड़ी मानी जाती है। स्कंद पुराण के अवंती खंड में इसका उल्लेख मिलता है। परमार काल की प्रतिमाएं और मालवा चित्रकला के अवशेष इसके प्राचीन इतिहास की गवाही देते हैं। कालाष्टमी पर यहां विशेष श्रद्धा और भीड़ देखी जाती है।
कृष्ण पक्ष की अष्टमी तिथि को कालाष्टमी मनाई जाती है। मान्यता है कि इसी दिन काल भैरव का प्राकट्य हुआ था। इस दिन विशेष पूजा, व्रत और रात्रि जागरण का महत्व है। भक्त काल भैरव अष्टक, कवच और मंत्रों का पाठ करते हैं।
कालाष्टमी पर की गई उपासना भय, रोग और बाधाओं से मुक्ति दिलाने वाली मानी जाती है। आप यदि नियमित साधना न भी कर पाएं, तो इस दिन श्रद्धा से किया गया स्मरण भी विशेष फल देता है।
काल भैरव की पूजा में सादगी और श्रद्धा सबसे महत्वपूर्ण है। उन्हें काले तिल, सरसों का तेल, नीले या काले फूल अर्पित किए जाते हैं। दीपक जलाते समय मन को शांत और एकाग्र रखना चाहिए।
काल भैरव अष्टक का पाठ विशेष रूप से प्रभावी माना जाता है। यह पाठ न केवल आध्यात्मिक सुरक्षा देता है, बल्कि राहु-केतु जैसे ग्रह दोषों को भी शांत करने में सहायक माना गया है।
ज्योतिष में राहु और केतु को छाया ग्रह कहा जाता है, जो भ्रम, भय और अचानक होने वाली घटनाओं से जुड़े माने जाते हैं। काल भैरव को इन ग्रहों का नियंत्रक भी माना जाता है। जिनकी कुंडली में राहु-केतु से संबंधित समस्याएं हों, उनके लिए काल भैरव की उपासना लाभकारी बताई जाती है।
यह उपासना आपको मानसिक स्पष्टता देती है और जीवन की अनिश्चितताओं को स्वीकार करने की शक्ति प्रदान करती है।
यह रूप दंडनायक और न्यायाधीश का है। वे आपराधिक प्रवृत्तियों, अधर्म और अन्याय पर नियंत्रण रखते हैं। समाज में अनुशासन और मर्यादा बनाए रखने में यह स्वरूप महत्वपूर्ण है।
बटुक भैरव को काल भैरव का बाल रूप माना जाता है। यह स्वरूप सौम्य, करुणामय और अभय देने वाला है। जो भक्त उग्रता से डरते हैं, वे बटुक भैरव की उपासना करते हैं। यह रूप बच्चों, परिवार और गृहस्थ जीवन की रक्षा से जुड़ा माना जाता है।
काल भैरव की उपासना केवल पूजा-पाठ तक सीमित नहीं है। वे हमें जीवन के गहरे सत्य से परिचित कराते हैं कि समय अनंत है, लेकिन हमारा जीवन सीमित है। इसलिए अहंकार, द्वेष और भय में समय गंवाने के बजाय सत्य, धर्म और साहस के मार्ग पर चलना चाहिए।
जब आप काल भैरव को समझते हैं, तो यह भी समझ आता है कि उनका उग्र स्वरूप हमें डराने के लिए नहीं, बल्कि जगाने के लिए है। वे हमें हमारी सीमाएं और जिम्मेदारियां याद दिलाते हैं।
भगवान काल भैरव शिव के ऐसे रूप हैं, जो जीवन के अंधेरे पक्षों को उजागर करते हैं और उनसे मुक्ति का मार्ग दिखाते हैं। वे भय को हरने वाले, समय के स्वामी और भक्तों के सच्चे रक्षक हैं। उनकी उपासना से आप न केवल आध्यात्मिक सुरक्षा पाते हैं, बल्कि मानसिक दृढ़ता और आत्मविश्वास भी प्राप्त करते हैं।