देवी काली

हिंदू धर्म के अनुसार देवी काली(goddess kaali) को बुराई पर अच्छाई की जीत के लिए जाना जाता है। उन्हें भयंकर और शक्तिशाली देवी के रूप में पूजा जाता है। काली भगवान शिव की पत्नी मां पार्वती का अवतार हैं। उनका निवास श्मशान घाट है और उनके हथियार हैं कृपाण और त्रिशूल। काली में शक्ति का समावेश है जो ऊर्जा, रचनात्मकता और उर्वरता का प्रतीक है। कहा जाता है कि काली का जन्म धरती पर बुरी शक्तियों का विनाश करने के लिए हुआ था। 

 

काली माता की जन्म कथा

पौराणिक कथानुसार, एक दारुक नामक राक्षस था जिसे भगवान ब्रह्मा ने वरदान दिया था। उसने वरदान प्राप्ति के बाद स्वर्गलोक पर कब्जा कर लिया था और वरदान के अनुसार उसे केवल एक स्त्री ही मार सकती थी। देवता मदद के लिए भगवान शिव के पास गए और दारुक के बारे में बताया। भगवान शिव ने पार्वती माता से अनुरोध किया कि वह दारुक का वध करें। अपने पति की आज्ञा का पालन करते हुए मां पार्वती ने अपने एक अंश को शिव के अंदर समाहित किया और वह अंश शिव के कंठ में बैठे विष से अपना रूप धारण करने लगा। जब शिवजी ने तीसरा नेत्र खोला तो एक भयंकर विकराल रूपी काले रंग की देवी का जन्म हुआ जिसे काली माता कहा गया। 

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क्यों निकली है काली माता की जीभ? 

आपने कई तस्वीरों में देखा होगा कि मां काली शिव की छाती पर अपने पैर रखे हुए हैं। इसके पीछे की भी एक कथा है। दरअसल एक रक्तबीज नामक राक्षस था जिसे वरदान था कि वह धरती पर गिरने वाली अपनी हर खून की बूंद से वापस से पैदा हो जाएगा। वरदान पाकर रक्तबीज ने तीनों लोकों में हाहाकार मचा दी। देवताओं ने युद्ध की ठानी और रक्तबीज से लड़ने को तैयार हो गए। लेकिन जब उन्हें पता चला कि रक्तबीज को उसके एक बंदू खून से वापस पैदा होने का वरदान है तो वह मां काली के पास पहुंचे।  महाकाली देवताओं की मदद के लिए युद्ध भूमि पहुंची उन्होने अपनी जीभ को लंबा किया और रक्तबीज की एक भी खून की बूंद को धरती पर नहीं गिरने दिया। इस तरह काली माता ने उसका पूरा रक्त पी लिया और उनके अंदर इतना गुस्सा आ गया कि वह उसे शांत करने में असमर्थ रही। 

तब देवताओं ने भोलेनाथ से विनती कि कि वह महाकाली को शांत कराएं। भगवान शिव ने कई बार कोशिश की लेकिन वह काली का क्रोध शांत कराने में असफल रहे। फिर उन्होंने काली को रोकने के लिए उनके चरण के पास जाकर लेट गए और काली को जब एहसास हुआ कि वह शिव पर कदम रख रही है, तब उन्होंने शर्म की वजह से क्रोध को शांत किया। 

 

मां काली का स्वरूप

काली को तस्वीरों में भगवान शिव की छाती पर एक पैर के साथ युद्ध के मैदान में खड़े होने के रूप में दर्शाया गया है। उनकी जीभ भगवान शिव की छाती पर पैर रखने के लिए अचरज में पड़ गई। उसका रंग गहरा है और उसके चेहरे के भाव क्रूर हैं। उनके चार हाथों को दर्शाया गया है।

ऊपरी हाथों में से एक में वह खूनी कृपाण रखती हैं और दूसरे ऊपरी हाथ में वह कटा हुआ एक राक्षस का सिर रखती हैं। निचले हाथों में से एक में वह एक कटोरा रखती है जिसमें वह रक्त एकत्र करती हैं जो ऊपरी हाथ में दानव के विच्छेदित सिर से टपकता है। दूसरा निचला हाथ वरद मुद्रा में दिखाया गया है। वह नग्न दिखाया गया है और वह एक मुंडो की माला पहने नजर आती हैं। निचले शरीर में वह मानव हथियारों से बना कमरबंद पहनती हैं। इसके अलावा कहीं कही तस्वीरों में काली के ऊपरी हाथों में से एक को वरदा मुद्रा में दिखाया गया है और निचले हाथों में त्रिशूल दर्शाया गया है।

 

मां काली को प्रसन्न करने के उपाय

  • यदि आप काली मां को प्रसन्न करना चाहते हैं तो मंगलवार के दिन माता की पूजा करना शुभ रहता है। 

  • मंगलवार के दिन मां काली के मंदिर में जाकर लाल वस्त्र धारण करके उनकी मूर्ति के समक्ष धूप, दीप, नैवेद्य और लाल पुष्प करें।

  • इसके बाद घी का दीपक और गुगल की धूप जलाएं और आरती करें। 

  • प्रसाद के तौर पर देवी मां को लौंग, गुड़ और पेड़े का भोग लगाएं। 

  • यदि आपके जीवन में लगातार बाधाएं आ रही हैं तो मां काली के बीज मंत्र का जाप करें। 

ॐ क्रीं क्रीं क्रीं हूँ हूँ ह्रीं ह्रीं दक्षिणे कालिका।

क्रीं क्रीं क्रीं हूँ हूँ ह्रीं ह्रीं स्वाहा॥

  • नवरात्रि के दौरान आप महाकाली को प्रसन्न करने के लिए किसी अनुभवी ज्योतिषाचार्य से अपनी राशिनुसार पूजा विधि जानकर पूजा-अर्चन कर सकते हैं। 

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