गजकेसरी योग

वैदिक ज्योतिष के अनुसार कुंडली में कई तरह के योग बनते हैं, जिसमें से कुछ जातक को शुभ प्रभाव प्रदान करते हैं और कुछ अशुभ प्रभाव देते हैं। कुंडली में शुभ योगों में से गजकेसरी योग(GajaKeshari Yoga in Astrology) को भी शुभ माना जाता है। इस योग के निर्माण से जातक को प्रबल धन लाभ के योग बनते हैं और वित्तीय स्थिति मजबूत हो जाती है। उसको जीवन में पदोन्नति प्राप्त होती है और वह मजबूती, फुरती और कुशल वक्ता के रूप में प्रसिद्धि प्राप्त करता है।

 

कुंडली में गजकेसरी योग का निर्माण

एस्ट्रोयोगी एस्ट्रोलॉजर के मुताबिक गजकेसरी योग का निर्माण तब होता है, जब कुंडली में बृहस्पति चंद्रमा से केंद्र भाव से (पहले, चौथे, सातवें और दशवें भाव) में स्थित होते हैं। तब एक फलदायी गजकेसरी योग बनता है लेकिन इस योग के निर्माण में भाव, राशि, नक्षत्र और बृहस्पति की स्थिति का अत्यंत महत्व होता है। बृहस्पति को संतान, धार्मिक कार्य, धन, दान और पुण्य का कारक माना जाता है और चंद्रमा को मन, माता, मानसिक स्थिति, मनोबल, द्रव्य वस्तुओं, सुख-शांति, धन-संपत्ति आदि का कारक माना जाता है।

 

गजकेसरी योग में जन्मा जातक

  • इस योग में जन्मा जातक कुशल वक्ता, राजसी सुख भोगने वाला और उच्च पद पर आसीन रहने वाला होता है।

  • ऐसे जातकों पर भगवान गणपति की कृपा सदैव बनी रहती है। इसकी वजह से जातक बुद्धिमान होता है और समाज में मान-सम्मान प्राप्त होता है।

  • गजकेसरी योग में पैदा हुए जातक चुस्तदुरुस्त, फुर्तीले और साहसी होते हैं। उनके अंदर हर कार्य को करने की क्षमता होती है और उसमें सफलता भी पाते हैं। 


 

गजकेसरी योग प्रभावी

एस्ट्रोलॉजर के अनुसार, 20 से 33 प्रतिशत लोगों को कुंडली में गजकेसरी योग बनता है। लेकिन इस योग का शुभ फल तभी मिलता है जब कुंडली में वक्री या नीच गृह की दृष्टि ना हो।

  • गजकेसरी योग का निर्माण बृहस्पति और चंद्रमा की युति से होता है या फिर केंद्र में गुरु और चंद्रमा एक दूसरे को देख रहे हों तो भी गजकेसरी योग का निर्माण होता है। 

  • प्रबल या प्रभावकारी गजकेसरी योग का निर्माण बृहस्पति की चंद्रमा पर 5वीं या 9वीं दृष्टि से भी बनता है। 

  • यदि बृहस्पति और चंद्रमा कर्क राशि में एक साथ हों और कोई अशुभ ग्रह इन्हें न देख रहा हो तो ऐसे में यह बहुत ही सौभाग्यशाली गजकेसरी योग बनाते हैं। 

  • इसका कारण यह भी है कि गुरु को कर्क राशि में उच्च का माना जाता है और चंद्रमा कर्क राशि के स्वामी होने से स्वराशि के होते हैं। 

  • प्रथम, चतुर्थ, सप्तम और दशम स्थान को केंद्र माना जाता है यदि शुभ भाव में केंद्र में गजकेसरी योग बन रहा हो तो यह भी शुभ फल देने वाला होता है।

  • इसके अलावा त्रिकोण में पांचवे या नौंवे भाव में भी गजकेसरी योग शुभ होता है। साथ ही जब बृहस्पति की महादशा में चंद्रमा की अंतरदशा प्राप्त हो तो या चंद्रमा की महादशा में गुरु की अंतरदशा प्राप्त हो तो, गजकेसरी योग फलदायी होता है।

  • यदि 6ठें, 8वें या 10वें भाव में यह योग न हो और गुरु की राशि मीन या धनु अथवा शुक्र की राशइ वृष में बन रहा हो तो लाभ देने वाला रहता है। 

  • ज्योतिषशास्त्र के अनुसार, यदि शुक्र चंद्रमा से केंद्र (पहले, पांचवें, सातवें और दशवें) भाव में हो तो तब भी गजकेसरी योग बनता है। वहीं अगर बुध और बृहस्पति पर चंद्रमा की दृष्टि हो और चंद्रमा दोनों ग्रहों से सातवें भाव में हो तो बुध से भी गजकेसरी योग का निर्माण होता है। 

 

गजकेसरी योग फलदायी नहीं होगा

  • कुंडली के छठे, आठवें या बारहवें भाव में यह योग बन रहा हो तो बहुत कम प्रभावी होता है। 

  • यदि किसी कुंडली में शुभ चंद्रमा और अशुभ गुरु एक साथ एक ही घर में हो तो जातक को परेशानी का सामना करना पड़ सकता है।

  • इसके अलावा चंद्रमा या गुरु की नीच राशि में यह योग बन रहा हो तो उसमें भी इस योग से मिलने वाले परिणाम नहीं मिलता यानि यह निष्फल रहता है। 

  • इसके अलावा जब बृहस्पति और चंद्रमा मजबूत होकर गजकेसरी योग बनाते हैं लेकिन साथ ही केमद्रुम योग भी बन रहा हो तो, यह योग निष्फल रहता है। 

 

गजकेसरी योग के लाभ

  • जब कुंडली के पहले घर में इस लाभकारी और शक्तिशाली योग का निर्माण होता है, तब ये व्यक्ति को स्वस्थ, प्रतिष्ठित और प्रभावशाली बनाते हैं।

  • कुंडली के 7वें घर में चंद्रमा और बृहस्पति की युति जातक को कुशल, व्यापारी, धनवान बनाती है। इस घर में गजकेसरी योग बनने से साझेदारी के माध्यम से जातक को धन लाभ होता है।

  • कुंडली के चौथे घर में गजकेसरी योग जातक को राजा, मंत्री और विद्वान व्यक्ति के समतुल्य बनाता है। साथ ही घरेलू सुख-सुविधा का भोग भी प्रदान करता है। 

  • वहीं कुंडली के 9वें घर में चंद्रमा और गुरु की युति जातक को धार्मिक कार्यों से जोड़ती है और जातक को भाग्य का भरपूर साथ मिलता है।

  • कुंडली के 10वें भाव में गजकेसरी योग का निर्माण जातक को विद्वान, धनी, सम्मानित बनाता है। इस घर में चंद्रमा-बृहस्पति की उपस्थिति करियर की संभावनाओं, उच्च स्थिति और वित्तीय समृद्धि के लिए बहुत अनुकूल और लाभदायक है।

  • 11वें घर में गजकेसरी योग जातक को धन, प्रसिद्धि, राजनेताओं के साथ शक्तिशाली संपर्क और सरकारी अधिकारियों के साथ अच्छे संबंध बनाता है। साथ ही व्यापार में आपको धन लाभ भी प्रदान करता है।

  • इसके अलावा कुंडली के 12वें भाव में गुरु और चंद्रमा की युति से मोक्ष की प्राप्ति होती है और जातक मध्यम आयु से तपस्वी जीवन जीने लगता है। उसका व्यवहार पवित्र और बुद्धिमान संन्यासी या योगी जैसा होता है। हालांकि यह योग उसे विदेश यात्रा का सुख भी देता है और उनका जीवनसाथी विदेशी भी हो सकता है।


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