Dwipushkar Yoga: वैदिक ज्योतिष और हिन्दू पंचांग के अनुसार, कुछ ऐसे शुभ योग होते हैं, जो जीवन में शुभता और सफलता प्राप्त करने में मदद करते हैं। इसमें एक महत्वपूर्ण नाम द्विपुष्कर योग का भी है। यह बहुत दुर्लभ और शक्तिशाली योग है। यही कारण है कि इस अवधि में कोई भी बड़ा और महत्वपूर्ण कार्य किया जा सकता है। साल 2026 में भी द्विपुष्कर योग कई बार बनेगा। इस दौरान आप सभी शुभ कार्यों को कर सकते हैं या कोई विशेष निर्णय भी ले सकते हैं। इस योग अवधि के दौरान आप जो भी काम करेंगे उसमें आपको सामान्य से दोगुना फल मिल सकता है। ध्यान देने वाली बात यह है कि अगर आप कोई नकारात्मक कार्य करते हैं तो इसका अशुभ प्रभाव भी दोगुना होकर भी मिल सकता है। इस लेख में एस्ट्रोयोगी आपके लिए साल 2026 में द्विपुष्कर योग की तिथि और अवधि की सम्पूर्ण जानकारी लेकर आया है। साथ ही जानें द्विपुष्कर योग क्या है? कैसे बनता है?
वैदिक ज्योतिष के अनुसार द्विपुष्कर योग एक विशेष मुहूर्त होता है, जब तिथि, वार और नक्षत्र का दुर्लभ संयोग बनता है। सामान्य भाषा में इसे ऐसा समय कहा जा सकता है, जब ब्रह्मांडीय ऊर्जा बेहद सकारात्मक होती है और कोई भी शुभ कार्य सफलता और प्रगति का कारण बन सकता है।
इस योग में किए गए काम, खासतौर पर खरीदारी, निवेश या नए काम की शुरुआत, अपने आप में सौभाग्य का कारण बन जाते हैं। ऐसा माना जाता है कि जैसे बीज बोने पर एक पौधा नहीं बल्कि कई फल मिलते हैं, वैसे ही इस योग में किया गया शुभ कार्य बार-बार फल देता है।
यदि आप जानना चाहते हैं कि द्विपुष्कर योग आपके व्यक्तिगत जीवन को कैसे प्रभावित करेगा, तो अपनी जन्म कुंडली जरूर देखें।
ज्योतिष शास्त्र के अनुसार द्विपुष्कर योग का निर्माण कुछ खास नियमों पर आधारित है। जब चंद्र मास की द्वितीया (2वीं), सप्तमी (7वीं) या द्वादशी (12वीं) तिथि आती है। और यह तिथि रविवार, मंगलवार या शनिवार में से किसी एक दिन पड़े। साथ ही उस समय मृगशिरा, चित्रा या धनिष्ठा नक्षत्र हों। इन तीनों के एक साथ आने से बनता है द्विपुष्कर योग। चूंकि ये नक्षत्र ‘द्विपद नक्षत्र’ माने जाते हैं, इसलिए इस योग का नाम पड़ा “द्विपुष्कर”, यानी दोगुना पुष्ट करने वाला।
साल 2026 में द्विपुष्कर योग कई महत्वपूर्ण दिनों पर पड़ रहा है। इन तिथियों पर यदि आप कोई विशेष कार्य, खरीदारी या पूजा-पाठ करेंगे, तो उसका शुभ फल आपको कई गुना मिल सकता है। पंचांग के अनुसार इसके प्रमुख समय इस प्रकार हैं-
द्विपुष्कर योग: 20 जनवरी, 2026, मंगलवार, योग अवधि: दोपहर 01:06 बजे से रात 02:42 तक।
द्विपुष्कर योग: 16 मार्च, 2026, सोमवार, योग अवधि: सुबह 05:56 बजे से सुबह 06:30 बजे तक।
द्विपुष्कर योग: 24 मार्च, 2026, मंगलवार, योग अवधि: शाम 07:04 बजे से 25 मार्च 2026, सुबह 06:19 बजे तक ।
द्विपुष्कर योग: 7 जून, 2026, रविवार, योग अवधि: रात 02:40 बजे से सुबह 05:23 बजे तक।
द्विपुष्कर योग: 7 जून, 2026, रविवार, योग अवधि: सुबह 05:23 बजे से सुबह 07:55 बजे तक।
द्विपुष्कर योग: 9 अगस्त, 2026, रविवार, योग अवधि: सुबह 11:04 बजे से दोपहर 02:43 बजे तक।
द्विपुष्कर योग: 11 अक्टूबर, 2026, रविवार, योग अवधि: रात 09:30 बजे से रात 10:32 बजे तक।
द्विपुष्कर योग: 5 दिसम्बर, 2026, शनिवार, योग अवधि: सुबह 06:59 बजे से सुबह 11:48 बजे तक।
इस योग को अत्यंत शुभ माना जाता है। विशेष रूप से वे लोग जो लंबे समय से किसी बड़े निवेश या महत्वपूर्ण कार्य को टाल रहे हों, उनके लिए यह समय सुनहरा अवसर लेकर आता है।
इस योग में किए गए धन निवेश, ज़मीन-जायदाद की खरीदारी, सोना-चांदी खरीदना या कोई नया व्यापार शुरू करना बेहद लाभकारी होता है।
यदि इस योग में कोई नया कार्य आरंभ किया जाए, तो उसमें सफलता की संभावना कई गुना बढ़ जाती है।
धार्मिक दृष्टि से भी यह समय उत्तम है। दान-पुण्य, पूजा-पाठ और व्रत-उपवास का फल दोगुना मिलता है।
हालाँकि, यह भी कहा गया है कि इस समय कोई भी गलत या नकारात्मक कार्य करना बेहद हानिकारक हो सकता है। जैसे झगड़ा, विवाद या जोखिम भरे काम इनसे बचना चाहिए, वरना नुकसान भी बढ़ सकता है।
इस समय को सकारात्मक दिशा में उपयोग करना सबसे जरूरी है। अगर आप चाहते हैं कि जीवन में सुख-समृद्धि बढ़े तो इस योग में धार्मिक कार्य, अच्छे संकल्प और आर्थिक निवेश जैसे काम करें।
वहीं दूसरी ओर, इस दौरान किसी भी तरह के कलह, ग़लत निर्णय या जोखिम भरे कदम उठाने से बचना चाहिए। मान्यता है कि जो भी कार्य इस समय होता है, उसका असर दोगुना होकर लौटता है। इसलिए सोच-समझकर ही कदम उठाना समझदारी है।
द्विपुष्कर योग वैदिक ज्योतिष का एक बेहद शुभ और दुर्लभ संयोग है। साल 2026 में यह योग कई बार बन रहा है, जिससे लोगों को अपने जीवन में नए अवसर प्राप्त करने का मौका मिलेगा। इस समय किए गए शुभ कार्य दोगुना फल देते हैं, इसलिए इसे सकारात्मक कामों में ही लगाना चाहिए।
चाहे बात हो नई नौकरी शुरू करने की, संपत्ति खरीदने की, व्यापार विस्तार की या धार्मिक कार्य करने की द्विपुष्कर योग हर क्षेत्र में सफलता और सौभाग्य की ऊर्जा प्रदान करता है। लेकिन ध्यान रखें, जैसे यह शुभ कार्यों में दोगुना फल देता है, वैसे ही अशुभ कार्यों का असर भी दोगुना कर देता है। इसलिए विवेकपूर्ण निर्णय लेकर ही इस योग का लाभ उठाएं। अधिक जानकारी के लिए आप एस्ट्रोयोगी के विशेषज्ञ ज्योतिषियों से संपर्क कर सकते हैं।
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