Bhadra Kaal 2026: क्या आपने कभी सोचा है कि शुभ कार्यों के बीच भी ऐसा कौन सा समय होता है जिसे अशुभ माना जाता है? हिंदू पंचांग में ऐसा ही एक समय है भद्रा काल, जिसे खास तौर पर शादी, गृह प्रवेश या नए व्यापार जैसे मांगलिक कार्यों के लिए वर्जित माना जाता है। अगर आप साल 2026 में कोई बड़ा काम करने का प्लान बना रहे हैं, तो भद्रा काल की जानकारी आपके लिए बहुत ज़रूरी है। क्योंकि माना जाता है कि इस समय किए गए कार्य सफलता की बजाय रुकावट या परेशानी ला सकते हैं। इस लेख में हम आसान भाषा में समझेंगे कि भद्रा काल आखिर क्या है, इसे कैसे पहचानें, 2026 में यह कब-कब पड़ेगा और इस दौरान किन कामों से बचना चाहिए। तो चलिए, जानते हैं भद्रा काल से जुड़े जरूरी तथ्य।
भद्रा काल वह अवधि होती है जब भद्रा का प्रभाव सक्रिय रहता है। इस समय को अशुभ माना जाता है, इसलिए विवाह, गृह प्रवेश या नए कार्य की शुरुआत जैसे शुभ कार्यों से परहेज़ करने की सलाह दी जाती है। मान्यता है कि भद्रा काल में किए गए कार्य बाधा या अनचाहे परिणाम ला सकते हैं।
भद्रा काल 2026 का समय हिन्दू पंचांग के अनुसार तय होता है। आप नीचे हर महीने का भद्रा काल का समय जान सकते है।
हिंदू कैलेंडर के अनुसार जनवरी 2026 में भद्रा 2, 5, 8, 12, 16, 22, 25, 28 और 31 तारीख को रहेगी। इन तिथियों पर विवाह, गृह प्रवेश, नया व्यवसाय शुरू करने या किसी भी शुभ कार्य से परहेज़ करना उचित माना गया है, क्योंकि भद्रा काल में किए गए कार्यों का फल अनुकूल नहीं होता।
जनवरी में कब है भ्रदा काल 2026?
2 जनवरी 2026, शनिवार, भद्रा काल: शाम 06:54 बजे से 3 जनवरी 2026, सुबह 05:11 बजे तक।
5 जनवरी 2026, सोमवार, भद्रा काल: रात 08:54 बजे से 6 जनवरी 2026, सुबह 08:02 बजे तक।
8 जनवरी 2026, शुक्रवार, भद्रा काल: रात 11:06 बजे से 9 जनवरी 2026, शाम 07:39 बजे तक।
12 जनवरी 2026, मंगलवार, भद्रा काल: रात 10:00 बजे से 13 जनवरी 2026, दोपहर 03:18 बजे तक।
16 जनवरी 2026, शुक्रवार, भद्रा काल: रात 10:22 बजे से 17 जनवरी 2026, सुबह 11:16 बजे तक।
22 जनवरी 2026, गुरुवार, भद्रा काल: दोपहर 02:41 बजे से 22 जनवरी 2026, रात 10:29 बजे तक।
25 जनवरी 2026, रविवार, भद्रा काल: रात 11:10 बजे से 26 जनवरी 2026, सुबह 10:17 बजे तक।
28 जनवरी 2026, बुधवार, भद्रा काल: रात 03:17 बजे से 29 जनवरी 2026, दोपहर 01:55 बजे तक।
31 जनवरी 2026, शनिवार, भद्रा काल: रात 05:53 बजे से 1 फरवरी 2026, शाम 04:43 बजे तक।
हिंदू कैलेंडर के अनुसार फरवरी 2026 में भद्रा 4, 7, 11, 15, 20, 24 और 27 तारीख को पड़ेगी। मान्यता है कि इन दिनों भद्रा काल में विवाह, गृह प्रवेश, नया कार्य आरंभ करना या अन्य शुभ काम करने से बचना चाहिए, क्योंकि इससे कार्य में बाधा या अशुभ परिणाम मिल सकते हैं।
फरवरी में कब है भ्रदा काल 2026?
4 फरवरी 2026, बुधवार, भद्रा काल: दोपहर 12:20 बजे से 4 फरवरी 2026, रात 12:10 बजे तक।
7 फरवरी 2026, शनिवार, भद्रा काल: रात 02:55 बजे से 8 फरवरी 2026, दोपहर 03:55 बजे तक।
11 फरवरी 2026, बुधवार, भद्रा काल: रात 11:12 बजे से 12 फरवरी 2026, दोपहर 12:22 बजे तक।
15 फरवरी 2026, रविवार, भद्रा काल: शाम 05:05 बजे से 15 फरवरी 2026, रात 05:24 बजे तक।
20 फरवरी 2026, शुक्रवार, भद्रा काल: रात 01:52 बजे से 21 फरवरी 2026, दोपहर 01:01 बजे तक।
24 फरवरी 2026, मंगलवार, भद्रा काल: सुबह 07:02 बजे से 24 फरवरी 2026, शाम 05:57 बजे तक।
27 फरवरी 2026, शुक्रवार, भद्रा काल: सुबह 11:32 बजे से 27 फरवरी 2026, रात 10:33 बजे तक।
हिंदू पंचांग के अनुसार मार्च 2026 में भद्रा 2, 5, 9, 13, 17, 22, 25 और 28 तारीख को रहेगी। इन दिनों शुभ कार्य करने से परहेज़ करना उचित माना जाता है।
मार्च में कब है भ्रदा काल 2026?
2 मार्च 2026, सोमवार, भद्रा काल: शाम 05:56 बजे से 2 मार्च 2026, रात 05:28 बजे तक।
5 मार्च 2026, गुरुवार, भद्रा काल: रात 05:24 बजे से 6 मार्च 2026, शाम 05:54 बजे तक।
9 मार्च 2026, सोमवार, भद्रा काल: रात 11:27 बजे से 10 मार्च 2026, दोपहर 12:40 बजे तक।
13 मार्च 2026, शुक्रवार, भद्रा काल: रात 07:24 बजे से 14 मार्च 2026, सुबह 08:11 बजे तक।
17 मार्च 2026, मंगलवार, भद्रा काल: सुबह 09:23 बजे से 17 मार्च 2026, रात 08:59 बजे तक।
22 मार्च 2026, रविवार, भद्रा काल: सुबह 10:37 बजे से 22 मार्च 2026, रात 09:17 बजे तक।
25 मार्च 2026, बुधवार, भद्रा काल: दोपहर 01:50 बजे से 25 मार्च 2026, रात 12:47 बजे तक।
28 मार्च 2026, शनिवार, भद्रा काल: रात 08:13 बजे से 29 मार्च 2026, सुबह 07:47 बजे तक।
हिंदू पंचांग के अनुसार अप्रैल 2026 में भद्रा 1, 4, 8, 12, 15, 20, 23, 27 और 30 तारीख को पड़ेगी। इन तिथियों पर शुभ कार्य करने से बचना श्रेयस्कर माना जाता है।
अप्रैल में कब है भ्रदा काल 2026?
1 अप्रैल 2026, बुधवार, भद्रा काल: सुबह 07:06 बजे से 1 अप्रैल 2026, शाम 07:21 बजे तक।
4 अप्रैल 2026, शनिवार, भद्रा काल: रात 11:02 बजे से 5 अप्रैल 2026, दोपहर 12:00 बजे तक।
8 अप्रैल 2026, बुधवार, भद्रा काल: रात 07:02 बजे से 9 अप्रैल 2026, सुबह 08:13 बजे तक।
12 अप्रैल 2026, रविवार, भद्रा काल: दोपहर 01:03 बजे से 12 अप्रैल 2026, रात 01:17 बजे तक।
15 अप्रैल 2026, बुधवार, भद्रा काल: रात 10:31 बजे से 16 अप्रैल 2026, सुबह 09:26 बजे तक।
20 अप्रैल 2026, सोमवार, भद्रा काल: शाम 05:50 बजे से 20 अप्रैल 2026, रात 04:15 बजे तक।
23 अप्रैल 2026, गुरुवार, भद्रा काल: रात 08:49 बजे से 24 अप्रैल 2026, सुबह 08:01 बजे तक।
27 अप्रैल 2026, सोमवार, भद्रा काल: सुबह 06:08 बजे से 27 अप्रैल 2026, शाम 06:16 बजे तक।
30 अप्रैल 2026, गुरुवार, भद्रा काल: रात 09:13 बजे से 1 मई 2026, सुबह 10:01 बजे तक।
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हिंदू पंचांग के अनुसार मई 2026 में भद्रा काल 4, 8, 11, 15, 19, 22, 26 और 30 तारीख को आएगा। ज्योतिष शास्त्र में भद्रा को अशुभ माना गया है और इस समय विवाह, गृह प्रवेश, मुंडन, नया काम शुरू करना या कोई भी शुभ कार्य करने से परहेज़ करने की सलाह दी जाती है।
मई में कब है भ्रदा काल 2026?
4 मई 2026, सोमवार, भद्रा काल: दोपहर 04:12 बजे से 4 मई 2026, रात 05:24 बजे तक।
8 मई 2026, शुक्रवार, भद्रा काल: दोपहर 12:22 बजे से 8 मई 2026, रात 05:17 बजे तक।
11 मई 2026, सोमवार, भद्रा काल: रात 03:15 बजे से 12 मई 2026, दोपहर 02:53 बजे तक।
15 मई 2026, शुक्रवार, भद्रा काल: सुबह 08:32 बजे से 15 मई 2026, शाम 06:55 बजे तक।
19 मई 2026, मंगलवार, भद्रा काल: रात 12:39 बजे से 20 मई 2026, सुबह 11:07 बजे तक।
22 मई 2026, शुक्रवार, भद्रा काल: शाम 05:05 बजे से 23 मई 2026, शाम 04:41 बजे तक।
26 मई 2026, मंगलवार, भद्रा काल: शाम 05:43 बजे से 27 मई 2026, सुबह 06:22 बजे तक।
30 मई 2026, शनिवार, भद्रा काल: रात 11:58 बजे से 31 मई 2026, सुबह 06:06 बजे तक।
हिंदू पंचांग के अनुसार जून 2026 में भद्रा 3, 6, 10, 13, 18, 21, 25 और 28 तारीख को रहेगी। इस अवधि को अशुभ माना जाता है, इसलिए इन तिथियों पर विवाह, गृह प्रवेश, नामकरण या नया कार्य आरंभ करने से बचना चाहिए। भद्रा काल में किए गए शुभ कार्यों में विघ्न आ सकते हैं और मनचाहे फल प्राप्त नहीं होते।
जून में कब है भ्रदा काल 2026?
3 जून 2026, बुधवार, भद्रा काल: सुबह 08:12 बजे से 3 जून 2026, शाम 09:21 बजे तक।
6 जून 2026, शनिवार, भद्रा काल: दोपहर 02:41 बजे से 7 जून 2026, शाम 03:08 बजे तक।
10 जून 2026, बुधवार, भद्रा काल: दोपहर 01:52 बजे से 10 जून 2026, रात 12:58 बजे तक।
13 जून 2026, शनिवार, भद्रा काल: शाम 04:08 बजे से 13 जून 2026, रात 04:16 बजे तक।
18 जून 2026, गुरुवार, भद्रा काल: सुबह 08:14 बजे से 18 जून 2026, शाम 06:59 बजे तक।
21 जून 2026, रविवार, भद्रा काल: दोपहर 03:21 बजे से 21 जून 2026, रात 11:25 बजे तक।
25 जून 2026, गुरुवार, भद्रा काल: सुबह 07:09 बजे से 25 जून 2026, शाम 08:10 बजे तक।
28 जून 2026, रविवार, भद्रा काल: दोपहर 03:07 बजे से 29 जून 2026, सुबह 04:17 बजे तक।
हिंदू पंचांग के अनुसार जुलाई 2026 में भद्रा 2, 6, 9, 12, 17, 20, 24 और 28 तारीख को लगेगी। भद्रा काल को अशुभ माना जाता है, इसलिए इन दिनों विवाह, गृह प्रवेश, मुंडन, नया व्यवसाय शुरू करना या कोई भी शुभ कार्य करने से बचना चाहिए।
जुलाई में कब है भ्रदा काल 2026?
2 जुलाई 2026, शुक्रवार, भद्रा काल: रात 10:32 बजे से 3 जुलाई 2026, सुबह 11:21 बजे तक।
6 जुलाई 2026, सोमवार, भद्रा काल: दोपहर 01:47 बजे से 6 जुलाई 2026, रात 01:41 बजे तक।
9 जुलाई 2026, गुरुवार, भद्रा काल: रात 09:32 बजे से 10 जुलाई 2026, सुबह 08:17 बजे तक।
12 जुलाई 2026, रविवार, भद्रा काल: रात 10:30 बजे से 13 जुलाई 2026, सुबह 08:40 बजे तक।
17 जुलाई 2026, शुक्रवार, भद्रा काल: शाम 05:30 बजे से 17 जुलाई 2026, रात 12:43 बजे तक।
20 जुलाई 2026, सोमवार, भद्रा काल: रात 12:03 बजे से 21 जुलाई 2026, शाम 04:35 बजे तक।
24 जुलाई 2026, शनिवार, भद्रा काल: रात 10:23 बजे से 25 जुलाई 2026, सुबह 11:34 बजे तक।
28 जुलाई 2026, मंगलवार, भद्रा काल: रात 06:19 बजे से 29 जुलाई 2026, सुबह 07:15 बजे तक।
हिंदू पंचांग के अनुसार अगस्त 2026 में भद्रा 1, 4, 7, 10, 15, 19, 23, 27 और 30 तारीख को पड़ेगी। ज्योतिष शास्त्र में भद्रा काल को अशुभ समय माना गया है, इसलिए इन दिनों विवाह, गृह प्रवेश, नामकरण, मुंडन या नए कार्यों की शुरुआत से परहेज़ करना चाहिए। मान्यता है कि इस अवधि में किए गए शुभ कार्य बाधित हो सकते हैं या उनका फल अनुकूल नहीं मिलता।
अगस्त में कब है भ्रदा काल 2026?
1 अगस्त 2026, शनिवार, भद्रा काल: सुबह 10:53 बजे से 1 अगस्त 2026, शाम 11:07 बजे तक।
4 अगस्त 2026, मंगलवार, भद्रा काल: रात 10:03 बजे से 5 अगस्त 2026, सुबह 09:27 बजे तक।
7 अगस्त 2026, शुक्रवार, भद्रा काल: दोपहर 03:21 बजे से 8 अगस्त 2026, दोपहर 01:59 बजे तक।
10 अगस्त 2026, सोमवार, भद्रा काल: रात 04:54 बजे से 11 अगस्त 2026, दोपहर 03:23 बजे तक।
15 अगस्त 2026, शनिवार, भद्रा काल: रात 05:05 बजे से 16 अगस्त 2026, शाम 04:53 बजे तक।
19 अगस्त 2026, बुधवार, भद्रा काल: शाम 07:20 बजे से 20 अगस्त 2026, सुबह 08:16 बजे तक।
23 अगस्त 2026, रविवार, भद्रा काल: सुबह 03:11 बजे से 23 अगस्त 2026, रात 08:19 बजे तक।
27 अगस्त 2026, गुरुवार, भद्रा काल: सुबह 09:09 बजे से 27 अगस्त 2026, रात 09:32 बजे तक।
30 अगस्त 2026, रविवार, भद्रा काल: रात 09:17 बजे से 31 अगस्त 2026, सुबह 08:51 बजे तक।
हिंदू पंचांग के अनुसार सितंबर 2026 में भद्रा 2, 6, 9, 14, 18, 22, 25 और 28 तारीख को आएगी। भद्रा काल को अशुभ माना जाता है, इसलिए इस अवधि में विवाह, गृह प्रवेश, अन्नप्राशन, मुंडन या किसी भी नए कार्य की शुरुआत से बचना चाहिए। मान्यता है कि भद्रा काल में किए गए शुभ कार्यों में अड़चनें आ सकती हैं और अपेक्षित सफलता नहीं मिलती।
सितंबर में कब है भ्रदा काल 2026?
2 सितंबर 2026, बुधवार, भद्रा काल: रात 04:26 बजे से 3 सितंबर 2026, अपराह्न 03:28 बजे तक।
6 सितंबर 2026, रविवार, भद्रा काल: सुबह 08:42 बजे से 6 सितंबर 2026, शाम 07:29 बजे तक।
9 सितंबर 2026, बुधवार, भद्रा काल: दोपहर 12:31 बजे से 9 सितंबर 2026, रात 11:30 बजे तक।
14 सितंबर 2026, सोमवार, भद्रा काल: रात 07:21 बजे से 15 सितंबर 2026, सुबह 07:44 बजे तक।
18 सितंबर 2026, शुक्रवार, भद्रा काल: दोपहर 01:01 बजे से 18 सितंबर 2026, रात 02:14 बजे तक।
22 सितंबर 2026, मंगलवार, भद्रा काल: सुबह 08:56 बजे से 22 सितंबर 2026, शाम 09:44 बजे तक।
25 सितंबर 2026, शुक्रवार, भद्रा काल: रात 11:07 बजे से 26 सितंबर 2026, सुबह 10:47 बजे तक।
28 सितंबर 2026, सोमवार, भद्रा काल: शाम 06:14 बजे से 29 सितंबर 2026, शाम 05:10 बजे तक।
हिंदू पंचांग के अनुसार अक्टूबर 2026 में भद्रा 2, 5, 8, 14, 18, 21, 25, 28 और 31 तारीख को रहेगी। भद्रा काल को अशुभ माना जाता है और इस समय किसी भी प्रकार के शुभ कार्य जैसे विवाह, गृह प्रवेश, नामकरण, मुंडन या नया व्यवसाय शुरू करना वर्जित बताया गया है। मान्यता है कि इस अवधि में किए गए कार्यों में बाधाएं आती हैं और मनचाहा परिणाम नहीं मिलता।
अक्टूबर में कब है भ्रदा काल 2026?
2 अक्टूबर 2026, शुक्रवार, भद्रा काल: सुबह 10:15 बजे से 2 अक्टूबर 2026, शाम 09:07 बजे तक।
5 अक्टूबर 2026, सोमवार, भद्रा काल: दोपहर 02:59 बजे से 5 अक्टूबर 2026, रात 02:08 बजे तक।
8 अक्टूबर 2026, गुरुवार, भद्रा काल: रात 10:16 बजे से 9 अक्टूबर 2026, सुबह 09:53 बजे तक।
14 अक्टूबर 2026, बुधवार, भद्रा काल: दोपहर 12:17 बजे से 14 अक्टूबर 2026, रात 01:14 बजे तक।
18 अक्टूबर 2026, रविवार, भद्रा काल: रात 08:28 बजे से 18 अक्टूबर 2026, रात 09:42 बजे तक।
21 अक्टूबर 2026, बुधवार, भद्रा काल: दोपहर 02:36 बजे से 22 अक्टूबर 2026, दोपहर 02:48 बजे तक।
25 अक्टूबर 2026, रविवार, भद्रा काल: रात 11:56 बजे से 25 अक्टूबर 2026, रात 10:53 बजे तक।
28 अक्टूबर 2026, बुधवार, भद्रा काल: दोपहर 02:37 बजे से 29 अक्टूबर 2026, सुबह 07:07 बजे तक।
31 अक्टूबर 2026, शनिवार, भद्रा काल: शाम 04:58 बजे से 31 अक्टूबर 2026, रात 11:52 बजे तक।
हिंदू पंचांग के अनुसार नवंबर 2026 में भद्रा काल 3, 7, 13, 16, 20, 23, 26 और 29 तारीख को रहेगा। भद्रा को अशुभ काल माना जाता है, इसलिए इन तिथियों में विवाह, गृह प्रवेश, मुंडन, अन्नप्राशन या किसी नए कार्य की शुरुआत से बचना चाहिए। मान्यता है कि भद्रा काल में किए गए शुभ कार्यों में विघ्न आ सकते हैं और अपेक्षित फल नहीं मिलते।
नवम्बर में कब है भ्रदा काल 2026?
3 नवम्बर 2026, मंगलवार, भद्रा काल: रात 11:26 बजे से 4 नवम्बर 2026, सुबह 11:03 बजे तक।
7 नवम्बर 2026, शनिवार, भद्रा काल: सुबह 10:48 बजे से 7 नवम्बर 2026, रात 11:05 बजे तक।
13 नवम्बर 2026, शुक्रवार, भद्रा काल: सुबह 07:24 बजे से 13 नवम्बर 2026, रात 08:43 बजे तक।
16 नवम्बर 2026, सोमवार, भद्रा काल: रात 08:20 बजे से 17 नवम्बर 2026, शाम 05:17 बजे तक।
20 नवम्बर 2026, शुक्रवार, भद्रा काल: रात 07:00 बजे से 20 नवम्बर 2026, रात 06:32 बजे तक।
23 नवम्बर 2026, सोमवार, भद्रा काल: रात 11:43 बजे से 24 नवम्बर 2026, सुबह 10:05 बजे तक।
26 नवम्बर 2026, गुरुवार, भद्रा काल: रात 11:30 बजे से 27 नवम्बर 2026, सुबह 09:49 बजे तक।
29 नवम्बर 2026, रविवार, भद्रा काल: दोपहर 01:47 बजे से 30 नवम्बर 2026, दोपहर 12:55 बजे तक।
हिंदू पंचांग के अनुसार दिसंबर 2026 में भद्रा काल 3, 6, 12, 16, 20, 23, 26 और 29 तारीख को रहेगा। इस अवधि को अशुभ माना जाता है, इसलिए इन तिथियों में विवाह, गृह प्रवेश, नामकरण, मुंडन या नया कार्य शुरू करने से परहेज़ करना चाहिए।
दिसम्बर में कब है भ्रदा काल 2026?
3 दिसम्बर 2026, गुरुवार, भद्रा काल: सुबह 10:54 बजे से 3 दिसम्बर 2026, रात 11:04 बजे तक।
6 दिसम्बर 2026, रविवार, भद्रा काल: दोपहर 02:22 बजे से 7 दिसम्बर 2026, दोपहर 03:15 बजे तक।
12 दिसम्बर 2026, शनिवार, भद्रा काल: दोपहर 03:28 बजे से 13 दिसम्बर 2026, शाम 04:48 बजे तक।
16 दिसम्बर 2026, बुधवार, भद्रा काल: रात 10:46 बजे से 17 दिसम्बर 2026, सुबह 11:12 बजे तक।
20 दिसम्बर 2026, रविवार, भद्रा काल: सुबह 09:18 बजे से 20 दिसम्बर 2026, रात 08:15 बजे तक।
23 दिसम्बर 2026, बुधवार, भद्रा काल: सुबह 10:47 बजे से 23 दिसम्बर 2026, रात 08:54 बजे तक।
26 दिसम्बर 2026, शनिवार, भद्रा काल: सुबह 09:43 बजे से 26 दिसम्बर 2026, रात 08:05 बजे तक।
29 दिसम्बर 2026, मंगलवार, भद्रा काल: दोपहर 01:25 बजे से 29 दिसम्बर 2026, रात 12:55 बजे तक।
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भद्रा काल के दौरान कई कार्य वर्जित माने जाते हैं। इस समय विवाह, गृह प्रवेश, नया व्यवसाय शुरू करना, मुंडन संस्कार और शुभ यात्रा जैसे महत्वपूर्ण कार्यों से बचना चाहिए। मान्यता है कि भद्रा काल (Bhadra Kaal) में इन कार्यों को करने से अशुभ परिणाम सामने आ सकते हैं और कार्य में बाधा या अनचाहा फल प्राप्त हो सकता है।
भद्रा की सटीक जानकारी जानने के लिए हिंदू पंचांग का सहारा लिया जाता है। पंचांग में भद्रा के आरंभ और समाप्ति का समय स्पष्ट रूप से बताया जाता है। इसके आधार पर आसानी से पता लगाया जा सकता है कि भद्रा कब शुरू होगी और कब तक चलेगी, ताकि शुभ कार्यों की योजना सही समय पर बनाई जा सके।
भद्रा हर महीने चार बार आती है – दो बार शुक्ल पक्ष और दो बार कृष्ण पक्ष में। शुक्ल पक्ष में यह अष्टमी और पूर्णिमा के पहले भाग में रहती है, जबकि कृष्ण पक्ष में यह तृतीया और दशमी तिथि के उत्तरार्ध में पड़ती है। पंचांग में इसका विशेष महत्व है और शुभ मुहूर्त निकालते समय भद्रा का विचार जरूर किया जाता है।
भद्रा का मुख 5 घाटियों तक (लगभग 2 घंटे) रहता है, जो अशुभ माना जाता है। जबकि इसकी पूंछ 3 घाटियों तक (लगभग 1 घंटा 12 मिनट) रहती है, जिसे शुभ माना गया है।
शुक्ल पक्ष की चतुर्थी, एकादशी और तृतीया तिथि पर पड़ने वाली भद्रा को शुभ माना जाता है। इसी तरह कृष्ण पक्ष की दशमी तिथि की भद्रा भी शुभ फल देने वाली कही गई है।
भद्रा के समय में ये कार्य वर्जित माने जाते हैं –
विवाह
गृह प्रवेश
रक्षाबंधन
नई यात्रा
नया व्यवसाय शुरू करना
मुंडन संस्कार
भद्रा दोष से बचने के लिए सुबह उठकर इसके 12 नामों का जाप करना शुभ माना जाता है। ये नाम हैं – धन्या, दधिमुखी, भद्र, महामरी, खराना, कालरात्रि, महारुद्र, विष्टी, कुलपुत्रिका, भैरवी, महाकाली और असुरक्षयकारी। माना जाता है कि इनके उच्चारण से भद्रा के दुष्प्रभाव कम हो जाते हैं और जीवन की बाधाएं दूर होती हैं।
भद्रा विचार का अर्थ है, किसी भी शुभ काम से पहले भद्रा काल की जांच करना। पंचांग देखकर यह जाना जाता है कि भद्रा कब है, ताकि उस समय कोई शुभ कार्य न किया जाए।
भद्रा काल में विवाह, गृह प्रवेश या नए काम की शुरुआत जैसे शुभ कार्यों की पूजा नहीं करनी चाहिए। माना जाता है कि इस समय की गई पूजा का फल शुभ नहीं मिलता।
हालांकि भद्रा में शुभ कार्य वर्जित हैं, लेकिन शिव पूजा या रुद्राभिषेक करना वर्जित नहीं है। इस समय आप भगवान शिव की आराधना कर सकते हैं।
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