गुरु पुष्य योग

गुरु पुष्य योग

Guru Pushya Yog 2026: हिन्दू परंपराओं और ज्योतिष में कुछ विशेष संयोग होते हैं, जिन्हें बहुत शुभ और दुर्लभ माना जाता है। इन योगों में शामिल एक गुरु पुष्य योग भी है। गुरु पुष्य योग साल में अलग-अलग समय पर बनता है। जब गुरुवार के दिन पुष्य नक्षत्र पड़ता है तब गुरु पुष्य योग का निर्माण होता है। साल 2026 में गुरु पुष्य योग केवल तीन बार बनेगा। तीनों बार इसकी समय अवधि अलग-अलग होगी। ऐसा माना जाता है कि यह अवसर धन प्राप्ति और सफलता पाने के लिए खास होता है। साथ ही आध्यात्मिक साधना के लिए महत्वपूर्ण माना जाता है।

गुरु पुष्य योग में गुरु यानी बृहस्पति और पुष्य नक्षत्र का मेल होता है। एक ओर जहां गुरु ज्ञान, धन,सौभाग्य और समृद्धि का कारक होता है वहीँ पुष्य नक्षत्र को पोषण और उन्नति का प्रतीक माना जाता है। इसलिए जब यह दोनों एकसाथ आते हैं तो यह योग आपके जीवन सकारात्मक ऊर्जा और सफलता लेकर आता है। तो आइए जानते हैं कि साल 2026 में गुरु पुष्य कब कब बनेगा? 

साल 2026 में कब बनेगा गुरु पुष्य योग : जानें तिथियाँ और समय

साल 2026 में यह शुभ योग तीन बार पड़ रहा है। ज्योतिषीय गणनाओं के अनुसार, इसके समय इस प्रकार हैं:

  • 23 अप्रैल 2026: रात 08:57 बजे से अगले दिन 24 अप्रैल सुबह 06:02 बजे तक

  • 21 मई 2026: सुबह 05:27 बजे से 22 मई रात 02:49 बजे तक

  • 18 जून 2026: सुबह 05:23 बजे से दोपहर 11:33 बजे तक

क्या है गुरु पुष्य योग? 

गुरु पुष्य योग, जिसे गुरु पुष्य अमृत योग भी कहा जाता है, तब बनता है जब गुरुवार को पुष्य नक्षत्र आता है। ज्योतिष शास्त्र में पुष्य नक्षत्र को “नक्षत्रों का राजा” कहा गया है क्योंकि यह पोषण और वृद्धि का प्रतिनिधित्व करता है। दूसरी ओर, गुरुवार का स्वामी बृहस्पति है, जो ज्ञान, धर्म, संपन्नता और सद्गुणों के प्रतीक हैं।

इस योग का महत्व इसलिए और बढ़ जाता है क्योंकि दोनों ही कारक शुभ और कल्याणकारी माने जाते हैं। यही वजह है कि गुरु पुष्य योग में किए गए कार्य लंबे समय तक सफलता और सुख प्रदान करते हैं।

गुरु पुष्य योग का महत्व 

गुरु पुष्य योग को केवल धन या संपत्ति की दृष्टि से नहीं देखा जाता, बल्कि यह दिन आध्यात्मिक दृष्टि से भी बेहद खास है। परंपराओं के अनुसार, इस दिन गुरु और शिष्य के बीच का बंधन और गहरा होता है। मंत्र जप, ध्यान और पूजा-पाठ के दौरान साधना जल्दी फल देती है और व्यक्ति को मानसिक शांति प्राप्त होती है।

भौतिक जीवन में यह योग धन, व्यापार और नए कार्यों के लिए शुभ माना जाता है। इस समय सोना-चांदी, संपत्ति या वाहन खरीदना, निवेश करना या कोई नया व्यवसाय शुरू करना बेहद फलदायी होता है। जो लोग लंबे समय से किसी काम को शुरू करने की योजना बना रहे हों, उनके लिए यह योग स्वर्णिम अवसर लेकर आता है।

गुरु पुष्य योग में करें ये कार्य 

  • इस दिन सुबह जल्दी उठकर स्नान करना और शुद्ध वस्त्र धारण करना शुभ माना जाता है। 

  • घर में भगवान विष्णु और माता लक्ष्मी की पूजा करने से सौभाग्य बढ़ता है। 

  • गुरु ग्रह को प्रसन्न करने के लिए पीले वस्त्र पहनना, केले के पेड़ की पूजा करना और जरूरतमंदों को दान देना विशेष लाभकारी होता है।

  • व्यापारिक दृष्टि से देखें तो यह दिन नए अनुबंध करने, निवेश योजनाएं शुरू करने या बड़े लेन-देन करने के लिए बहुत अच्छा है। 

  • आभूषण या सोना खरीदना इस योग में अत्यंत मंगलकारी माना गया है। साथ ही, चिकित्सा या शिक्षा से जुड़े नए कार्य की शुरुआत भी इस दिन की जा सकती है।

गुरु पुष्य योग में क्या न करें  

हालाँकि यह योग कई शुभ कार्यों के लिए उत्तम है, लेकिन विवाह जैसे मांगलिक कार्यों के लिए इसे उपयुक्त नहीं माना जाता। परंपराओं के अनुसार, शादी-ब्याह इस दिन टाले जाते हैं। इसके अतिरिक्त, इस दिन क्रोध, नकारात्मक विचार और विवादों से भी दूर रहना चाहिए, क्योंकि यह समय आत्मशुद्धि और सकारात्मक कर्मों के लिए है।

गुरु पुष्य योग क्यों है इतना शक्तिशाली? 

गुरु पुष्य योग की शक्ति इस कारण मानी जाती है कि इसमें पुष्य नक्षत्र की पोषणकारी ऊर्जा और गुरु ग्रह की दयालुता एक साथ जुड़ जाती है। यह मेल जीवन के हर क्षेत्र में सकारात्मक प्रभाव डालता है, चाहे बात धन-संपत्ति की हो, शिक्षा की, परिवारिक सुख की या आध्यात्मिक उन्नति की।

जो लोग इस दिन ईमानदारी और श्रद्धा से पूजा करते हैं, दान करते हैं या नए कार्य की शुरुआत करते हैं, उन्हें लंबे समय तक सफलता और आशीर्वाद मिलता है। यही वजह है कि इसे वर्ष के सबसे शुभ अवसरों में से एक माना जाता है।

गुरु पुष्य योग 2026 तीन बार आ रहा है, और हर बार यह जीवन में समृद्धि, सफलता और शांति का संदेश लेकर आएगा। यह सिर्फ धन कमाने का अवसर नहीं बल्कि आत्मिक उन्नति का भी मार्ग है। इस दिन किए गए शुभ कर्म जीवन को नई दिशा दे सकते हैं। इसलिए इन तिथियों पर अपने कार्यों की सही योजना बनाएं और भगवान विष्णु तथा माता लक्ष्मी की कृपा पाने का प्रयास करें। 

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