Ravi Pushya Yoga 2026: वैदिक ज्योतिष में कुछ विशेष संयोग के बारे में बताया गया है. यह ऐसे योग होते हैं जिनमें किए गए कार्य लंबे समय तक शुभ फल प्रदान करते हैं। रवि पुष्य योग भी इसमें शामिल है। इस योग का निर्माण तब होता है जब पुष्य नक्षत्र के दौरान रविवार का दिन पड़ता है. यह मेल बहुत ही पावन और लाभकारी योग बनाता है। हर साल की तरह साल 2026 में भी यह शुभ योग अलग अलग महीनों में कई बार बनने वाला है।
ऐसा माना जाता है कि इस दिन किए गए आध्यात्मिक और भौतिक कार्य विशेष फलदायी होते हैं। इस दौरान आप जो भी काम शुरू करते हैं वो न केवल सफलता की ओर ले जाते हैं, बल्कि जीवन में लंबे समय तक स्थिरता, समृद्धि और उन्नति भी प्रदान करते हैं। यही कारण है कि लोग रवि पुष्य योग में नए कामों की शुरुआत, निवेश, पूजा-पाठ और धार्मिक अनुष्ठान करना शुभ समझते हैं। तो आइए जानते हैं कि साल 2026 रवि पुष्य योग की तिथियां किस प्रकार रहेंगी।
साल 2026 में कई बार रवि पुष्य योग का निर्माण हो रहा है। रवि पुष्य योग का निर्माण 04 जनवरी, 1 फरवरी, 1 मार्च, 4 अक्टूबर, 1 नवंबर, 29 नवंबर 2026 को होगा। यह वे विशेष अवसर हैं, जब रविवार और पुष्य नक्षत्र का संयोग बनकर जीवन को उन्नति और समृद्धि से भरने का अवसर देता है। इन तिथियों पर किए गए शुभ कार्य न केवल सफलता दिलाते हैं, बल्कि लंबे समय तक स्थायी लाभ भी प्रदान करते हैं।
नीचे वर्ष 2026 में बनने वाले सभी रवि पुष्य योग की सूची दी गई है:
4 जनवरी, 2026, रविवार को दोपहर 03:11 बजे से 5 जनवरी, 2026, सोमवार को सुबह 07:15 बजे तक
1 फरवरी, 2026, रविवार को सुबह 07:09 बजे से रात 11:58 बजे तक
1 मार्च, 2026, रविवार को सुबह 06:46 बजे से 08:34 बजे तक
4 अक्टूबर, 2026, रविवार को रात 12:13 बजे से 5 अक्टूबर, 2026, सोमवार को सुबह 06:16 बजे तक
1 नवम्बर, 2026, रविवार को सुबह 06:33 बजे से 2 नवम्बर, 2026, सोमवार को सुबह 04:30 बजे तक
29 नवम्बर, 2026, रविवार को सुबह 06:55 बजे से सुबह 10:59 बजे तक
ज्योतिष शास्त्र में पुष्य नक्षत्र को सभी नक्षत्रों का राजा माना गया है। यह नक्षत्र शनि ग्रह द्वारा शासित होता है, लेकिन इस पर देवगुरु बृहस्पति की विशेष कृपा रहती है। यही कारण है कि इसे पोषण, उन्नति, समृद्धि और दिव्यता का प्रतीक कहा गया है। जब यह शुभ नक्षत्र रविवार के दिन अर्थात् रवि के साथ संयोग बनाता है, तो इसे रवि पुष्य योग कहा जाता है।
रविवार को सूर्य का दिन माना जाता है और सूर्य ऊर्जा, जीवन शक्ति तथा आत्मविश्वास का कारक है। जब सूर्य की प्रखरता और पुष्य नक्षत्र की मंगलमयता एक साथ मिलती है, तब यह समय अत्यंत पावन और सफलताओं से भरा हुआ माना जाता है। इस काल में किए गए नए कार्यों की शुरुआत लंबे समय तक सकारात्मक परिणाम देने वाली होती है। यही कारण है कि लोग इस योग में निवेश, व्यापार आरंभ, सोना-चाँदी की खरीदारी, गृहप्रवेश और धार्मिक अनुष्ठानों को विशेष महत्व देते हैं।
1. लक्ष्मी और कुबेर पूजन
ज्योतिष मान्यताओं के अनुसार, पुष्य नक्षत्र में देवी लक्ष्मी का जन्म हुआ था। इस योग में मां लक्ष्मी और धन के देवता कुबेर की विशेष पूजा-अर्चना करने से घर-परिवार में सुख, वैभव और समृद्धि का आगमन होता है।
2. यंत्र स्थापना
इस दिन घर या कार्यस्थल पर श्री यंत्र, कुबेर यंत्र या अन्य आध्यात्मिक यंत्र स्थापित करना अत्यंत शुभ माना जाता है। इससे आर्थिक उन्नति और सकारात्मक ऊर्जा का वास होता है।
3. सोने-चांदी की खरीदारी
रवि पुष्य योग में सोना-चाँदी, गहने और मूल्यवान धातुओं की खरीदारी शुभ फल देती है। इन वस्तुओं को लक्ष्मी का प्रतीक माना जाता है, जिससे घर में धन और वैभव बढ़ता है।
4. नए व्यापार की शुरुआत
इस दिन नया व्यापार शुरू करना या किसी बड़े निवेश की शुरुआत करना दीर्घकालिक सफलता प्रदान करता है। शेयर मार्केट, प्रॉपर्टी या बिज़नेस एग्रीमेंट जैसे कार्य भी इस समय किए जा सकते हैं।
5. वाहन व संपत्ति की खरीदारी
इस योग में वाहन और संपत्ति (घर/जमीन) लेना शुभ होता है। यह कार्य जीवन में स्थिरता और समृद्धि लेकर आता है।
6. आर्थिक कार्य
नया बैंक खाता खोलना, फिक्स्ड डिपॉजिट करना या किसी वित्तीय योजना में पैसा लगाना इस दिन विशेष लाभकारी माना गया है।
7. विवाह और अन्य शुभ कार्य
विवाह की खरीदारी, गहनों का चयन या गृहप्रवेश जैसे कार्य इस दिन करने से जीवन में शुभता और सौभाग्य की वृद्धि होती है।
8. पूजा-पाठ और आध्यात्मिक कार्य
जप, ध्यान, हवन, पूजा-पाठ और दान-पुण्य करने से आत्मिक शांति और आध्यात्मिक उन्नति मिलती है। यह समय नकारात्मक ऊर्जा को दूर कर सकारात्मकता को आकर्षित करता है।
वैदिक ज्योतिष में रवि पुष्य योग को बेहद शक्तिशाली और शुभ संयोग माना गया है। इसका महत्व इसलिए भी अधिक है क्योंकि इसमें पुष्य नक्षत्र और रविवार की ऊर्जा एक साथ मिलती है।
पुष्य नक्षत्र पोषण, वृद्धि और समृद्धि का प्रतीक है। इसे ऐसा नक्षत्र माना गया है, जो व्यक्ति को सकारात्मक ऊर्जा प्रदान करता है और उसके सभी प्रयासों को सफलता की ओर ले जाता है। इस काल में किए गए धार्मिक अनुष्ठान, साधना और धन संबंधी कार्य विशेष रूप से फलदायी होते हैं।
दूसरी ओर, रविवार का संबंध सूर्य से है, जो नेतृत्व, आत्मविश्वास, शक्ति और जीवन ऊर्जा का द्योतक है। जब सूर्य की प्रखरता पुष्य नक्षत्र के साथ मिलती है, तो शुभता और कई गुना बढ़ जाती है। यही कारण है कि इसे “धन प्राप्ति योग” भी कहा जाता है। मान्यता है कि इस दिन शुरू किए गए नए कार्य न केवल प्रगति की राह खोलते हैं, बल्कि हर प्रकार की बाधाओं से भी सुरक्षित रहते हैं।
व्यवसाय, निवेश, शिक्षा, नौकरी, स्वास्थ्य और आध्यात्मिक साधना हर क्षेत्र में यह संयोग सफलता और उन्नति के लिए वरदान समान माना जाता है।
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