Annaprashan Muhurat 2026: क्या आपने कभी सोचा है कि बच्चे का पहला अन्न ग्रहण (अन्नप्राशन) संस्कार इतना खास क्यों माना जाता है? दरअसल, हिंदू धर्म में यह सिर्फ एक परंपरा नहीं बल्कि शिशु के जीवन का महत्वपूर्ण पड़ाव है, जहां मां के दूध के बाद पहली बार ठोस आहार की शुरुआत होती है। हर माता-पिता चाहते हैं कि यह शुभ कार्य सही मुहूर्त में हो, ताकि बच्चे का स्वास्थ्य, भाग्य और जीवन समृद्धि से भरा रहे। साल 2026 में अन्नप्राशन संस्कार के लिए कई खास तिथियां और शुभ मुहूर्त बताए गए हैं, जिन्हें पंचांग और ज्योतिष के आधार पर तय किया गया है। अगर आप भी अपने लाडले या लाडली के लिए सही अन्नप्राशन मुहूर्त ढूंढ रहे हैं, तो यह जानकारी आपके लिए बेहद काम की साबित होगी।
अन्नप्राशन संस्कार असल में एक बेहद प्यारा और अहम अवसर है, जब बच्चे को पहली बार ठोस भोजन खिलाया जाता है। संस्कृत में ‘अन्नप्राशन’ का मतलब है भोजन की शुरुआत करना। जिस तरह नामकरण, मुंडन या विवाह जैसे संस्कार बच्चे के जीवन में खास महत्व रखते हैं, उसी तरह अन्नप्राशन भी उसकी जिंदगी का एक यादगार पल होता है। जन्म के शुरुआती छह महीनों तक बच्चा सिर्फ मां के दूध पर निर्भर रहता है, लेकिन अन्नप्राशन के दिन पहली बार उसे पके हुए चावल या खीर जैसी चीज़ खिलाई जाती है। इसे परिवार बच्चे की अच्छी सेहत, लंबी उम्र और सुख-समृद्धि की कामना के साथ करता है।
यह संस्कार केवल भोजन की शुरुआत नहीं है, बल्कि पूरे परिवार के लिए खुशियों का जश्न भी होता है। हर जगह इसे अलग-अलग नामों और तरीकों से मनाया जाता है- उत्तराखंड में इसे भातखुलाई, बंगाल में मुखेभट और केरल में चोरोनू कहा जाता है। आमतौर पर यह तब किया जाता है, जब बच्चा छह महीने का हो जाता है। हालांकि परंपराएं अलग-अलग हो सकती हैं, लेकिन हर जगह इसकी भावना एक जैसी है- बच्चे के जीवन में सेहत, ऊर्जा और खुशियों का आशीर्वाद देना।
आपको बता दें कि साल 2026 में आप अन्नप्राशन जैसे महत्वपूर्ण कार्यों के लिए कई शुभ मुहूर्त (Shubh Muhurat) चुन सकते हैं। हम आपके लिए हिन्दू पंचांग के अनुसार, साल 2026 के अन्नप्राशन शुभ मुहूर्त लाए हैं ताकि आपके सभी कार्य उपयुक्त तिथियों पर अच्छे से सम्पन्न हो सकें।
जानिए साल 2026 में अन्नप्राशन के लिए शुभ मुहूर्त।
जनवरी का महीना नई उम्मीदों और संकल्पों का संदेश लेकर आता है, और यह अन्नप्राशन जैसे महत्वपूर्ण संस्कार के आयोजन के लिए एकदम सही समय माना जाता है। अन्नप्राशन समारोह बच्चे के जीवन में ठोस आहार की पहली शुरूआत को दर्शाता है और उसके पोषण के नए अध्याय की शुरुआत करता है। हिंदू पंचांग के अनुसार, जनवरी 2026 में अन्नप्राशन के लिए विशेष रूप से शुभ तिथियां हैं: 1, 5, 9, 12, 21, 23 और 28 जनवरी। इन दिनों में अन्नप्राशन करना बच्चे के स्वास्थ्य और खुशहाली के लिए अत्यंत लाभकारी माना जाता है।
जनवरी अन्नप्राशन शुभ मुहूर्त (January Annaprashan Shubh Muhurat) यहाँ देखें!
1 जनवरी 2026, गुरुवार, अन्नप्राशन मुहूर्त: सुबह 07:45 से 10:23 बजे तक, सुबह 11:51 से दोपहर 04:47 बजे तक, शाम 07:01 से रात 10:52 बजे तक।
5 जनवरी 2026, सोमवार, अन्नप्राशन मुहूर्त: सुबह 08:25 से दोपहर 01:00 बजे तक।
9 जनवरी 2026, शुक्रवार, अन्नप्राशन मुहूर्त: रात 08:50 से 11:07 बजे तक।
12 जनवरी 2026, सोमवार, अन्नप्राशन मुहूर्त: दोपहर 02:08 से शाम 06:18 बजे तक, रात 08:38 से 10:56 बजे तक।
21 जनवरी 2026, बुधवार, अन्नप्राशन मुहूर्त: सुबह 07:45 से 10:32 बजे तक, सुबह 11:57 से शाम 05:43 बजे तक, रात 08:03 से 10:20 बजे तक।
23 जनवरी 2026, शुक्रवार, अन्नप्राशन मुहूर्त: दोपहर 03:20 से शाम 07:55 बजे तक।
28 जनवरी 2026, बुधवार, अन्नप्राशन मुहूर्त: सुबह 10:05 से दोपहर 03:00 बजे तक।
फरवरी को बदलाव और नए अवसरों का महीना माना जाता है, जो जीवन में नई दिशा और विकास का प्रतीक है। यह समय अन्नप्राशन जैसे महत्वपूर्ण संस्कार के लिए बेहद शुभ माना जाता है, क्योंकि यह बच्चे के आहार में ठोस भोजन की पहली शुरुआत का प्रतीक है। साल 2026 में 6, 18 और 20 फरवरी को अन्नप्राशन संस्कार के लिए विशेष शुभ तिथियां हैं। इन दिनों इस संस्कार का आयोजन करना बच्चे के स्वास्थ्य, खुशहाली और समृद्धि के लिए बेहद लाभकारी माना जाता है।
फरवरी अन्नप्राशन शुभ मुहूर्त (February Annaprashan Shubh Muhurat) यहाँ देखें!
6 फरवरी 2026, शुक्रवार, अन्नप्राशन मुहूर्त: सुबह 07:37 से 08:02 बजे तक, सुबह 09:29 से दोपहर 02:25 बजे तक, शाम 04:40 से रात 11:34 बजे तक।
18 फरवरी 2026, बुधवार, अन्नप्राशन मुहूर्त: शाम 06:13 से रात 10:46 बजे तक।
20 फरवरी 2026, शुक्रवार, अन्नप्राशन मुहूर्त: सुबह 07:26 से 09:59 बजे तक, सुबह 11:34 से दोपहर 03:45 बजे तक।
मार्च का महीना वसंत ऋतु की शुरुआत के साथ नई ऊर्जा और नवीनीकरण का प्रतीक है, जो अन्नप्राशन जैसे महत्वपूर्ण संस्कार के लिए बेहद उपयुक्त समय बनाता है। यह महीना जीवन में पोषण और विकास के नए अध्याय का प्रतीक है, इसलिए बच्चे को पहली बार ठोस आहार देने का यह अवसर खास महत्व रखता है। हिंदू पंचांग के अनुसार, मार्च 2026 में अन्नप्राशन संस्कार के लिए 4, 5, 16, 20, 25 और 27 मार्च विशेष शुभ तिथियां हैं। इन दिनों इस संस्कार का आयोजन बच्चे के स्वास्थ्य, खुशहाली और समृद्धि के लिए अत्यंत लाभकारी माना जाता है।
मार्च अन्नप्राशन शुभ मुहूर्त (March Annaprashan Shubh Muhurat) यहाँ देखें!
4 मार्च 2026, बुधवार, अन्नप्राशन मुहूर्त: शाम 07:35 से रात 09:51 बजे तक।
5 मार्च 2026, गुरुवार, अन्नप्राशन मुहूर्त: सुबह 07:43 से दोपहर 12:39 बजे तक, दोपहर 02:54 से रात 09:47 बजे तक।
16 मार्च 2026, सोमवार, अन्नप्राशन मुहूर्त: दोपहर 02:10 से रात 10:07 बजे तक।
20 मार्च 2026, शुक्रवार, अन्नप्राशन मुहूर्त: सुबह 06:56 से 08:09 बजे तक, सुबह 09:44 से शाम 04:15 बजे तक, शाम 06:32 से रात 10:44 बजे तक।
25 मार्च 2026, बुधवार, अन्नप्राशन मुहूर्त: सुबह 07:49 से दोपहर 01:35 बजे तक।
27 मार्च 2026, शुक्रवार, अन्नप्राशन मुहूर्त: सुबह 11:12 से दोपहर 03:47 बजे तक, शाम 06:05 से रात 10:39 बजे तक।
अप्रैल का महीना प्रकृति में खिलखिलाहट और नए विकास का प्रतीक है, जो अन्नप्राशन जैसे शुभ संस्कार के लिए एक आदर्श समय प्रदान करता है। यह अवसर बच्चे के जीवन में ठोस आहार की पहली शुरुआत को दर्शाता है और उसके स्वस्थ, खुशहाल और समृद्ध भविष्य की कामना से भरा होता है। हिंदू पंचांग के अनुसार, अप्रैल 2026 में 2, 3, 6, 15, 20, 23 और 29 तारीखें अन्नप्राशन संस्कार के लिए विशेष रूप से शुभ मानी गई हैं।
अप्रैल अन्नप्राशन शुभ मुहूर्त (April Annaprashan Shubh Muhurat) यहाँ देखें!
2 अप्रैल 2026, गुरुवार, अन्नप्राशन मुहूर्त: सुबह 07:18 से 08:53 बजे तक।
3 अप्रैल 2026, शुक्रवार, अन्नप्राशन मुहूर्त: सुबह 10:45 से दोपहर 01:00 बजे तक, दोपहर 03:20 से रात 10:13 बजे तक।
6 अप्रैल 2026, सोमवार, अन्नप्राशन मुहूर्त: शाम 05:25 से रात 10:26 बजे तक।
15 अप्रैल 2026, बुधवार, अन्नप्राशन मुहूर्त: शाम 04:50 से रात 11:01 बजे तक।
20 अप्रैल 2026, सोमवार, अन्नप्राशन मुहूर्त: सुबह 07:42 से 09:38 बजे तक।
23 अप्रैल 2026, गुरुवार, अन्नप्राशन मुहूर्त: सुबह 07:31 से 11:41 बजे तक, दोपहर 02:01 से रात 11:13 बजे तक।
29 अप्रैल 2026, बुधवार, अन्नप्राशन मुहूर्त: सुबह 07:07 से 09:03 बजे तक, सुबह 11:17 से शाम 06:11 बजे तक।
मई का महीना, जो स्थिरता और वास्तविकता का प्रतीक है, अन्नप्राशन जैसे पवित्र संस्कार के लिए एक उपयुक्त समय माना जाता है। यह अवसर बच्चे को पहली बार ठोस भोजन से परिचित कराने और जीवन में समृद्धि व स्थायित्व की शुरुआत का प्रतीक है। हिंदू पंचांग के अनुसार, मई 2026 में अन्नप्राशन संस्कार के लिए 1, 4, 11, 14 और 15 तारीखें विशेष रूप से शुभ मानी गई हैं। इन दिनों इस संस्कार का आयोजन बच्चे के स्वास्थ्य, खुशहाली और समृद्धि के लिए अत्यंत लाभकारी माना जाता है।
मई अन्नप्राशन शुभ मुहूर्त (May Annaprashan Shubh Muhurat) यहाँ देखें!
1 मई 2026, शुक्रवार, अन्नप्राशन मुहूर्त: दोपहर 01:30 से शाम 08:23 बजे तक।
4 मई 2026, सोमवार, अन्नप्राशन मुहूर्त: सुबह 06:47 से 10:58 बजे तक।
11 मई 2026, सोमवार, अन्नप्राशन मुहूर्त: शाम 05:24 से 07:44 बजे तक, रात 10:02 से 12:02 बजे तक।
14 मई 2026, गुरुवार, अन्नप्राशन मुहूर्त: दोपहर 02:56 से रात 09:50 बजे तक।
15 मई 2026, शुक्रवार, अन्नप्राशन मुहूर्त: सुबह 08:00 से 10:14 बजे तक।
जून का महीना गर्मजोशी और उत्साह का प्रतीक है, जो अन्नप्राशन जैसे विशेष संस्कार के लिए बेहद उपयुक्त समय माना जाता है। इस अवसर पर बच्चे को पहली बार ठोस भोजन से परिचित कराना उसके जीवन में नई ऊर्जा, स्वास्थ्य और खुशहाली की कामना का प्रतीक है। हिंदू पंचांग के अनुसार, जून 2026 में अन्नप्राशन संस्कार के लिए 17 और 24 तारीखें विशेष रूप से शुभ मानी गई हैं। इन दिनों इस संस्कार का आयोजन बच्चे के उज्ज्वल और स्वस्थ भविष्य के लिए अत्यंत लाभकारी रहेगा।
जून अन्नप्राशन शुभ मुहूर्त (June Annaprashan Shubh Muhurat) यहाँ देखें!
17 जून 2026, बुधवार, अन्नप्राशन मुहूर्त: सुबह 05:54 से 08:05 बजे तक, दोपहर 12:42 से शाम 07:37 बजे तक, रात 09:41 से 10:08 बजे तक।
24 जून 2026, बुधवार, अन्नप्राशन मुहूर्त: सुबह 09:57 से शाम 04:51 बजे तक।
जुलाई का महीना गर्मियों की खुशियों और उत्साह का प्रतीक है, जो अन्नप्राशन जैसे खुशी से भरे संस्कार के लिए एक उपयुक्त समय प्रदान करता है। इस अवसर पर बच्चे को पहली बार ठोस आहार से परिचित कराना उसके जीवन में नए स्वाद और पोषण की शुरुआत का प्रतीक है। हिंदू पंचांग के अनुसार, जुलाई 2026 में अन्नप्राशन संस्कार के लिए 1, 2, 9, 15, 20, 24, 29, 30 और 31 तारीखें विशेष रूप से शुभ मानी गई हैं। इन दिनों इस संस्कार का आयोजन बच्चे के स्वास्थ्य, खुशहाली और समृद्धि के लिए अत्यंत लाभकारी माना जाता है।
जुलाई अन्नप्राशन शुभ मुहूर्त (July Annaprashan Shubh Muhurat) यहाँ देखें!
1 जुलाई 2026, बुधवार, अन्नप्राशन मुहूर्त: सुबह 09:30 से 11:47 बजे तक, शाम 04:23 से रात 10:28 बजे तक।
2 जुलाई 2026, गुरुवार, अन्नप्राशन मुहूर्त: सुबह 07:06 से दोपहर 02:00 बजे तक, शाम 04:19 से रात 10:24 बजे तक।
9 जुलाई 2026, गुरुवार, अन्नप्राशन मुहूर्त: दोपहर 01:32 से 03:52 बजे तक।
15 जुलाई 2026, बुधवार, अन्नप्राशन मुहूर्त: दोपहर 01:09 से शाम 05:47 बजे तक, रात 07:51 से 10:16 बजे तक।
20 जुलाई 2026, सोमवार, अन्नप्राशन मुहूर्त: सुबह 06:07 से दोपहर 12:49 बजे तक, दोपहर 03:08 से रात 09:13 बजे तक।
24 जुलाई 2026, शुक्रवार, अन्नप्राशन मुहूर्त: सुबह 06:09 से 08:00 बजे तक।
29 जुलाई 2026, बुधवार, अन्नप्राशन मुहूर्त: सुबह 07:44 से दोपहर 12:13 बजे तक, दोपहर 02:33 से शाम 08:38 बजे तक।
30 जुलाई 2026, गुरुवार, अन्नप्राशन मुहूर्त: रात 10:01 से 11:26 बजे तक।
31 जुलाई 2026, शुक्रवार, अन्नप्राशन मुहूर्त: सुबह 07:32 से दोपहर 02:25 बजे तक, शाम 04:44 से रात 09:57 बजे तक।
अगस्त का महीना, जो गर्मियों के अंत और नए परिवर्तनों का संकेत देता है, अन्नप्राशन जैसे महत्वपूर्ण संस्कार के लिए एक उपयुक्त और सार्थक समय माना जाता है। यह अवसर जीवन में नई शुरुआत और चिंतन का प्रतीक है, जिसमें बच्चे को पहली बार ठोस आहार देने का अनुष्ठान उसकी अच्छी सेहत और उज्ज्वल भविष्य की कामना से जुड़ा होता है। हिंदू पंचांग के अनुसार, अगस्त 2026 में अन्नप्राशन संस्कार के लिए 3, 5, 7, 10, 17, 26 और 28 तारीखें विशेष रूप से शुभ मानी गई हैं। इन दिनों इस संस्कार का आयोजन बच्चे के सुखद और समृद्ध जीवन के लिए अत्यंत लाभकारी रहेगा।
अगस्त अन्नप्राशन शुभ मुहूर्त (August Annaprashan Shubh Muhurat) यहाँ देखें!
3 अगस्त 2026, सोमवार, अन्नप्राशन मुहूर्त: सुबह 09:37 से शाम 04:32 बजे तक, शाम 06:36 से रात 10:30 बजे तक।
5 अगस्त 2026, बुधवार, अन्नप्राशन मुहूर्त: सुबह 11:46 से शाम 06:28 बजे तक, रात 08:10 से 09:38 बजे तक।
7 अगस्त 2026, शुक्रवार, अन्नप्राशन मुहूर्त: रात 09:30 से 10:55 बजे तक।
10 अगस्त 2026, सोमवार, अन्नप्राशन मुहूर्त: शाम 04:04 से रात 09:18 बजे तक।
17 अगस्त 2026, सोमवार, अन्नप्राशन मुहूर्त: सुबह 06:25 से 10:59 बजे तक, दोपहर 01:18 से शाम 05:41 बजे तक।
26 अगस्त 2026, बुधवार, अन्नप्राशन मुहूर्त: सुबह 06:27 से 10:23 बजे तक।
28 अगस्त 2026, शुक्रवार, अन्नप्राशन मुहूर्त: सुबह 06:28 से दोपहर 12:35 बजे तक।
सितंबर का महीना, जो गर्मी से शरद ऋतु में बदलाव का प्रतीक है, अनुकूलन और नए अवसरों का समय माना जाता है। यह समय जीवन में नई शुरुआत और अवसरों का संकेत देता है, जो अन्नप्राशन जैसे महत्वपूर्ण संस्कार के लिए आदर्श होता है। हिंदू पंचांग के अनुसार, सितंबर 2026 में अन्नप्राशन संस्कार के लिए 7, 21 और 24 तारीखें विशेष रूप से शुभ मानी गई हैं। इन दिनों इस संस्कार का आयोजन बच्चे के स्वास्थ्य, खुशहाली और उज्ज्वल भविष्य की शुभकामनाओं से भरा होगा।
सितंबर अन्नप्राशन शुभ मुहूर्त (September Annaprashan Shubh Muhurat) यहाँ देखें!
17 सितंबर 2026, गुरुवार, अन्नप्राशन मुहूर्त: दोपहर 03:39 से शाम 08:14 बजे तक।
21 सितंबर 2026, सोमवार, अन्नप्राशन मुहूर्त: सुबह 08:41 से शाम 05:05 बजे तक, शाम 06:33 से रात 09:33 बजे तक।
24 सितंबर 2026, गुरुवार, अन्नप्राशन मुहूर्त: सुबह 06:41 से 10:49 बजे तक, दोपहर 01:07 से शाम 06:21 बजे तक, रात 07:46 से 11:17 बजे तक।
अक्टूबर का महीना, जो शरद ऋतु की खूबसूरती और इसके परिवर्तनकारी गुणों का प्रतीक है, अन्नप्राशन जैसे महत्वपूर्ण संस्कार के लिए एक आदर्श समय माना जाता है। यह अवसर नए जीवन की शुरुआत और शुद्धता का प्रतीक है, जब बच्चे को पहली बार ठोस आहार से परिचित कराया जाता है। हिंदू पंचांग के अनुसार, अक्टूबर 2026 में अन्नप्राशन संस्कार के लिए 12, 21, 26 और 30 तारीखें विशेष रूप से शुभ मानी गई हैं। इन दिनों इस संस्कार का आयोजन बच्चे के स्वास्थ्य, खुशहाली और समृद्धि की शुरुआत का प्रतीक होगा।
अक्टूबर अन्नप्राशन शुभ मुहूर्त (October Annaprashan Shubh Muhurat) यहाँ देखें!
12 अक्टूबर 2026, सोमवार, अन्नप्राशन मुहूर्त: सुबह 07:19 से 09:38 बजे तक, सुबह 11:57 से शाम 05:10 बजे तक, शाम 06:35 से रात 10:06 बजे तक।
21 अक्टूबर 2026, बुधवार, अन्नप्राशन मुहूर्त: सुबह 07:30 से 09:03 बजे तक, सुबह 11:21 से दोपहर 03:07 बजे तक।
26 अक्टूबर 2026, सोमवार, अन्नप्राशन मुहूर्त: सुबह 07:00 से 11:02 बजे तक।
30 अक्टूबर 2026, शुक्रवार, अन्नप्राशन मुहूर्त: सुबह 07:03 से 08:27 बजे तक।
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नवंबर का महीना, जो कृतज्ञता और चिंतन का प्रतीक है, जीवन में नए अध्याय की शुरुआत का संदेश देता है। यह समय अन्नप्राशन जैसे महत्वपूर्ण संस्कार के लिए बेहद उपयुक्त और सार्थक माना जाता है। इस अवसर पर बच्चे को पहली बार ठोस आहार से परिचित कराना उसके स्वस्थ भविष्य और समृद्धि की शुभकामनाओं का प्रतीक है। हिंदू पंचांग के अनुसार, नवंबर 2026 में अन्नप्राशन संस्कार के लिए 6, 11, 16, 20, 25 और 26 तारीखें विशेष रूप से अनुकूल मानी गई हैं। इन दिनों इस संस्कार का आयोजन बच्चे के जीवन में खुशहाली और अच्छे स्वास्थ्य का प्रतीक बनेगा।
नवंबर अन्नप्राशन शुभ मुहूर्त (November Annaprashan Shubh Muhurat) यहाँ देखें!
6 नवंबर 2026, शुक्रवार, अन्नप्राशन मुहूर्त: दोपहर 12:22 से 02:05 बजे तक, दोपहर 03:32 से शाम 08:28 बजे तक।
11 नवंबर 2026, बुधवार, अन्नप्राशन मुहूर्त: सुबह 07:40 से 09:59 बजे तक, दोपहर 12:03 से 01:45 बजे तक।
16 नवंबर 2026, सोमवार, अन्नप्राशन मुहूर्त: सुबह 07:20 से दोपहर 01:25 बजे तक, दोपहर 02:53 से शाम 07:48 बजे तक, रात 10:03 से 12:20 बजे तक।
20 नवंबर 2026, शुक्रवार, अन्नप्राशन मुहूर्त: सुबह 07:26 से 09:23 बजे तक।
25 नवंबर 2026, बुधवार, अन्नप्राशन मुहूर्त: रात 09:28 से 11:48 बजे तक।
26 नवंबर 2026, गुरुवार, अन्नप्राशन मुहूर्त: सुबह 09:00 से दोपहर 02:13 बजे तक, दोपहर 03:38 से शाम 07:09 बजे तक।
दिसंबर का महीना, जो उत्सवों और बीते वर्ष पर चिंतन का प्रतीक है, अन्नप्राशन संस्कार के लिए एक खास और भावपूर्ण समय प्रदान करता है। यह अवसर नए साल के स्वागत और जीवन में नई शुरुआत तथा सकारात्मक बदलाव का प्रतीक है। हिंदू पंचांग के अनुसार, दिसंबर 2026 में अन्नप्राशन संस्कार के लिए 3, 14, 16, 23, 25 और 30 तारीखें विशेष रूप से शुभ और अनुकूल मानी गई हैं। इन तिथियों का उपयोग करके आप इस पवित्र संस्कार को अपने बच्चे के जीवन में सही समय पर आयोजित करने का निर्णय ले सकते हैं।
दिसंबर अन्नप्राशन शुभ मुहूर्त (December Annaprashan Shubh Muhurat) यहाँ देखें!
3 दिसंबर 2026, गुरुवार, अन्नप्राशन मुहूर्त: सुबह 07:29 से दोपहर 12:18 बजे तक।
14 दिसंबर 2026, सोमवार, अन्नप्राशन मुहूर्त: सुबह 07:37 से 11:35 बजे तक, दोपहर 01:03 से शाम 05:58 बजे तक।
16 दिसंबर 2026, बुधवार, अन्नप्राशन मुहूर्त: सुबह 07:41 से दोपहर 12:55 बजे तक, दोपहर 02:20 से 03:55 बजे तक।
23 दिसंबर 2026, बुधवार, अन्नप्राशन मुहूर्त: रात 09:58 से 12:11 बजे तक।
25 दिसंबर 2026, शुक्रवार, अन्नप्राशन मुहूर्त: सुबह 07:43 से दोपहर 12:19 बजे तक, दोपहर 01:44 से रात 09:50 बजे तक।
30 दिसंबर 2026, बुधवार, अन्नप्राशन मुहूर्त: सुबह 07:44 से 10:32 बजे तक, दोपहर 12:00 से 01:25 बजे तक।
धार्मिक ग्रंथों में मानव जीवन के 16 संस्कारों को अत्यंत महत्वपूर्ण माना गया है, जो जीवन के विभिन्न चरणों का प्रतिनिधित्व करते हैं। इन संस्कारों की शुरुआत गर्भाधान से होती है और मृत्यु के बाद तक चलती है। इन 16 संस्कारों में से “अन्नप्राशन” को सातवां संस्कार माना गया है, जो बच्चे के जन्म के लगभग 6 महीने बाद संपन्न होता है।
अन्नप्राशन संस्कार का मुख्य उद्देश्य नवजात शिशु को पहली बार ठोस आहार से परिचित कराना है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार यह वह खास अवसर होता है जब बच्चे को भोजन का पहला स्वाद चखाया जाता है। इस संस्कार के बाद बच्चा केवल मां के दूध पर निर्भर नहीं रहता, बल्कि ठोस भोजन ग्रहण करना शुरू कर देता है।
यह संस्कार अत्यंत शुभ और महत्वपूर्ण माना जाता है, क्योंकि यह शिशु के जीवन में पोषण, स्वास्थ्य और समृद्धि की शुरुआत का प्रतीक है। समारोह के दौरान अक्सर हवन या यज्ञ का आयोजन किया जाता है, जिसमें बच्चे के अच्छे स्वास्थ्य और उज्जवल भविष्य की कामना की जाती है। अंत में, बच्चे को पहली बार अन्न का सेवन कराया जाता है, जो उसकी खुशहाली और समृद्धि का प्रतीक होता है।
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अन्नप्राशन संस्कार के लिए शुभ तिथि और मुहूर्त तय करने के बाद सबसे पहले घर की पूरी सफाई और शुद्धिकरण करना जरूरी होता है। उसके बाद नवजात शिशु के माता-पिता स्नान करके नए कपड़े पहनते हैं और शिशु को भी नए वस्त्र पहनाए जाते हैं, ताकि यह अवसर पूरी तरह से पवित्र और शुभ बने।
पूजा स्थल पर माता-पिता अपने बच्चे को लेकर बैठते हैं और सबसे पहले ईश्वर के सामने दीपक जलाया जाता है। इस हवन या पूजा में परिवार के सभी सदस्य शामिल होते हैं, खासकर शिशु के माता-पिता और बुजुर्गों का आशीर्वाद बेहद महत्वपूर्ण माना जाता है।
पूजा के दौरान पंडित जी उत्तर दिशा में बैठते हैं, जबकि माता-पिता शिशु को गोद में लेकर पूर्व दिशा की ओर मुख करके बैठते हैं। सबसे पहले पंडित जी शिशु को खीर खिलाते हैं, उसके बाद माता-पिता भी उसी खीर से शिशु को खिला देते हैं। इस खीर को केवल परिवार की विवाहित महिलाएँ बनाती हैं, ताकि संस्कार पूरी तरह से पारंपरिक और शुभ हो।
पूजा के अंत में परिवार के अन्य सदस्य भी शिशु को खीर खिलाते हैं और उसके उज्जवल भविष्य, स्वास्थ्य और खुशहाल जीवन की कामना करते हैं। यह संस्कार न केवल शिशु के लिए, बल्कि पूरे परिवार के लिए एक पवित्र और खुशियों भरी शुरुआत का प्रतीक होता है।
अन्नप्राशन संस्कार केवल शिशु के जीवन का ही नहीं, बल्कि माता-पिता के लिए भी एक बहुत खास अवसर होता है। हर माता-पिता यही चाहते हैं कि उनका बच्चा स्वस्थ, खुशहाल और समृद्ध जीवन व्यतीत करे। इस संस्कार के दौरान, जब शिशु को पहली बार खीर खिलाई जाती है, तो माता-पिता को कुछ खास बातों का ध्यान रखना चाहिए।
सबसे पहले, माता-पिता को अपने हृदय से ईश्वर का धन्यवाद प्रकट करना चाहिए, क्योंकि यह अनुष्ठान शिशु के जीवन में एक नया अध्याय शुरू करता है। इस अवसर पर घर और मन दोनों में शुद्धता और सकारात्मकता बनाए रखना बेहद जरूरी है। जब बच्चे को खीर खिलाई जाती है, तब माता-पिता निम्न मंत्रों का जाप कर सकते हैं, ताकि शिशु का स्वास्थ्य, समृद्धि और भविष्य उज्ज्वल बने:
ओम अन्नपूर्णायै नमः
यह मंत्र मां अन्नपूर्णा का आह्वान करता है, जो भोजन और पोषण की देवी हैं। इसे जपने से शिशु को स्वास्थ्य और समृद्धि का आशीर्वाद मिलता है।
ओम श्री महालक्ष्म्यै नमः
इस मंत्र का जाप माता लक्ष्मी की कृपा प्राप्त करने के लिए किया जाता है। यह शिशु के जीवन में धन, आर्थिक स्थिरता और खुशहाली लाने का प्रतीक है।
ओम त्र्यंबकं यजामहे सुगंधिं पुष्टिवर्धनम्
यह महामृत्युंजय मंत्र है, जो शिशु के स्वास्थ्य, दीर्घायु और सुरक्षा के लिए जपा जाता है।
शिवौ ते स्तां व्रीहीयवावबलासावदोमधौ। एतौ यक्ष्मं वि बाधेते एतौ मुंचतौ अंहस:।।
इन मंत्रों के जाप से माता-पिता अपने बच्चे के उज्ज्वल भविष्य की कामना करते हैं और ईश्वर से उसके स्वास्थ्य और खुशहाली के लिए आशीर्वाद प्राप्त करते हैं।
यह संस्कार न केवल शिशु के जीवन की शुरुआत को पवित्र बनाता है, बल्कि माता-पिता और पूरे परिवार के लिए भी खुशियों और सकारात्मक ऊर्जा का प्रतीक होता है।
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अन्नप्राशन संस्कार के बाद एक खास रिवाज होता है जिसे बहुत महत्वपूर्ण माना जाता है। इस रिवाज में शिशु के सामने कुछ वस्तुएँ रखी जाती हैं और शिशु को इनमें से किसी एक को चुनने दिया जाता है। मान्यता है कि जो वस्तु शिशु चुनता है, वह उसके भविष्य की रुचियों और संभावनाओं की ओर इशारा करती है।
इस रस्म में आमतौर पर निम्नलिखित वस्तुएँ रखी जाती हैं:
किताबें (ज्ञानार्जन): यदि शिशु किताब चुनता है, तो यह संकेत है कि उसका झुकाव शिक्षा और ज्ञान की ओर रहेगा। उसका भविष्य शैक्षणिक दृष्टि से उज्ज्वल होगा।
आभूषण (धनार्जन): अगर शिशु आभूषण चुनता है, तो इसका मतलब है कि वह धन और भौतिक समृद्धि की ओर आकर्षित रहेगा।
कलम (बुद्धि अर्जन): कलम चुनने का संकेत है कि शिशु के जीवन में बौद्धिकता और रचनात्मकता का महत्व रहेगा। वह लेखन या अन्य बौद्धिक गतिविधियों में रुचि ले सकता है।
मिट्टी (संपत्ति अर्जन): अगर शिशु मिट्टी को चुनता है, तो यह संकेत है कि वह भविष्य में जमीन, संपत्ति या स्थायी चीजों की ओर आकर्षित रहेगा।
खाने-पीने की वस्तुएँ (भोजन अर्जन): यदि शिशु खाने-पीने की वस्तुएँ चुनता है, तो इसका अर्थ है कि उसे जीवन में स्वादिष्ट भोजन और भोजन से जुड़ी चीजों का आनंद मिलेगा।
यह रिवाज न केवल पारंपरिक रूप से महत्वपूर्ण है, बल्कि शिशु के भविष्य की संभावनाओं और रुचियों को जानने का एक प्यारा और रोचक तरीका भी माना जाता है।