बहुजन समाज पार्टी (BSP)

बहुजन समाज पार्टी (BSP)


समाज सुधारक कांशीराम ने 14 अप्रैल 1984 को बहुजन सामाज पार्टी की स्थापना की। इस दल का मुख्य उद्देश्य समाज के दबे कुचले लोगों को उनका अधिकार दिलाना था। जिसके लिए दल ने देश भर में सवर्णों के खिलाफ कई आंदोलन व सभाएं कर दलितों पर हो रहे अत्याचार को राजनीतिक रूप से सबके सामने रखा। कांशीराम के नेतृत्व में दल ने देश भर में सदियों से चले आ रहे मनुवाद सिद्धांत का जमकर विरोध किया। जिसके चलते 1991 तक बीएसपी के संस्थापक व अध्यक्ष कांशीराम बहुजन समाज में अपनी पकड़ बना चुके थे। जिसके बाद पहली बार 1991 में कांशीराम इटावा लोकसभा सीट से चुनाव जीतकर संसद गए। दूसरी बार वे 1996 में होशियारपुर से जीतकर लोकसभा पहुंचे। मायावती संगठन में शुरूआत से ही थीं और कांशीराम की बेहद विश्वसनीय भी, जिसके चलते 1995 में बसपा की प्रमुख मायावती बनी। मायावती के नेतृत्व में 13वें लोकसभा चुनाव में दल का प्रदर्शन अच्छा रहा। दल के कुल 14 उम्मीदवार चुनाव जातें। यह संख्या चुनाव दर चुनाव बढ़ता गया। 14वें लोकसभा में 17 और 15वें लोकसभा में यह संख्या बढ़कर 21 हो गई। वर्तमान में यानि की 16वीं लोकसभा में बसपा का कोई प्रतिनिधि सदन में नहीं है। बसपा का सबसे ज्यादा राजनीतिक आधार उत्तर प्रदेश में है और दल ने प्रदेश में कई बार अन्य दलों के समर्थन से सरकार भी बनाई है। मायावती 1995 से अब तक पार्टी की प्रमुख हैं। 2019 लोकसभा चुनाव में बहुजन समाज पार्टी के लिए कैसा रहने वाला है। आइए जानते हैं बसपा की सूर्य कुंडली का आकलन कर एस्ट्रोयोगी एस्ट्रोलॉजर का क्या कहना है।

2019 लोकसभा चुनाव के बारे में क्या कहती है बहुजन समाज पार्टी की कुंडली?


संगठन नाम – बहुजन समाज पार्टी (बसपा)
स्थापना तिथि – 14 अप्रैल 1984

बसपा की सूर्य राशि मेष है। वर्तमान में दशा राहु की चल रही है। अंतरदशा में शुक्र व प्रत्यंतर दशा में बुध का विचरण हो रहा है। जो बसपा के लिए शुभ संकेत तो दे रहा है, लेकिन जोश का कारक मंगल बसपा की पत्रिका में बारहवें भाव में बैठकर एक अंगारक योग बना रहा है। जिसके यह संकेत है कि दल जोश के साथ अपना चुनावी आगाज तो करेगा, लेकिन अंगारक योग का प्रभाव मतलब अच्छे के साथ बुरा बरताव करने के कारण धन का अपव्यय व दल में मतभेद का करण भी बन सकता है। क्योंकि राशि का स्वामी उच्च का होने के बावजूद एक योगकारी ग्रह बना हुआ है। भाग्य और कर्म का स्वामी सूर्य बुध त्रिकोण में बुध आदित्य योग बना रहे हैं। जिससे बसपा भी चुनावी रण को और रोमांचक बनाने में अपना योगदान देगी। लेकिन सूर्य का शून्य डिग्री पर होना जोश में होश खोने का कारक भी बन सकता है। संगठन को अपने ऊपर भरोसा होने के बाद भी ग्रहों का साथ न मिलने के कारण पराजय का सामना करना पड़ सकता है। कुंडली में तीन-तीन ग्रह वक्री होकर बैठे हैं। जो संघर्ष भी कराएंगे और अंत में हार का सामना भी करवा सकते हैं। क्योंकि 2019 लोकसभा चुनाव के समय बसपा की दशाओं में, राहु की महादशा, शुक्र की अंतरदशा और केतु की प्रत्यंतर दशा चलेगी। जिसके कारण अप्रैल 2019 से अगस्त 2019 तक का समय संघर्षमय व मन चंचल बना रहेगा। किसी भी दल पर पूर्ण विश्वास नहीं होगा। लेकिन पराक्रम का स्वामी उच्च का हो गया है जो पराक्रम में वृद्धि करवाएगा। जोश व होश के साथ पार्टी आगे बढ़ेगी। आगे बढ़ने में पराक्रम का स्वामी भी सहयोग करेगा। लेकिन वक्री होने के कारण बढ़ते कदमों को रोकने का काम भी पराक्रम का स्वामी शनि ही करेगा। राहु उच्च का होने के कारण दशा में चल रहा है जो दल का साथ दे रहा है। बृहस्पति का केंद्र में आने से कुछ अनुभवी नेताओं के कारण दल गलत फैसले लेने से बचेगा। भाग्य पर शनि की दृष्टि पड़ रही है जिससे भाग्य साथ नहीं कर पा रहा है। कर्म का साथ रहेगा, लेकिन अंत समय में भाग्य का साथ न मिलने से अपयश का सामना करना पड़ सकता है। कुल मिलाकर 2019 का चुनावी रण बसपा को मिला-जुला परिणाम देगा।

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2019 लोकसभा चुनाव की प्रेडिक्शन

2019 लोकसभा चुनाव की घोषणा के बाद आगामी देढ़ माह में चुनावी प्रचार के दौरान नेताओं द्वारा शक्ति का खूब प्रदर्शन किया जाना है। चुनावी सभाओं में भाषण व बयानबाजी से मतदाताओं का ध्यान अकर्षित करने का प्रयास भी किया जाएगा। इस दौरान कई वादे किए जाएंगे और नेता अपनी उपलब्धि व कामों को जनता के सामने पेश करेंगे। सातों चरणों के मतदान पूरा होने तक खूब...

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