तृणमूल कांग्रेस (TMC)

तृणमूल कांग्रेस (TMC)


2019 लोकसभा चुनाव में तीसरे मोर्चे की अगुआई करने वाला दल सर्वभारतीय तृणमूल कांग्रेस की स्थापना 1 जनवरी 1998 को हुई थी। वर्तमान में टीएमसी सदन में चौथी बड़ी पार्टी है। सर्वभारतीय तृणमूल कांग्रेस की स्थापना ममता बनर्जी ने भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस से विघटित होकर की थीं। विघटन का कारण ममता बनर्जी का वो बयान था जिसमें उन्होंने कांग्रेस पर बंगाल में सीपीएम की कठपुतली होने का आरोप लगाया था। जिसके बाद टीएमसी संस्थापक ममता बनर्जी 1997 में कांग्रेस से अलग हो गई। गठन के बाद हुए 1998 के लोकसभा चुनाव में तृणमूल कांग्रेस अपने बल पर 8 सीटें जीतने कामयाब हुई। जिसके बाद दल ने कभी पीछे मुड़कर नहीं देखा। 2001 राज्य विधानसाभा चुनाव में दल ने बेहतरीन प्रदर्शन किया। इस चुनाव में टीएमसी 60 सीटें जीतने में सफल हुई और राज्य की दूसरी बड़ी पार्टी बन गई। 2011 पश्चिम बंगाल राज्य विधानसभा चुनाव में ममता के नेतृत्व में टीएमसी ने पश्‍चि‍म बंगाल में 34 वर्षों से सत्ता पर काबिज वामपंथी मोर्चे का सफाया कर दिया। विधानसभा चुनाव में भारी बहुमत के साथ ममता ने जीत हासिल की और राज्य की मुख्यमंत्री बनी। दल ने राज्‍य विधानसभा की 294 सीटों में से 184 पर कब्‍जा किया। वर्तमान में तृणमूल कांग्रेस के लोकसभा में कुल 34 सांसद हैं। ऐसे में 2019 लोकसभा चुनाव में टीएमसी की अहम भूमिका रहने वाली है। आइए जानते है तृणमूल कांग्रेस की सूर्य कुंडली का आकलन कर एस्ट्रोयोगी एस्ट्रोलॉजर ने दल के लिए क्या संकेत दिए हैं।

2019 लोकसभा चुनाव के बारे में क्या कहती है तृणमूल कांग्रेस की कुंडली?


संगठन नाम – तृणमूल कांग्रेस (TMC)
स्थापना तिथि – 1 जनवरी 1998

टीएमसी की सूर्य राशि मकर है। मकर का स्वामी शनि त्रिकोण होकर केंद्र में बैठा है जो दल के लिए शुभ संकेत है। वर्तमान में इस संगठन पर राहु की दशा चल रही है जो शुभता के साथ पराजय का भी कारण बन सकती है। चार ग्रहों के एक साथ बैठना एक चतुर्थग्रही योग बना रहा है जो दल के लिए शुभ संकेत है। 2019 के चुनावी महासमर में तृणमूल कांग्रेस का बर्चस्व रहेगा। साथ ही पराक्रम का स्वामी मंगल उच्च का होकर एक योगकारी बन गया है। जो इस दल के अंदर जोश में कमी नहीं होने देगा। आत्मविश्वास का कारक सूर्य केंद्र में बैठकर करियर को देख रहा है जो शुभ संकेत हो सकता है लेकिन इस पर शनि की दृष्टि होने के कारण दृष्टिपात बन रहा है। जो शुभ प्रभाव नहीं देगा। वाणी का कारक पत्रिका में शुक्र है जो वक्री होकर वृद्ध अवस्था में बैठा हुआ है, जो वाणी को दूषित करेगा। वाणी के कारण ही समाज में दल के प्रति नकारात्मक भाव पैदा होगा जिसके कारण मतदाता दल से दूरी बना सकते हैं। धन का भी इस चुनावी रण में बहुत अपव्यय होगा। लग्न में विषभाव होने के कारण दल में सफलता के प्रति शंका बनी रहेगी। दल में ही कुछ समय बाद मतभेद बनेंगे। 2019 लोकसभा चुनाव के दौरान भाग्य पार्टी का साथ नहीं देगा। राहु की महादशा, शनि की अंतरदशा और सूर्य की प्रत्यंतर दशा चलने के कारण पार्टी के भीतर विरोध का योग बनेगा। जिसके चलते दल में तनाव का माहौल बन सकता है। गोचर में बृहस्पति का केंद्र में आने से दल को कुछ अनुभवी नेताओं का साथ मिलेगा। लेकिन चंद्रमा का विचरण राहु के साथ होने के कारण सभी के मन में संदेह बना रहेगा। नवांश में करियर का स्वामी मंगल का बारहवें भाव में विचरण करना शुभ संकेत नहीं दे रहा है। नवांश में पराक्रम के स्थान में चंडाल योग बन रहा है जो किन्हीं बातों के चलते दल में तनाव बढ़ा सकता है। इस साल के लिए दल के कार्यक्षेत्र के स्वामी सहयोग तो कर रहे हैं लेकिन कार्यक्षेत्र पर शनि की दृष्टि पड़ने से कार्यक्षेत्र में अच्छा फल नहीं मिलेगा।

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2019 लोकसभा चुनाव की प्रेडिक्शन

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