ममता बनर्जी

ममता बनर्जी


2019 लोकसभा चुनाव में तीसरा मोर्चा खड़ा करने की पहल में अग्रणी भूमिका निभाने वाली ममता बनर्जी जिन्हें पश्चिम बंगाल में दीदी कहकर संबोधित किया जाता है। ये वर्तमान में पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री और राजनीतिक दल तृणमूल कांग्रेस की प्रमुख हैं। 5 जनवरी 1955 को कोलकाता में जन्‍मी ममता केंद्र में दो बार रेल मंत्री रह चुकी हैं। साथ ही इन्‍हें देश की पहली महिला रेल मंत्री बनने का गौरव प्राप्‍त है। ममता ने अपनी सक्रिय राजनीतिक सफर की शुरूआत सन 1970 में कीं, जब वे भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस की कार्यकर्ता बनीं। 1976 से 1980 तक वे महिला कांग्रेस की महासचिव रहीं और 1984 में ममता बनर्जी ने मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी (सीपीएम) के कद्दावर वरिष्ठ नेता सोमनाथ चटर्जी को जादवपुर लोकसभा सीट से हराया, जिसके बाद इन्हें देश की सबसे युवा सांसद बनने का गौरव प्राप्त हुआ। लेकिन 1997 में वे उन्होंनें कांग्रेस पर बंगाल में सीपीएम की कठपुतली होने का आरोप लगाते हुए उससे अलग होने का फैसला ले लिया। 1 जनवरी 1998 को उन्होंने अखिल भारतीय तृणमूल कांग्रेस का गठन किया इसकी संस्थापक व अध्यक्ष बनीं। इसके बाद 1998 के लोकसभा चुनाव में टीएमसी ने 8 सीटों पर जीत हासिल की। इतना ही नहीं एनडीए सरकार में रेल मंत्री बनीं। भारत की पहली महिला रेल मंत्री, कोयला मंत्री होने का गौरव भी इन्हें प्राप्त है। 2009 में वे राजग सरकार में एक बार फिर से रेल मंत्री बनीं। लेकिन इसके बाद 2011 में पश्चिम बंगाल में हुए विधानसभा चुनावों में उन्होंने 34 सालों से मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी (सीपीएम) के नेतृत्व वाले लेफ्ट फ्रंट को हराकर पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री बनीं।
पिछले कुछ समय से देखा जाये तो पश्चिम बंगाल में ममता की लोकप्रियता में कमी आ रही है और उन पर निरकुंशता के आरोप लग रहे हैं। रोज वैली और शारदा चिटफंड घोटाले को लेकर भी ममता बनर्जी पर भ्रष्टाचार के आरोप हैं। बीजेपी का प्रभाव भी धीरे-धीरे राज्य में बढ़ रहा है। वामपंथी पार्टियां एक बार फिर नई ऊर्जा के साथ ममता पर लगतार हमलावर हो रही हैं। ऐसे में ममता बनर्जी के लिये 2019 के लोकसभा चुनाव काफी चुनौतिपूर्ण रहने वाले हैं। उनके लिये यह समय कैसा रहने वाला है? इसके लिये एस्ट्रोयोगी एस्ट्रोलॉजर्स ने ममता की जन्मपत्रिका का आकलन किया है। आइए जानते हैं, 2019 के लोकसभा चुनाव में दीदी के लिए ग्रह क्या संकेत कर रहे हैं?

2019 लोकसभा चुनाव के बारे में क्या कहती है ममता बनर्जी की कुंडली?



नाम – ममता बनर्जी
जन्म तिथि – 5 जनवरी 1955
जन्म स्थान– कोलकाता
जन्म समय – 7 बजे शाम

ममता बनर्जी की पत्रिका मकर लग्न और वृषभ राशि की है। ममता का जन्म कृतिका नक्षत्र के तीसरे चरण में हुआ है। वर्तमान में इन पर शनि की महादशा और सूर्य की अंतरदशा तथा प्रत्यंतर दशा में राहु चल रहे हैं। चूंकि यह दशा व्यक्ति को चमकाने का काम करती है। इसलिए ममता को थोड़ी ख्याती मिलेगी। पत्रिका में शनि भी लग्न का स्वामी है जो कार्यक्षेत्र में उच्च का होकर बैठा है, यह व्यक्ति को मान सम्मान और कर्यक्षेत्र में चमकाने का काम करता है। 16 अप्रैल 2019 से इनकी दशा में बृहस्पति का आगमन हो रहा है, जो ममता की सेहत पर बुरा प्रभाव डाल सकता है। साथ ही धन की हानि की भी संभावनाएं बन रही हैं। ममता की पत्रिका में चंद्रमा उच्च का होकर पंचम भाव में बैठा है जो इनके मन को दृढ़ बनाने का कार्य करेगा। चूंकि लग्न का स्वामी शनि है जो विरोधी भाषण के बावजूद ख्याती दिलाने में सहायता कर सकता है। लेकिन शनि अगर इनको ख्याती दिला रहा है तो सूर्य इसे दबाने का भी कार्य करेगा, क्योंकि सूर्य, कुंडली में राहु के साथ बैठा है और ग्रहण योग बना रहा है। इसलिए इस समय सूर्य की भूमिका से पत्रिका में नकारात्मक योग बन रहा है। ममता की कुंडली में बुध भाग्य का स्वामी है जो बुद्धि का भी कारक होता है वह बारहवें भाव में धनु राशि में बैठा है जो ममता की वाणी को दूषित करेगा और 2019 के चुनावी सभाओं में जनता को आकर्षित करने में असफल बनाएगा। बुध के बारहवें भाव में होने से ममता को अपने करीबियों से धोखा मिल सकता है। देखें तो 2019 लोकसभा चुनाव में ममता का बर्चस्व तो रहेगा लेकिन अंत में इन्हें इनके सहयोगियों द्वारा ही झटका लगेगा। शनि सूर्य के साथ बृहस्पति के प्रत्यंतर दशा में आने से बुद्धि भ्रमित करेगा और ममता की पत्रिका में गुरू वक्री होकर मृत अवस्था में बैठा है जो इन्हें पराजय की ओर ले जाएगा।

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2019 लोकसभा चुनाव की प्रेडिक्शन

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