भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस (कांग्रेस)

भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस (कांग्रेस)


कांग्रेस की स्थापना ब्रिटिश राज में 28 दिसंबर 1885 को ए ओ ह्यूम, दादा भाई नौरोजी और दिनशा वाचा ने की। 1885 से महात्मा गांधी के भारत आगमन तक कांग्रेस कुलीन वर्ग संस्था बनी रही, परंतु गांधीजी के भारत आगमन के बाद कांग्रेस में कई बदलाव हुए। गांधीजी के कांग्रेस महासचिव बनने के बाद कांग्रेस कुलीन वर्ग संस्था से जनसमुदाय संस्था बन गई और अहिंसा से स्वराज के मार्ग पर निकल पड़ी। कई आंदेलनों और सत्याग्रह के चलते देश को अंग्रेजों से आजादी मिली। आजादी के बाद महात्मा ने कांग्रेस को भंग करने की बात कही, लेकिन किन्हीं कारणों के चलते ऐसा न हो सका। 1947 में कांग्रेस स्वतंत्र भारत की प्रमुख राजनीतिक दल बन गई। आज़ादी से लेकर 2014 तक, 16 आम चुनावों में से, कांग्रेस ने 6 लोकसभा चुनाव में पूर्ण बहुमत हासिल कर अपनी सरकार बनायी और 4 में कांग्रेस ने सत्तारूढ़ गठबंधन का नेतृत्व किया। भारत में स्वतंत्रता के बाद कांग्रेस के सात प्रधानमंत्री रह चुके हैं, कांग्रेस के सबसे पहले प्रधानमंत्री पं. जवाहरलाल नेहरू थे। लाल बहादुर शास्त्री के बाद इंदिरा गांधी प्रधानमंत्री बनीं। इंदिरा ने आपातकाल के बाद 2 जनवरी 1978 को भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस का पुनर्गठन किया। 2014 से पूर्व डॉ. मनमोहन सिंह देश के पीएम थे। लेकिन 2014 के लोकसभा चुनाव में कांग्रेस ने आज़ादी से अब तक का सबसे ख़राब चुनावी प्रदर्शन किया और 543 सदस्यीय लोकसभा में केवल 44 सीटें ही पार्टी जीत सकी। 2014 में मोदी लहर के आगे कांग्रेस धराशायी हो गई। 2014 से 2017 तक कांग्रेस के हाथ से एक–एक कर कई राज्य निकलते गए और कांग्रेस के राजनीतिक अस्तित्व पर खतरा मंडराने लगा। इस बीच कांग्रेस में बड़ा परिवर्तन हुआ, श्रीमती सोनिया गांधी की कांग्रेस के अध्यक्ष पद से विदाई हो गई और उनके स्थान पर उन्हीं के सुपुत्र राहुल गांधी को सर्व सहमती से भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस का अध्यक्ष निर्वाचित कर दिया गया। कुछ मुश्किलों का सामना करने के बाद एक बार फिर कांग्रेस का अस्त हुआ सूर्य उदय हुआ और 2018 में हुए जांच राज्यों के विधानसभा चुनाव में कांग्रेस पांच राज्यों में से तीन में अपनी सरकार बनाने में सफल हुई। 2019 के लोकसभा चुनाव का चुनावी बिगुल बज चुका है और कांग्रेस चुनावी तैयारियों में जुट चुकी है। ऐसे में कांग्रेस की पुनर्गठन तिथि के आधार पर एस्ट्रोयोगी एस्ट्रोलॉजर ने कांग्रेस की कुंडली का आकलन कर 2019 आम चुनाव कांग्रेस के लिए कैसा रहने वाला है, इसके संतेक दिए हैं।

2019 लोकसभा चुनाव के बारे में क्या कहती है कांग्रेस की कुंडली?


संगठन नाम – भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस (INC)
पुनर्गठन तिथि – 2 जनवरी 1978
जन्म समय – 11:59 सुबह
स्थान – दिल्ली

भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस के पुनर्गठन तिथि के आधार पर बनी पत्रिका के अनुसार कांग्रेस मीन लग्न और कन्या राशि की है। वर्तमान में कांग्रेस पर बृहस्पति की महादशा और शुक्र की अंतरदशा चल रही है, जो कि कांग्रेस से सफलता के लिए अधिक परिश्रम करवाएगी। इसके साथ ही योगनी महादशा मंगल की चल रही है। पत्रिका के अंदर मंगल के नीच राशि का होने से काम बनाने में देरी और इसके लिए अधिक संघर्ष करना पड़ सकता है। कांग्रेस की कुंडली के चौथे भाव में गुरू के होने से कभी-कभी अचानक से सफलता मिलती है। जो कि हम ने हालही में हुए पांच राज्यों के चुनाव में देखा। परंतु बृहस्पति और राहु का गोचर आने-वाले लोकसभा चुनाव 2019 में सफलता के लिए कांग्रेस से अधिक परिश्रम करवा सकता है। चूंकि वर्तमान में कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी हैं जिन पर उनके कुंडली के अनुसार राहु की महादशा और शनि की साढ़े साती चल रही है और कांग्रेस पर भी शनि की ढैय्या चल रही है जो कष्टकारक और समय-समय पर सफलता में अचानक रूकावटें पैदा करती हैं। राहुल पर राहु की दशा और कांग्रेस पर गुरू की दशा चल रही हैं जो दोनों ही असमान हैं। यह असमानता कांग्रेस के प्रति आम जन मानस में अरूचि की भावना पैदा कर सकती है। लेकिन शनि का विपक्ष के स्थान पर होना कांग्रेस को अपने विराधियों को चुनौती देने में सक्षम बनाएगा। यानि की लोकसभा चुनाव 2019 में कांग्रेस से बीजेपी को कुछ चुनौतियों का सामना करना पड़ सकता है। कुल मिलाकर आम चुनाव 2019 में कांग्रेस को मिले-जुले परिणाम मिल सकते हैं।

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2019 लोकसभा चुनाव की प्रेडिक्शन

2019 लोकसभा चुनाव की घोषणा के बाद आगामी देढ़ माह में चुनावी प्रचार के दौरान नेताओं द्वारा शक्ति का खूब प्रदर्शन किया जाना है। चुनावी सभाओं में भाषण व बयानबाजी से मतदाताओं का ध्यान अकर्षित करने का प्रयास भी किया जाएगा। इस दौरान कई वादे किए जाएंगे और नेता अपनी उपलब्धि व कामों को जनता के सामने पेश करेंगे। सातों चरणों के मतदान पूरा होने तक खूब...

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