अन्नपूर्णा जयंती 2026 - Annapurna Jayanti 2026

bell iconShare

Annapurna Jayanti 2026: मार्गशीर्ष मास की पूर्णिमा को मनाई जाने वाली अन्नपूर्णा जयंती में मां अन्नपूर्णा और भगवान शिव की उपासना का विशेष महत्व माना जाता है। इस दिन उनके पूजन से अन्न-वृद्धि, सुख-समृद्धि और घर में सदैव भरपूरता बनी रहने का आशीर्वाद प्राप्त होता है। श्रद्धालु इस पूर्णिमा का इंतजार करते हैं और पूरे भक्तिभाव के साथ माता की आराधना करते हैं। घरों में खास व्यंजन बनाए जाते हैं, देवी को भोग लगाया जाता है और फिर परिवार एक साथ प्रसाद ग्रहण करता है।

एस्ट्रोयोगी ऐप पर एस्ट्रोलॉजर्स से कंसल्ट करना एकदम आसान है। अभी ऐप डाउनलोड करें और एक सरल और सहज अनुभव का आनंद लें।

अन्नपूर्णा जयंती 2026 की तिथि (Annapurna Jayanti 2026 Dates)

अन्नपूर्णा जयंती इस वर्ष बुधवार, 23 दिसंबर 2026 को मनाई जाएगी।

  • पूर्णिमा तिथि प्रारम्भ: 23 दिसम्बर 2026, सुबह 10: 47 बजे

  • पूर्णिमा तिथि समाप्त: 24 दिसम्बर 2026, सुबह 06:57 बजे

भोजन से जुड़ी गलतियां जिनसे बचना चाहिए

बड़ों का यह कहना है कि भोजन का अपमान करने से देवी अन्नपूर्णा अप्रसन्न हो जाती हैं, जिससे घर में अन्न-वृद्धि रुक सकती है। इसलिए हमेशा अपनी थाली में उतना ही भोजन लें, जितना आप आसानी से पूरा कर सकें, ताकि अन्न व्यर्थ न जाए।

थाली में बचा हुआ जूठा भोजन छोड़ना भी अशुभ माना जाता है। इसके अलावा दहलीज पर बैठकर खाना खाना भी निषिद्ध बताया गया है, क्योंकि यह देवी का अपमान माना जाता है।

रसोई से जुड़े आवश्यक वास्तु नियम

वास्तु शास्त्र में रसोई की व्यवस्था को बहुत महत्वपूर्ण माना गया है। अग्नि और जल—ये दोनों तत्व एक-दूसरे के विपरीत माने जाते हैं। इसलिए चूल्हा (अग्नि) और सिंक (जल) को पास-पास रखना वास्तु दोष उत्पन्न कर सकता है। इन्हें उचित दूरी पर रखने से घर में सकारात्मक ऊर्जा बनी रहती है।

अन्नपूर्णा जयंती 2026 की पूजा विधि (Annapurna Jayanti 2026 Puja Vidhi)

  • प्रातः स्नान कर स्वच्छ वस्त्र धारण करें।

  • पूजा स्थल की सफाई करें और गंगाजल का छिड़काव कर शुद्धिकरण करें।

  • रसोई में चूल्हे को साफ कर उस पर हल्दी, कुमकुम, चावल, पुष्प और धूप अर्पित करें।

  • शिव और पार्वती की संयुक्त वेदी तैयार करें।

  • अक्षत, पुष्प और बने हुए भोजन का भोग चढ़ाएं।

  • मां अन्नपूर्णा से अन्न-संपन्नता और सदैव बरकत की कामना करें।

  • अंत में देवी की आरती करें।

  • श्रद्धा अनुसार गरीबों को भोजन, कपड़े या जरूरत की वस्तुएं दान करें।

क्यों लिया पार्वती जी ने अन्नपूर्णा का रूप?

स्कंदपुराण और शिवपुराण के अनुसार एक बार भगवान शिव ने कहा कि संसार की हर चीज़ माया है, यहां तक कि अन्न भी। यह सुनकर माता पार्वती ने समस्त अन्न को पृथ्वी से विलुप्त कर दिया। इसके परिणामस्वरूप हर जीव संकट में आ गया और धरती पर अन्न का अभाव हो गया।

तब शिवजी को अपनी भूल का एहसास हुआ और उन्होंने पार्वती से क्षमा मांगी। उसी क्षण माता पार्वती अन्नपूर्णा देवी के स्वरूप में प्रकट हुईं और वाराणसी में रहकर लोगों को अन्न प्रदान किया। तभी से मार्गशीर्ष पूर्णिमा को अन्नपूर्णा जयंती के रूप में मनाने की परंपरा शुरू हुई।

प्रतिदिन जप करने योग्य मंत्र

मां अन्नपूर्णा की कृपा प्राप्त करने के लिए ब्रह्म मुहूर्त या संध्या के बाद रसोई में बैठकर नीचे दिए मंत्र का जप करना अत्यंत फलदायी माना गया है। आप इसे 11, 21, 51 या 108 बार जप सकते हैं—

अन्नपूर्णे सदा पूर्णे शंकरप्राणवल्लभे।
ज्ञान वैराग्य-सिद्ध्यर्थं भिक्षां देहि च पार्वति।।
माता च पार्वती देवी पिता देवो महेश्वरः।
बान्धवाः शिवभक्ताश्च स्वदेशो भुवनत्रयम्।।

किसी भी ज्योतिषीय मार्गदर्शन के लिए अभी संपर्क करें एस्ट्रोयोगी के बेस्ट एस्ट्रोलॉजर से। पहला कंसल्टेशन आपके लिए मुफ्त है।

bell icon
bell icon
bell icon
सरस्वती बलिदान
सरस्वती बलिदान
Sunday, October 18, 2026
Paksha:शुक्ल
Tithi:अष्टमी
दुर्गा पूजा
दुर्गा पूजा
Monday, October 19, 2026
Paksha:शुक्ल
Tithi:नवमी
सन्धि पूजा
सन्धि पूजा
Monday, October 19, 2026
Paksha:शुक्ल
Tithi:नवमी
महा नवमी
महा नवमी
Monday, October 19, 2026
Paksha:शुक्ल
Tithi:नवमी
सरस्वती विसर्जन
सरस्वती विसर्जन
Monday, October 19, 2026
Paksha:शुक्ल
Tithi:नवमी
आयुध पूजा
आयुध पूजा
Tuesday, October 20, 2026
Paksha:शुक्ल
Tithi:नवमी

अन्य त्यौहार

Delhi- Sunday, 18 October 2026
दिनाँक Sunday, 18 October 2026
तिथि शुक्ल अष्टमी
वार रविवार
पक्ष शुक्ल पक्ष
सूर्योदय 6:24:5
सूर्यास्त 17:49:5
चन्द्रोदय 13:6:33
नक्षत्र उत्तराषाढ़ा
नक्षत्र समाप्ति समय 39 : 39 : 22
योग सुकर्मा
योग समाप्ति समय 23 : 56 : 19
करण I विष्टि
सूर्यराशि तुला
चन्द्रराशि धनु
राहुकाल 16:23:28 to 17:49:06
आगे देखें

पूजा विधियां

एस्ट्रो लेख और देखें
और देखें