Annapurna Jayanti: मार्गशीर्ष मास की पूर्णिमा को मनाई जाने वाली अन्नपूर्णा जयंती में मां अन्नपूर्णा और भगवान शिव की उपासना का विशेष महत्व माना जाता है। इस दिन उनके पूजन से अन्न-वृद्धि, सुख-समृद्धि और घर में सदैव भरपूरता बनी रहने का आशीर्वाद प्राप्त होता है। श्रद्धालु इस पूर्णिमा का इंतजार करते हैं और पूरे भक्तिभाव के साथ माता की आराधना करते हैं। घरों में खास व्यंजन बनाए जाते हैं, देवी को भोग लगाया जाता है और फिर परिवार एक साथ प्रसाद ग्रहण करता है।
अन्नपूर्णा जयंती इस वर्ष बृहस्पतिवार, 4 दिसम्बर 2025 को मनाई जाएगी।
पूर्णिमा तिथि प्रारम्भ: 3 दिसम्बर 2025, रात 09:07 बजे
पूर्णिमा तिथि समाप्त: 4 दिसम्बर 2025, शाम 05:13 बजे
4 दिसम्बर को भद्रा भी रहने वाली है।
भद्रा काल: सुबह 08:37 से शाम 06:40 तक
चूंकि इस दिन भद्रा स्वर्ग लोक में विराजमान रहेगी, इसलिए शुभ कार्य करने में कोई बाधा नहीं मानी जाती।
राहुकाल: दोपहर 01:29 से दोपहर 02:48 तक
इस दिन कई गृहणियां व्रत रखकर मां अन्नपूर्णा की विधिपूर्वक पूजा करती हैं। मान्यता है कि इस व्रत और पूजन से घर में अन्न, धन और सुख-समृद्धि की कमी कभी नहीं होती। इसी कारण से अन्नपूर्णा जयंती के मुहूर्त, विधान और महत्व को जानना अत्यंत जरूरी माना गया है।
बड़ों का यह कहना है कि भोजन का अपमान करने से देवी अन्नपूर्णा अप्रसन्न हो जाती हैं, जिससे घर में अन्न-वृद्धि रुक सकती है। इसलिए हमेशा अपनी थाली में उतना ही भोजन लें, जितना आप आसानी से पूरा कर सकें, ताकि अन्न व्यर्थ न जाए।
थाली में बचा हुआ जूठा भोजन छोड़ना भी अशुभ माना जाता है। इसके अलावा दहलीज पर बैठकर खाना खाना भी निषिद्ध बताया गया है, क्योंकि यह देवी का अपमान माना जाता है।
वास्तु शास्त्र में रसोई की व्यवस्था को बहुत महत्वपूर्ण माना गया है। अग्नि और जल—ये दोनों तत्व एक-दूसरे के विपरीत माने जाते हैं। इसलिए चूल्हा (अग्नि) और सिंक (जल) को पास-पास रखना वास्तु दोष उत्पन्न कर सकता है। इन्हें उचित दूरी पर रखने से घर में सकारात्मक ऊर्जा बनी रहती है।
प्रातः स्नान कर स्वच्छ वस्त्र धारण करें।
पूजा स्थल की सफाई करें और गंगाजल का छिड़काव कर शुद्धिकरण करें।
रसोई में चूल्हे को साफ कर उस पर हल्दी, कुमकुम, चावल, पुष्प और धूप अर्पित करें।
शिव और पार्वती की संयुक्त वेदी तैयार करें।
अक्षत, पुष्प और बने हुए भोजन का भोग चढ़ाएं।
मां अन्नपूर्णा से अन्न-संपन्नता और सदैव बरकत की कामना करें।
अंत में देवी की आरती करें।
श्रद्धा अनुसार गरीबों को भोजन, कपड़े या जरूरत की वस्तुएं दान करें।
स्कंदपुराण और शिवपुराण के अनुसार एक बार भगवान शिव ने कहा कि संसार की हर चीज़ माया है, यहां तक कि अन्न भी। यह सुनकर माता पार्वती ने समस्त अन्न को पृथ्वी से विलुप्त कर दिया। इसके परिणामस्वरूप हर जीव संकट में आ गया और धरती पर अन्न का अभाव हो गया।
तब शिवजी को अपनी भूल का एहसास हुआ और उन्होंने पार्वती से क्षमा मांगी। उसी क्षण माता पार्वती अन्नपूर्णा देवी के स्वरूप में प्रकट हुईं और वाराणसी में रहकर लोगों को अन्न प्रदान किया। तभी से मार्गशीर्ष पूर्णिमा को अन्नपूर्णा जयंती के रूप में मनाने की परंपरा शुरू हुई।
मां अन्नपूर्णा की कृपा प्राप्त करने के लिए ब्रह्म मुहूर्त या संध्या के बाद रसोई में बैठकर नीचे दिए मंत्र का जप करना अत्यंत फलदायी माना गया है। आप इसे 11, 21, 51 या 108 बार जप सकते हैं—
अन्नपूर्णे सदा पूर्णे शंकरप्राणवल्लभे।
ज्ञान वैराग्य-सिद्ध्यर्थं भिक्षां देहि च पार्वति।।
माता च पार्वती देवी पिता देवो महेश्वरः।
बान्धवाः शिवभक्ताश्च स्वदेशो भुवनत्रयम्।।






| दिनाँक | Friday, 09 January 2026 |
| तिथि | कृष्ण सप्तमी |
| वार | शुक्रवार |
| पक्ष | कृष्ण पक्ष |
| सूर्योदय | 7:15:41 |
| सूर्यास्त | 17:41:40 |
| चन्द्रोदय | 23:48:57 |
| नक्षत्र | हस्त |
| नक्षत्र समाप्ति समय | 39 : 41 : 32 |
| योग | अतिगंड |
| योग समाप्ति समय | 40 : 58 : 27 |
| करण I | बव |
| सूर्यराशि | धनु |
| चन्द्रराशि | कन्या |
| राहुकाल | 11:10:25 to 12:28:40 |