8th Day Of Navratri: नवरात्रि का आठवां दिन मां दुर्गा के आठवें स्वरूप मां महागौरी को समर्पित होता है। यह दिन शुद्धता, शांति और नई शुरुआत से जुड़ा होता है। ऐसी मान्यता है कि इस दिन मां महागौरी की उपासना करने से जीवन की सभी कठियानियाँ दूर हो जाती हैं और मन में सुकून व सकारात्मकता का एहसास होता है। अगर आप भी अपने कष्ट मिटाना चाहते हैं और जीवन में सुख-समृद्धि का मार्ग खोलना चाहते हैं तो नवरात्रि के आठवें दिन मां महागौरी की पूजा जरूर करें। विधि-विधान से पूजा करने के लिए कुछ महत्वपूर्ण बातों जैसे पूजा सामग्री, पूजा विधि, भोग, रंग और आरती के बारे में पता होना जरूरी है। तो चलिए जानते हैं नवरात्रि के आठवें दिन पूजा करने के लिए किन बातों का पता होना जरूरी है।
नवरात्रि के आठवें दिन मां दुर्गा के शांत और दिव्य स्वरूप मां महागौरी की पूजा की जाती है। मां महागौरी को पवित्रता, शांति और करुणा का प्रतीक माना जाता है। मां महागौरी का वाहन वृषभ (बैल) है और इनके चार हाथ होते हैं। एक हाथ में त्रिशूल, दूसरे में डमरू होता है, जबकि बाकी दो हाथ आशीर्वाद और वरदान देने की मुद्रा में रहते हैं।
मां महागौरी की पूजा करने से:
जीवन की परेशानियां धीरे-धीरे कम होती हैं
मन को शांति और सुकून मिलता है
रिश्तों में मधुरता और समझ बढ़ती है
नकारात्मकता दूर होकर सकारात्मकता आती है
सुख-समृद्धि और सौभाग्य का आशीर्वाद मिलता है
इस दिन मां महागौरी की सच्चे मन से पूजा करने पर जीवन में एक नई शुरुआत का एहसास होता है और व्यक्ति अंदर से हल्का और सकारात्मक महसूस करता है।
मां महागौरी की पूजा को विधि-विधान से करने के लिए कुछ खास पूजा सामग्री की आवश्यकता होती है। इन चीजों के साथ की गई पूजा अधिक प्रभावशाली मानी जाती है और भक्ति का भाव भी गहरा होता है।
पूजा के लिए जरूरी सामग्री:
मां महागौरी की मूर्ति या तस्वीर
लाल या पीला कपड़ा
कलश और नारियल
रोली, कुमकुम और अक्षत (चावल)
चंदन
दीपक और अगरबत्ती
सफेद फूल (मां महागौरी को विशेष रूप से प्रिय माने जाते हैं)
गंगाजल
फल और मिठाई
दूध और दही
शहद और घी
पंचामृत
नारियल या कोई मीठा प्रसाद
इन सभी सामग्री के साथ श्रद्धा और साफ मन से की गई पूजा मां महागौरी को प्रसन्न करती है और जीवन में सुख, शांति और समृद्धि का आशीर्वाद दिलाती है।
नवरात्रि के आठवें दिन मां महागौरी की पूजा विधि-विधान से करने पर विशेष शुभ फल मिलता है। अगर आप सरल तरीके से पूजा करना चाहते हैं, तो इस तरह कर सकते हैं:
सुबह स्नान कर साफ कपड़े पहनें और पूजा स्थान को तैयार करें: दिन की शुरुआत पवित्रता और साफ-सफाई के साथ करें, इससे मन शांत रहता है और पूजा में ध्यान लगाना आसान होता है।
कलश स्थापना करें: पूजा स्थल पर मिट्टी या तांबे का कलश पानी से भरकर रखें, उसमें आम के पत्ते लगाएं और ऊपर नारियल रखें। इसे दिव्य शक्ति का प्रतीक माना जाता है।
मां महागौरी का ध्यान करें: अब मां की मूर्ति या तस्वीर के सामने बैठकर उनका ध्यान करें और अपने जीवन में सुख, शांति और सौभाग्य की कामना करें।
तिलक और अक्षत अर्पित करें: मां को रोली, चंदन और अक्षत अर्पित करें। यह श्रद्धा और सम्मान व्यक्त करने का तरीका होता है।
फूल और माला चढ़ाएं: मां महागौरी को सफेद फूल और माला अर्पित करें। यह पवित्रता और सच्चे भाव का प्रतीक माना जाता है।
दीपक और अगरबत्ती जलाएं: पूजा के दौरान दीपक और अगरबत्ती जलाकर वातावरण को सकारात्मक और पवित्र बनाएं।
भोग अर्पित करें: मां को नारियल, फल या मिठाई का भोग लगाएं। यह सुख-समृद्धि और पूर्णता का संकेत माना जाता है।
मंत्र जाप करें: पूजा के समय मां महागौरी के मंत्रों का जाप करें, इससे मन को शांति और सकारात्मक ऊर्जा मिलती है।
अंत में आरती करें और प्रसाद बांटें: पूजा के अंत में मां की आरती जरूर करें और प्रसाद सभी में वितरित करें। इससे पूजा पूर्ण मानी जाती है और मां का आशीर्वाद मिलता है।
नवरात्रि के आठवें दिन मां महागौरी को नारियल का भोग अर्पित करना बहुत शुभ माना जाता है। नारियल को पवित्रता और समर्पण का प्रतीक माना जाता है, इसलिए इसे चढ़ाने से मां की कृपा जल्दी प्राप्त होती है।
मुख्य भोग:
नारियल
फल
मिठाई
खीर (कई जगह विशेष रूप से बनाई जाती है)
मान्यता है कि मां महागौरी को नारियल अर्पित करने से घर में सुख-शांति और समृद्धि आती है। साथ ही, यह भोग परिवार में खुशियों और संतान सुख के लिए भी शुभ माना जाता है।
नवरात्रि के आठवें दिन मां महागौरी के मंत्रों का जाप करना बहुत शुभ माना जाता है। इन मंत्रों के उच्चारण से मन को शांति मिलती है और जीवन में सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।
1. मां महागौरी बीज मंत्र
यह एक शक्तिशाली बीज मंत्र है, जिसे मां महागौरी की कृपा प्राप्त करने के लिए जपा जाता है। इसका नियमित जाप करने से सुख, समृद्धि और मानसिक संतुलन बना रहता है।
मंत्र:
श्री क्लीं ह्रीं वरदायै नमः॥
2. मां महागौरी ध्यान मंत्र
यह मंत्र मां महागौरी के शांत और दिव्य स्वरूप का वर्णन करता है। इसका जाप करते समय भक्त मां के पवित्र रूप का ध्यान करते हैं और अपने जीवन में शांति और खुशहाली की कामना करते हैं।
मंत्र:
श्वेते वृषे समारूढ़ा श्वेताम्बरधरा शुचिः।
महागौरी शुभं दद्यन्न महादेव प्रमोददा॥
जय महागौरी जगत की माया।
जया उमा भवानी जय महामाया।।
हरिद्वार कनखल के पासा।
महागौरी तेरा वहां निवासा।।
चंद्रकली और ममता अंबे।
जय शक्ति जय जय मां जगदंबे।।
भीमा देवी विमला माता।
कौशिकी देवी जग विख्याता।।
हिमाचल के घर गौरी रूप तेरा।
महाकाली दुर्गा है स्वरूप तेरा।।
सती ‘सत’ हवन कुंड में था जलाया।
उसी धुएं ने रूप काली बनाया।।
बना धर्म सिंह जो सवारी में आया।
तो शंकर ने त्रिशूल अपना दिखाया।।
तभी मां ने महागौरी नाम पाया।
शरण आनेवाले का संकट मिटाया।।
शनिवार को तेरी पूजा जो करता।
मां बिगड़ा हुआ काम उसका सुधरता।।
भक्त बोलो तो सोच तुम क्या रहे हो।
महागौरी मां तेरी हरदम ही जय हो।।
नवरात्रि के आठवें दिन मां महागौरी की पूजा के साथ पीकॉक ग्रीन (मोर हरा) या गुलाबी रंग को शुभ माना जाता है। ये दोनों रंग खुशी, उत्साह और जीवन में संतुलन का प्रतीक होते हैं।
मान्यता है कि इस दिन इन रंगों के वस्त्र पहनकर पूजा करने से मन में प्रसन्नता बनी रहती है और रिश्तों में तालमेल बेहतर होता है। अगर आप अपने जीवन में शांति और खुशियां बढ़ाना चाहते हैं, तो इस दिन इन रंगों का महत्व और भी खास हो जाता है।
इस दिन मां महागौरी की पूजा के साथ कुछ बातों का ध्यान रखना जरूरी होता है, जिससे पूजा का फल और भी बढ़ जाता है।
मां महागौरी की विधि-विधान से पूजा करें
व्रत रखें और मन को शांत रखें
मंत्रों का जाप श्रद्धा के साथ करें
कन्या पूजन (कंजक पूजन) करें
दुर्गा सप्तशती का पाठ करें
जरूरतमंदों को दान-पुण्य करें
किसी का अपमान या अनादर न करें
मन में नकारात्मक विचार न रखें
पूजा में लापरवाही न करें
तामसिक भोजन से दूर रहें
क्रोध और अहंकार से बचें
नवरात्रि का आठवां दिन शुद्धता, शांति और नई शुरुआत का प्रतीक होता है। इस दिन मां महागौरी की सच्चे मन से पूजा करने पर जीवन की परेशानियां धीरे-धीरे कम होने लगती हैं और घर में सुख-समृद्धि का वातावरण बनता है। मां की कृपा से जीवन में संतुलन और खुशियां बनी रहती हैं।
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| दिनाँक | Friday, 27 March 2026 |
| तिथि | शुक्ल दशमी |
| वार | शुक्रवार |
| पक्ष | शुक्ल पक्ष |
| सूर्योदय | 6:17:40 |
| सूर्यास्त | 18:36:43 |
| चन्द्रोदय | 13:1:29 |
| नक्षत्र | पुनर्वसु |
| नक्षत्र समाप्ति समय | 15 : 25 : 56 |
| योग | अतिगंड |
| योग समाप्ति समय | 22 : 10 : 30 |
| करण I | तैतिल |
| सूर्यराशि | मीन |
| चन्द्रराशि | कर्क |
| राहुकाल | 10:54:49 to 12:27:12 |