Holi Bhai Dooj 2026: दिवाली के बाद आने वाले भाई-बहन के खास त्योहार भाई दूज के बारे में सब जानते हैं, लेकिन क्या आप जानते हैं कि होली के बाद भी भाई दूज मनाया जाता है ? इस पर्व को होली भाई दूज के नाम से जाना जाता है। यह त्योहार प्यार, दुआओं और भरोसे से भरा होता है। इस दिन सभी बहनें अपने भाई को तिलक लगाकर उसकी लंबी उम्र और सुख-समृद्धि की कामना करती हैं। वहीं भाई अपनी बहन को जीवन भर उसकी रक्षा करने का वचन देता है।
इस पेज पर आपको होली भाई दूज से जुड़ी सभी महत्वपूर्ण जानकारी प्राप्त हो सकती है। तो चलिए जानते हैं होली भाई दूज 2026 कब है ?, इसकी सही विधि, महत्व और कथा।
अगर आप होली भाई दूज की तैयारी पहले से करना चाहते हैं, तो सही तारीख और तिथि की जानकारी होना ज़रूरी है। सही समय पर किया गया तिलक और पूजा इस पर्व को और भी शुभ बना देता है।
📅 भाई दूज होली 2026: गुरुवार, 5 मार्च 2026
🪔 शुभ अपराह्न काल: 5 मार्च 2026 को दोपहर 1:17 बजे से 3:31 बजे तक
⚠️ नोट: मुहूर्त का समय स्थान के अनुसार थोड़ा बदल सकता है। अपने शहर के अनुसार सटीक समय जानने के लिए स्थानीय पंचांग अवश्य देखें।
इस दौरान बहनें अपने भाई को तिलक लगाकर उसकी लंबी उम्र और सुख-शांति की कामना करती हैं। शुभ मुहूर्त या तिथि के भीतर किया गया तिलक विशेष फलदायी माना जाता है। इसलिए समय का ध्यान रखकर पूजा और पारंपरिक रस्में करना शुभ रहता है।
होली भाई दूज के दिन निभाई जाने वाली परंपराएँ इस त्योहार को खास और शुभ बनाती हैं। नीचे जानिए क्या करना चाहिए:
इस दिन भाई को बहन के घर जाना चाहिए, ऐसा करना बहुत शुभ माना जाता है।
बहन अपने भाई को आदर के साथ बैठाती है और धूप-दीप से उसकी आरती करती है।
इसके बाद भाई के माथे पर रोली और चावल से तिलक लगाया जाता है।
बहन भाई को फूलों की माला पहनाकर उसकी लंबी उम्र की कामना करती है।
तिलक के बाद बहन अपने हाथों से बना भोजन भाई को खिलाती है, खासतौर पर उसकी पसंद का।
भाई अपनी बहन को अपनी क्षमता के अनुसार उपहार देता है, जैसे धन, कपड़े, गहने या कोई उपयोगी वस्तु।
इन सरल परंपराओं के साथ मनाया गया होली भाई दूज भाई-बहन के रिश्ते में और भी प्यार, अपनापन और मिठास भर देता है।
होली भाई दूज का तिलक तभी पूरा फल देता है, जब इसे सही विधि और अच्छे भाव के साथ किया जाए। इस दिन कुछ खास नियमों का पालन करना शुभ माना जाता है। इन्हें आसान शब्दों में समझिए:
तिलक के समय भाई का मुख उत्तर या उत्तर-पश्चिम दिशा की ओर होना चाहिए।
वहीं बहन को पूर्व या उत्तर-पूर्व दिशा की ओर मुख करके बैठना चाहिए।
तिलक हमेशा लकड़ी की चौकी पर बैठाकर करें। खड़े होकर या कुर्सी पर बैठाकर तिलक नहीं करना चाहिए।
तिलक के साथ भाई की कलाई पर कलावा बाँधना और आरती करना शुभ माना जाता है।
तिलक हमेशा शुभ मुहूर्त में ही करना चाहिए।
तिलक से पहले बहन को भाई से कोई उपहार नहीं लेना चाहिए।
इस दिन भाई और बहन दोनों को सात्त्विक भोजन करना चाहिए।
तामसिक चीज़ों से पूरी तरह दूर रहना चाहिए।
होली भाई दूज के दिन भाई-बहन को किसी भी तरह का विवाद या बहस नहीं करनी चाहिए।
इस दिन केवल अपनी बहन ही नहीं, बल्कि दूसरों की बहनों का भी सम्मान करना चाहिए।
होली भाई दूज के पीछे एक सुंदर और भावनात्मक कथा जुड़ी हुई है, जो भाई-बहन के प्रेम को खास बनाती है। मान्यता के अनुसार, द्वितीया तिथि के दिन भगवान यम अपनी बहन यमुना से मिलने गए थे। यमुना ने अपने भाई का प्यार से स्वागत किया और पूरे आदर के साथ उनके माथे पर तिलक लगाया। इसके बाद उन्होंने भाई को मिठाइयाँ खिलाईं और उनके सुखमय जीवन की कामना की।
बहन के इस प्रेम और अपनापन से भगवान यम बहुत प्रसन्न हुए। उन्होंने यमुना को वरदान दिया कि इस दिन जो भी बहन अपने भाई को तिलक लगाएगी, उसके भाई को लंबी उम्र, सुख-शांति और अच्छे स्वास्थ्य का आशीर्वाद मिलेगा। साथ ही, ऐसे भाई को जीवन की कई परेशानियों और दोषों से भी मुक्ति मिलेगी।
यही कारण है कि होली भाई दूज के दिन तिलक लगाने की परंपरा को बहुत शुभ माना जाता है। यह कथा इस पर्व को केवल एक रस्म नहीं, बल्कि भाई-बहन के रिश्ते का सच्चा उत्सव बना देती है।
इन नियमों का पालन करने से का पर्व होली भाई दूज शांति, शुभता और सकारात्मक ऊर्जा से भर जाता है, और भाई-बहन का रिश्ता और भी मजबूत होता है।
होली भाई दूज का अपना एक खास धार्मिक और भावनात्मक महत्व है। जैसे दिवाली के बाद भाई दूज मनाई जाती है, उसी तरह होली के बाद आने वाली भाई दूज भी भाई-बहन के रिश्ते को मजबूत करने का अवसर होती है।
इस दिन बहनें अपने भाई को तिलक लगाकर उसकी लंबी उम्र और अच्छे जीवन की कामना करती हैं। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, यह तिलक भाई को कष्टों और नकारात्मक प्रभावों से बचाने वाला माना जाता है। कहा जाता है कि होली के दूसरे दिन किया गया तिलक भाई के जीवन में सुरक्षा और शांति लाता है।
होली भाई दूज सिर्फ एक परंपरा नहीं, बल्कि बहन की दुआ और भाई के विश्वास का प्रतीक है। यह पर्व रिश्तों में मिठास घोलता है और परिवार को एक साथ जोड़ने का सुंदर कारण बनता है।
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| दिनाँक | Sunday, 29 March 2026 |
| तिथि | शुक्ल द्वादशी |
| वार | रविवार |
| पक्ष | शुक्ल पक्ष |
| सूर्योदय | 6:15:21 |
| सूर्यास्त | 18:37:51 |
| चन्द्रोदय | 15:11:18 |
| नक्षत्र | अश्लेषा |
| नक्षत्र समाप्ति समय | 14 : 38 : 35 |
| योग | धृति |
| योग समाप्ति समय | 18 : 19 : 16 |
| करण I | बव |
| सूर्यराशि | मीन |
| चन्द्रराशि | कर्क |
| राहुकाल | 17:05:02 to 18:37:51 |