Masik Shivratri 2026: शिवरात्रि का नाम सुनते ही सभी शिव भक्तों का चेहरा खिल उठता है। भगवान भोलेनाथ का ध्यान करने और पूजा पाठ करने का यह एक विशेष अवसर होता है। वैसे तो साल में एक बार पड़ने वाली महाशिवरात्रि का महत्व सबसे बड़ा माना जाता है, लेकिन क्या आप जानते हैं कि हर महीने पड़ने वाली एक विशेष रात्रि को भी मासिक शिवरात्रि कहा जाता है? इस तिथि पर लाखों शिव भक्त पूरे समर्पण और श्रद्धा से व्रत रखते हैं और शिवजी की आराधना करते हैं। महाशिवरात्रि साल में एक बार मनाई जाती है, वहीं मासिक शिवरात्रि हर महीने मनाई जाती है। मासिक शिवरात्रि का पर्व आपको प्रत्येक महीना भगवान शिव की कृपा पाने का अवसर देता है। तो आइए जानते हैं साल 2026 में मासिक शिवरात्रि कब कब है ? इसके लिए उचित पूजा विधि क्या है और इसका सही महत्व क्या है।
वैदिक पंचांग के अनुसार, साल 2026 में मासिक शिवरात्रि 16 जनवरी, 15 फ़रवरी, 17 मार्च, 15 अप्रैल, 15 मई, 13 जून, 12 जुलाई, 11 अगस्त, 09 सितम्बर, 08 अक्टूबर, 07 नवम्बर, 07 दिसम्बर को पड़ेगी।
नीचे दी गई सूची में 2026 की सभी मासिक शिवरात्रियों की तिथियाँ और उनके विशेष मुहूर्त दिए गए हैं, ताकि भक्तजन पहले से तैयारी कर सकें और भगवान शिव की कृपा प्राप्त कर सकें।
मासिक शिवरात्रि - 16 जनवरी 2026, शुक्रवार, मुहूर्त: रात 12:04 बजे से 17 जनवरी रात 12:58 बजे तक।
महा शिवरात्रि - 15 फ़रवरी 2026, रविवार, मुहूर्त: रात 12:09 बजे से 16 फ़रवरी रात 01:01 बजे तक।
मासिक शिवरात्रि - 17 मार्च 2026, मंगलवार, मुहूर्त: रात 12:05 बजे से 18 मार्च रात 12:53 बजे तक।
मासिक शिवरात्रि - 15 अप्रैल 2026, बुधवार, मुहूर्त: रात 11:59 बजे से 16 अप्रैल रात 12:43 बजे तक।
मासिक शिवरात्रि - 15 मई 2026, शुक्रवार, मुहूर्त: रात 11:56 बजे से 16 मई रात 12:38 बजे तक।
अधिक मासिक शिवरात्रि - 13 जून 2026, शनिवार, मुहूर्त: रात 12:01 बजे से 14 जून रात 12:41 बजे तक।
मासिक शिवरात्रि - 12 जुलाई 2026, रविवार, मुहूर्त: रात 12:07 बजे से 13 जुलाई रात 12:47 बजे तक।
श्रावण शिवरात्रि - 11 अगस्त 2026, मंगलवार, मुहूर्त: रात 12:05 बजे से 12 अगस्त रात 12:48 बजे तक।
मासिक शिवरात्रि - 09 सितम्बर 2026, बुधवार, मुहूर्त: रात 11:55 बजे से 10 सितम्बर रात 12:41 बजे तक।
मासिक शिवरात्रि - 08 अक्टूबर 2026, बृहस्पतिवार, मुहूर्त: रात 11:44 बजे से 09 अक्टूबर रात 12:33 बजे तक।
मासिक शिवरात्रि - 07 नवम्बर 2026, शनिवार, मुहूर्त: रात 11:39 बजे से 08 नवम्बर रात 12:31 बजे तक।
मासिक शिवरात्रि - 07 दिसम्बर 2026, सोमवार, मुहूर्त: रात 11:46 बजे से 08 दिसम्बर रात 12:40 बजे तक।
हिंदू पंचांग में मासिक शिवरात्रि हर महीने कृष्ण पक्ष की चतुर्दशी तिथि यानी अमावस्या से एक दिन पहले आती है। इस दिन को भगवान शिव की उपासना और आराधना के लिए बेहद शुभ माना जाता है। साल में एक बार आने वाली महाशिवरात्रि की तरह ही यह भी खास होती है, बस फर्क इतना है कि इसे हर महीने मनाया जाता है। इसलिए इसे महाशिवरात्रि का छोटा रूप भी कहा जाता है। भक्तों का मानना है कि इस दिन व्रत और पूजा करने से पापों का नाश होता है और जीवन में सुख-समृद्धि बढ़ती है।
मासिक शिवरात्रि का व्रत बेहद पवित्र और अनुशासित माना जाता है। भक्तजन इस दिन सुबह स्नान करके पूजा स्थल की अच्छी तरह सफाई करते हैं और वहाँ भगवान शिव की मूर्ति या शिवलिंग की स्थापना करते हैं।
व्रत के नियमों के अनुसार, श्रद्धालु इस दिन निर्जला उपवास रखते हैं, जबकि कुछ केवल फल, दूध या हल्का आहार ग्रहण करते हैं।
दिन भर उपवास के बाद शाम को शिव अभिषेक किया जाता है। इसमें जल, दूध, दही, शहद और बेलपत्र अर्पित करना अत्यंत शुभ माना जाता है।
पूजन के दौरान "ॐ नमः शिवाय" मंत्र का जाप किया जाता है और शिव पुराण या भगवान शिव की कथाओं का पाठ किया जाता है। कई भक्त पूरी रात जागरण करते हैं और भन-कीर्तन तथा आरती में शामिल होकर शिव का गुणगान करते हैं।
रात्रि में दीप जलाना, फूल, फल और मिठाई अर्पित करना पूजा का आवश्यक हिस्सा है। विशेष रूप से सफेद वस्त्र, धतूरा और चंदन भगवान शिव को अर्पित करने से वे शीघ्र प्रसन्न होते हैं।
अगले दिन प्रातःकाल पूजा के पश्चात प्रार्थना करके और क्षमा याचना के बाद ही उपवास तोड़ा जाता है। यह व्रत मन और आत्मा को शुद्ध करता है तथा जीवन में सकारात्मकता और शांति का संचार करता है।
मासिक शिवरात्रि केवल एक धार्मिक अनुष्ठान भर नहीं है, बल्कि यह शिव और शक्ति के दिव्य मिलन का प्रतीक मानी जाती है। इसमें शिव चेतना का प्रतिनिधित्व करते हैं और शक्ति ऊर्जा का, और दोनों का संगम जीवन और ब्रह्मांड के संतुलन को दर्शाता है।
यह रात्रि आध्यात्मिक साधना और आत्मचिंतन के लिए अत्यंत शुभ मानी जाती है। चूँकि यह तिथि अमावस्या से एक दिन पहले आती है, जब चाँद आकाश में लगभग लुप्त हो जाता है, तो माना जाता है कि यही समय भीतर झाँकने, अनुशासन अपनाने और आत्म-परिवर्तन का सर्वोत्तम अवसर है। इस रात की साधना नकारात्मकता को दूर करके मन को शुद्ध और शांत करने में मदद करती है।
भक्तजन इस दिन व्रत रखते हैं और शिवलिंग पर जल, बेलपत्र, धूप-दीप अर्पित करके शिवजी को प्रसन्न करने का प्रयास करते हैं। मान्यता है कि मासिक शिवरात्रि का व्रत श्रद्धा और नियम से करने पर स्वास्थ्य, समृद्धि और सफलता की प्राप्ति होती है। इतना ही नहीं, यह व्रत मोक्ष की प्राप्ति का मार्ग भी खोलता है। भक्तों का विश्वास है कि सच्चे मन से की गई पूजा से जीवन की बाधाएँ दूर होती हैं और मनोकामनाएँ पूरी होती हैं।
मासिक शिवरात्रि का व्रत केवल धार्मिक दृष्टि से ही नहीं, बल्कि आध्यात्मिक और व्यक्तिगत जीवन में भी बेहद फलदायी माना जाता है।
ध्यान में मजबूती: नियमित रूप से इस व्रत का पालन करने से आत्मिक शांति, आध्यात्मिक ऊर्जा और एकाग्रता बढ़ती है। यह साधक को भीतर से मज़बूत बनाता है और उसे जीवन की चुनौतियों का सामना करने की शक्ति देता है।
अच्छा स्वास्थ्य और संपन्नता: भगवान शिव की कृपा से भक्तों को उत्तम स्वास्थ्य और परिवार में समृद्धि प्राप्त होती है। यह व्रत कठिन परिस्थितियों को आसान बनाने और मनोकामनाओं की पूर्ति का मार्ग खोलता है।
पापों से मुक्ति: श्रद्धा और विश्वास के साथ किया गया उपवास न केवल नकारात्मकता और भय को दूर करता है, बल्कि पिछले जन्मों के पाप और कर्मों के बोझ को भी हल्का करता है।
मोक्ष की प्राप्ति: मान्यता है कि मासिक शिवरात्रि का व्रत मोक्ष की प्राप्ति में सहायक है। जब कोई साधक पूरे समर्पण और अनुशासन के साथ हर महीने यह व्रत करता है, तो वह धीरे-धीरे जन्म और मृत्यु के चक्र से मुक्त होने की दिशा में अग्रसर होता है। यही कारण है कि यह व्रत भक्तों के लिए आध्यात्मिक उत्थान और दिव्य कृपा का अद्वितीय अवसर है।
मासिक शिवरात्रि केवल एक धार्मिक अनुष्ठान भर नहीं है, बल्कि यह हर महीने भगवान शिव से गहरे जुड़ने का आध्यात्मिक अवसर है। इस व्रत का पालन करने से जीवन में अनुशासन आता है, समृद्धि का मार्ग खुलता है और आत्मिक जागरण का अनुभव होता है। यही कारण है कि यह पर्व शिवभक्तों के लिए अत्यंत प्रिय और महत्वपूर्ण माना जाता है।
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| दिनाँक | Thursday, 05 March 2026 |
| तिथि | कृष्ण द्वितीया |
| वार | गुरुवार |
| पक्ष | कृष्ण पक्ष |
| सूर्योदय | 6:42:42 |
| सूर्यास्त | 18:23:51 |
| चन्द्रोदय | 20:18:5 |
| नक्षत्र | हस्त |
| नक्षत्र समाप्ति समय | 33 : 31 : 8 |
| योग | गंड |
| योग समाप्ति समय | 31 : 5 : 23 |
| करण I | गर |
| सूर्यराशि | कुम्भ |
| चन्द्रराशि | कन्या |
| राहुकाल | 14:00:55 to 15:28:33 |