रोहिणी व्रत 2026 (Rohini Vrat 2026)

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Rohini Vrat: रोहिणी व्रत आस्था और भक्ति से जुड़ा एक बहुत महत्वपूर्ण व्रत माना जाता है। यह व्रत हर माह रोहिणी नक्षत्र के दौरान रखा जाता है। इस खास दिन को जैन धर्म में भी बेहद श्रद्धा के साथ मनाया जाता है। हिंदू धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, इस दिन भगवान कृष्ण और देवी रोहिणी की पूजा-अर्चना होती है। इस पावन दिन पर श्रद्धालु अपने जीवन में सुख,शांति, समृद्धि और आध्यात्मिकता की कामना करते हैं। रोहिणी व्रत के दौरान भक्त पूजा, व्रत और नियमों का पालन पूरे श्रद्धा भाव से करते हैं। ऐसी मान्यता है कि इस व्रत को करने से साधक का वैवाहिक जीवन बेहतर होता है और उसे संतान सुख का आशीर्वाद भी प्राप्त होता है।  

अगर आप भी सालभर की रोहिणी व्रत की तिथियां जानना चाहते हैं तो यहां आपके लिए रोहिणी व्रत की पूरी लिस्ट दी गई है। इसके साथ ही यहां आपके लिए पूजा विधि, व्रत लाभ और कथा समेत सभी तरह की महत्वपूर्ण जानकारी भी उपलब्ध है।  

साल 2026 में रोहिणी व्रत की तिथियां (Rohini Vrat 2026 Date List)

साल 2026 में रोहिणी व्रत कई बार पड़ रहा है, इसलिए श्रद्धालुओं के लिए सही तिथि और रोहिणी नक्षत्र का समय जानना बहुत जरूरी है। व्रत और पूजा का शुभ फल तभी पूर्ण माना जाता है जब इसे नक्षत्र के अनुसार सही समय पर किया जाए। नीचे पूरे वर्ष की सभी तिथियां आसान तरीके से दी गई हैं, ताकि आप अपनी पूजा और व्रत की तैयारी पहले से कर सकें।

तिथि दिन रोहिणी नक्षत्र समय
1 जनवरी 2026 गुरुवार रात 1:30 बजे से रात 10:48 बजे तक
29 जनवरी 2026 गुरुवार 28 जनवरी सुबह 9:26 बजे से 29 जनवरी सुबह 7:31 बजे तक
25 फरवरी 2026 बुधवार 24 फरवरी दोपहर 3:07 बजे से 25 फरवरी दोपहर 1:38 बजे तक
24 मार्च 2026 मंगलवार 23 मार्च रात 8:49 बजे से 24 मार्च शाम 7:04 बजे तक
20 अप्रैल 2026 सोमवार सुबह 4:35 बजे से 21 अप्रैल रात 2:08 बजे तक
18 मई 2026 सोमवार 17 मई दोपहर 2:32 बजे से 18 मई सुबह 11:31 बजे तक
14 जून 2026 रविवार रात 1:16 बजे से रात 10:13 बजे तक
12 जुलाई 2026 रविवार 11 जुलाई सुबह 11:03 बजे से 12 जुलाई सुबह 8:29 बजे तक
8 अगस्त 2026 शनिवार 7 अगस्त शाम 6:43 बजे से 8 अगस्त शाम 4:51 बजे तक
4 सितंबर 2026 शुक्रवार रात 12:29 बजे से रात 11:04 बजे तक
1 अक्टूबर 2026 गुरुवार सुबह 6:02 बजे से 2 अक्टूबर सुबह 4:27 बजे तक
29 अक्टूबर 2026 गुरुवार 28 अक्टूबर दोपहर 1:26 बजे से 29 अक्टूबर सुबह 11:11 बजे तक
25 नवंबर 2026 बुधवार 24 नवंबर रात 11:25 बजे से 25 नवंबर रात 8:36 बजे तक
23 दिसंबर 2026 बुधवार 22 दिसंबर सुबह 10:45 बजे से 23 दिसंबर सुबह 7:56 बजे तक

इन सभी तिथियों में भक्त अपनी सुविधा और परंपरा के अनुसार रोहिणी व्रत 2026 का पालन कर सकते हैं। सही समय पर पूजा करने से व्रत का महत्व और भी बढ़ जाता है।

जैन समुदाय के लिए क्यों है खास रोहिणी व्रत? 

जैन धर्म में रोहिणी व्रत का विशेष धार्मिक और आध्यात्मिक महत्व माना जाता है। यह पावन व्रत मुख्य रूप से 12वें तीर्थंकर भगवान वासुपूज्य स्वामी को समर्पित होता है, इसलिए जैन श्रद्धालु इस दिन पूरे भक्ति भाव से उनकी पूजा-अर्चना करते हैं। 

इस शुभ अवसर पर व्रत रखना केवल एक धार्मिक परंपरा नहीं माना जाता, बल्कि इसे आत्मिक शुद्धि, संयम और साधना का प्रतीक भी माना जाता है। जैन समुदाय के लोग मानते हैं कि इस दिन भगवान वासुपूज्य स्वामी की आराधना करने से जीवन में सुख, सौभाग्य और सकारात्मक ऊर्जा बढ़ती है।

कैसे करें रोहिणी व्रत पर पूजा ? (Rohini Vrat Puja Vidhi)

रोहिणी व्रत 2026 की पूजा विधि धर्म परंपरा के अनुसार थोड़ी अलग हो सकती है। हिंदू और जैन, दोनों समुदायों में यह व्रत बेहद श्रद्धा से रखा जाता है। नीचे दोनों धर्म के लोगों के लिए आसान पूजा विधि दी गई है।

हिंदू धर्म और जैन धर्म में रोहिणी व्रत की पूजा विधि 

  • सुबह ब्रह्म मुहूर्त में उठकर स्नान करें और साफ वस्त्र पहनें।

  • घर के मंदिर या पूजा स्थान को अच्छी तरह साफ करें।

  • भगवान श्रीकृष्ण और मां रोहिणी की मूर्ति या तस्वीर स्थापित करें। 

  • भगवान को पीले वस्त्र, पुष्प, तुलसी दल और माखन-मिश्री अर्पित करें।

  • घी का दीपक जलाकर श्रद्धा से पूजा शुरू करें।

  • “ॐ नमो भगवते वासुदेवाय” मंत्र का कम से कम 108 बार जाप करें।

  • रोहिणी व्रत कथा पढ़ें या सुनें।

  • अंत में आरती करके प्रसाद सभी में बांटें।

जैन धर्म में रोहिणी व्रत की पूजा विधि

  • सूर्योदय से पहले उठकर घर की सफाई और शुद्धि करें।

  • गंगाजल मिले जल से स्नान करके व्रत का संकल्प लें।

  • नए या स्वच्छ वस्त्र धारण कर सूर्य देव को जल अर्पित करें।

  • इसके बाद भगवान वासुपूज्य स्वामी की पूजा करें।

  • फल, पुष्प और अन्य पूजा सामग्री अर्पित करें।

  • सुख-समृद्धि और आत्मिक शांति की प्रार्थना करें।

  • अंत में आरती के साथ पूजा पूर्ण करें।

व्रत के दौरान श्रद्धालु अपनी क्षमता के अनुसार फलाहार या निर्जला उपवास रख सकते हैं।

रोहिणी व्रत के लाभ (Rohini Vrat Labh)

  • वैवाहिक जीवन में मधुरता- यह व्रत विवाहित महिलाओं के लिए विशेष रूप से शुभ माना जाता है। मान्यता है कि इसे श्रद्धा से करने पर दांपत्य जीवन में प्रेम, सामंजस्य और परिवार में खुशहाली बनी रहती है।

  • अविवाहित लोगों के लिए विवाह के योग- जो लोग अच्छे जीवनसाथी की कामना करते हैं, उनके लिए यह व्रत लाभकारी माना जाता है। इसे करने से शीघ्र विवाह के अवसर बनने की मान्यता है।

  • धन-समृद्धि में बढ़ोतरी- रोहिणी व्रत करने से घर में आर्थिक स्थिरता आती है और सुख-सुविधाओं में बढ़ोतरी होती है। यह व्रत समृद्धि और शुभता का प्रतीक माना जाता है।

  • संतान सुख का आशीर्वाद- कई श्रद्धालु इस व्रत को संतान की खुशहाली और परिवार की तरक्की के लिए भी रखते हैं। इससे घर में सकारात्मक वातावरण बना रहता है।

  • तनाव से मुक्ति और मानसिक शांति- पूजा, मंत्र जाप और व्रत के नियमों से मन शांत होता है। इससे तनाव कम होता है और व्यक्ति के भीतर आत्मविश्वास बढ़ता है।

  • भगवान श्री कृष्ण का आशीर्वाद- इस दिन श्रद्धा से पूजा करने पर भगवान श्रीकृष्ण का विशेष आशीर्वाद मिलने की मान्यता है, जिससे जीवन में शुभ फल और आध्यात्मिक उन्नति होती है। 

रोहिणी व्रत की कथा (Rohini Vrat Katha)

हिंदू मान्यताओं के अनुसार रोहिणी व्रत कथा भक्ति, धैर्य और शुभ कर्मों के महत्व को दर्शाती है। पौराणिक कथा में चंपापुरी के राजा माधव, उनकी रानी और पुत्री रोहिणी का उल्लेख मिलता है। कहा जाता है कि रोहिणी बचपन से ही धार्मिक स्वभाव की थीं और भगवान श्रीकृष्ण तथा देवी लक्ष्मी की श्रद्धा से पूजा करती थीं। 

जब रोहिणी के जीवन में कई कठिन परिस्थितियाँ आईं, तब उन्होंने रोहिणी नक्षत्र के दिन व्रत रखकर पूरे नियम से पूजा और कथा का पाठ किया। उनकी सच्ची श्रद्धा और संयम से उनके जीवन के कष्ट धीरे-धीरे दूर होने लगे। जल्द ही उन्हें सुखी वैवाहिक जीवन, परिवार का आनंद और समृद्धि प्राप्त हुई।

इस कथा का मुख्य संदेश यह है कि जो भक्त रोहिणी व्रत को श्रद्धा, नियम और विश्वास के साथ करते हैं, उनके जीवन से बाधाएँ कम होती हैं और घर में सुख-शांति बनी रहती है। इसी कारण पूजा के समय रोहिणी व्रत कथा का पाठ करना बहुत शुभ माना जाता है।

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स्कन्द षष्ठी
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Wednesday, September 16, 2026
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गौरी आवाहन
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अन्य त्यौहार

Delhi- Wednesday, 16 September 2026
दिनाँक Wednesday, 16 September 2026
तिथि शुक्ल षष्ठी
वार बुधवार
पक्ष शुक्ल पक्ष
सूर्योदय 6:6:51
सूर्यास्त 18:25:45
चन्द्रोदय 10:59:41
नक्षत्र अनुराधा
नक्षत्र समाप्ति समय 43 : 54 : 5
योग विष्कुम्भ
योग समाप्ति समय 36 : 49 : 11
करण I कौलव
सूर्यराशि सिंह
चन्द्रराशि वृश्चिक
राहुकाल 12:16:18 to 13:48:39
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