Narasimha Jayanti 2026: नरसिंह जयंती भगवान विष्णु के चौथे अवतार, भगवान नरसिंह के प्रकट होने का पावन पर्व है। यह त्योहार वैशाख मास की शुक्ल पक्ष की चतुर्दशी तिथि को मनाया जाता है। धार्मिक मान्यता के अनुसार, भगवान नरसिंह ने भक्त प्रह्लाद की रक्षा के लिए आधा मानव और आधा सिंह रूप धारण किया था। उन्होंने अत्याचारी राजा हिरण्यकशिपु का अंत करके धर्म की स्थापना की और अपने भक्त की रक्षा की।
यह पर्व हमें सिखाता है कि सच्ची भक्ति और विश्वास से भगवान हर संकट में अपने भक्तों की रक्षा करते हैं। इस दिन श्रद्धालु व्रत रखते हैं, पूजा-अर्चना करते हैं और भगवान विष्णु के नरसिंह रूप की आराधना करते हैं। नरसिंह जयंती बुराई पर अच्छाई की जीत और धर्म की विजय का प्रतीक है, जो हर किसी को सत्य के मार्ग पर चलने की प्रेरणा देता है।
हिन्दू पंचांग के अनुसार, नरसिंह जयंती 2026 गुरुवार, 30 अप्रैल 2026 को श्रद्धा और भक्ति के साथ मनाई जाएगी। यह दिन भगवान विष्णु के नरसिंह अवतार के प्रकट होने का पावन पर्व है, जिसे विशेष रूप से सायंकाल और मध्याह्न काल में पूजा करके मनाया जाता है।
✨ दिन: गुरुवार, 30 अप्रैल 2026
🕉️ सायंकाल पूजा मुहूर्त: 04:27 बजे से 07:00 बजे तक (कुल अवधि: 02 घंटे 34 मिनट)
🌞 मध्याह्न संकल्प समय: 11:19 बजे से 01:53 बजे तक
📅 चतुर्दशी तिथि:
🌿 पारण समय (व्रत खोलने का समय): 01 मई 2026 को सुबह 06:11 बजे के बाद
💡 इस शुभ अवसर पर विधि-विधान से पूजा करने से जीवन में सुख, शांति और सुरक्षा का आशीर्वाद प्राप्त होता है।
नोट: सूर्योदय और सूर्यास्त का समय स्थान के अनुसार बदल सकता है, इसलिए सटीक समय के लिए अपने स्थानीय पंचांग को अवश्य देखें।
नरसिंह जयंती हिन्दू धर्म में गहरा और विशेष महत्व रखने वाला पवित्र पर्व है। यह दिन बुराई पर अच्छाई की जीत, सच्ची भक्ति की शक्ति और भगवान द्वारा अपने भक्तों की रक्षा का प्रतीक माना जाता है। इसी दिन भगवान विष्णु ने नरसिंह अवतार धारण किया था, जो आधा मानव और आधा सिंह रूप में प्रकट हुए थे। उन्होंने अपने परम भक्त प्रह्लाद की रक्षा के लिए अत्याचारी राजा हिरण्यकशिपु का वध किया और संसार में धर्म की स्थापना की। यह कथा न केवल रोमांचक है, बल्कि हमें गहरी आध्यात्मिक सीख भी देती है।
नरसिंह जयंती का पर्व भक्तिभाव और श्रद्धा के साथ मनाया जाता है। इस दिन भक्त व्रत रखते हैं और दिनभर भगवान नरसिंह की पूजा, भजन और मंत्र जप करते हैं। कई लोग निर्जल व्रत रखते हैं, जबकि कुछ फलाहार करके भी व्रत निभाते हैं।
मंदिरों में विशेष पूजा, आरती और अभिषेक किया जाता है। भक्त मिलकर भगवान नरसिंह के भजन गाते हैं और उनकी महिमा का गुणगान करते हैं। इस दिन नरसिंह कवच और मंत्रों का जाप करना बहुत शुभ माना जाता है। शाम के समय विशेष पूजा होती है, जो भगवान के प्रकट होने का प्रतीक मानी जाती है।
घर पर भी लोग ध्यान, पूजा और श्रीमद्भागवत कथा का पाठ करते हैं। यह पर्व हमें भगवान नरसिंह की शक्ति, साहस और रक्षा के गुणों को याद करने और जीवन में अपनाने की प्रेरणा देता है।
पूजा स्थान को साफ करके भगवान नरसिंह की मूर्ति या तस्वीर स्थापित करें।
स्नान करके साफ कपड़े पहनें।
दीपक जलाएं और भगवान का स्मरण करें।
फूल, फल और प्रसाद अर्पित करें।
अगरबत्ती और कपूर जलाकर वातावरण शुद्ध करें।
भगवान का अभिषेक जल, दूध या शहद से करें।
नरसिंह मंत्र और नरसिंह कवच का जाप करें।
अंत में आरती करके प्रसाद बांटें।
इस दिन व्रत रखना बहुत शुभ माना जाता है। सुबह जल्दी उठकर स्नान करें और भगवान का ध्यान करें। दिनभर व्रत रखते हुए भजन, मंत्र जाप और पूजा में समय बिताएं। जो लोग पूरा व्रत नहीं रख सकते, वे फल, दूध आदि ले सकते हैं।
शाम को पूजा के बाद भगवान से सुरक्षा, शक्ति और सुख-समृद्धि की प्रार्थना करें। अगले दिन प्रातः पारण करके व्रत खोलें और प्रसाद ग्रहण करें।
उग्रं वीरं महाविष्णुं ज्वलन्तं सर्वतोमुखम्।
नृसिंहं भीषणं भद्रं मृत्युमृत्युं नमाम्यहम्॥
यह मंत्र भय को दूर करता है और जीवन में शक्ति और सुरक्षा प्रदान करता है।
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| दिनाँक | Tuesday, 28 April 2026 |
| तिथि | शुक्ल द्वादशी |
| वार | मंगलवार |
| पक्ष | शुक्ल पक्ष |
| सूर्योदय | 5:43:32 |
| सूर्यास्त | 18:55:3 |
| चन्द्रोदय | 16:0:43 |
| नक्षत्र | उत्तर फाल्गुनी |
| नक्षत्र समाप्ति समय | 22 : 38 : 24 |
| योग | व्याघात |
| योग समाप्ति समय | 21 : 4 : 13 |
| करण I | बालव |
| सूर्यराशि | मेष |
| चन्द्रराशि | कन्या |
| राहुकाल | 15:37:10 to 17:16:06 |