6th Day of Navratri: नवरात्रि का छठवां दिन मां दुर्गा के छठवें स्वरूप मां कात्यायनी को समर्पित होता है। इस दिन सभी भक्त पूरी श्रद्धा के साथ मां कात्यायनी की पूजा-उपासना करते हैं। नवरात्रि का छठवां दिन विशेष रूप से शक्ति, साहस और आत्मविश्वास का प्रतीक माना जाता है। मां कात्यायनी को वैवाहिक जीवन में सामंजस्य और विवाह संबंधी बाधाओं को दूर करने वाली देवी के रूप में पूजा जाता है। ऐसी मान्यता है कि इस दिन सच्चे मन और विधिपूर्वक पूजा करने से माता कात्यायनी आपके जीवन से परेशानियों को कम करती हैं। अगर आप भी जीवन में प्रेम, संतुलन और सकारात्मक बदलाव चाहते हैं, तो नीचे बताई गई महत्वपूर्ण जानकारी के माध्यम से नवरात्रि छठवें दिन मां कात्यायनी की पूजा करें।
नवरात्रि के छठे दिन मां कात्यायनी की पूजा की जाती है। इन्हें शक्ति और पराक्रम का स्वरूप माना जाता है। मां कात्यायनी सिंह पर सवार होती हैं और अपने भक्तों की हर कठिनाई को दूर करने वाली देवी मानी जाती हैं।
मां कात्यायनी की पूजा करने से:
विवाह में आ रही बाधाएं दूर होती हैं
प्रेम संबंध मजबूत होते हैं
आत्मविश्वास और साहस बढ़ता है
जीवन की नकारात्मकता कम होती है
सुख-समृद्धि का आशीर्वाद मिलता है
छठे दिन की पूजा के लिए आवश्यक सामग्री:
फूल (विशेष रूप से लाल या पीले)
मां कात्यायनी की तस्वीर या मूर्ति
रोली और कुमकुम
अक्षत (चावल)
चंदन
दीपक और घी
अगरबत्ती
गंगाजल
भोग के लिए शहद (Honey)
फल और मिठाई
लाल या पीला कपड़ा
कलश
नवरात्रि के छठे दिन मां कात्यायनी की पूजा पूरे विधि-विधान से करने से विशेष फल मिलता है। अगर आप पहली बार पूजा कर रहे हैं, तो इस आसान तरीके से कर सकते हैं:
साफ वस्त्र पहनकर तैयार रहें: दिन की शुरुआत पवित्रता के साथ करें। साफ-सुथरा वातावरण मन को शांत और एकाग्र बनाता है।
कलश स्थापना: पूजा स्थान पर मिट्टी या तांबे का कलश पानी से भरकर रखें। उसमें आम के पत्ते लगाएं और ऊपर नारियल स्थापित करें। इसे मां शक्ति का प्रतीक माना जाता है, इसलिए इसकी स्थापना बहुत महत्वपूर्ण होती है।
ध्यान करें: अब मां की मूर्ति या तस्वीर के सामने बैठकर उनका ध्यान करें। अपने मन की इच्छाएं रखें और उनसे शक्ति, साहस और सफलता की प्रार्थना करें।
रोली और अक्षत अर्पित करें: मां को रोली, चंदन और अक्षत अर्पित करें। यह श्रद्धा और सम्मान का भाव दर्शाता है।
फूल माला चढ़ाएं: मां कात्यायनी को लाल फूल और माला अर्पित करें। यह भक्ति और समर्पण का प्रतीक माना जाता है।
दीपक और अगरबत्ती जलाएं: पूजा के दौरान दीपक और अगरबत्ती जलाएं। इससे घर का वातावरण सकारात्मक और पवित्र बनता है।
भोग अर्पित करें: मां को शहद, फल या मिठाई का भोग अर्पित करें। माना जाता है कि इससे जीवन में मधुरता और सुख बढ़ता है।
मंत्र जाप: पूजा के दौरान मां कात्यायनी के मंत्रों का जप करें। इससे मन को शांति और आत्मविश्वास मिलता है।
आरती और प्रसाद: पूजा के अंत में मां की आरती जरूर करें और प्रसाद सभी में बांटें। इससे पूजा पूर्ण मानी जाती है और मां का आशीर्वाद मिलता है।
छठे दिन मां को शहद का भोग लगाना शुभ माना जाता है।
मुख्य भोग:
शहद
फल
मिठाई
ऐसी मान्यता है कि शहद का भोग अर्पित करने से जीवन में मिठास आती है और रिश्तों में प्यार बढ़ता है।
1. विवाह के लिए मां कात्यायनी मंत्र
यह मंत्र उन लोगों के लिए खास माना जाता है जो एक अच्छा और योग्य जीवनसाथी चाहते हैं। मान्यता है कि इस मंत्र का सच्चे मन से जाप करने पर विवाह में आ रही रुकावटें धीरे-धीरे दूर होने लगती हैं।
मंत्र:
“कात्यायनि महामाये महायोगिन्यधीश्वरि।
नन्दगोपसुतं देवि पतिं मे कुरु ते नमः॥”
2. मां कात्यायनी बीज मंत्र
यह एक छोटा लेकिन शक्तिशाली मंत्र है, जिसे आप रोजाना ध्यान या पूजा के समय जप सकते हैं। इसका नियमित जाप मन को स्थिर करता है और अंदर से शक्ति और आत्मविश्वास बढ़ाता है।
मंत्र:
“ॐ क्रीं कात्यायनी क्रीं नमः।”
जय जय अम्बे, जय कात्यायनी,
जय जगमाता, जग की महारानी।
बैजनाथ स्थान तुम्हारा,
वहां वरदाती नाम पुकारा।
कई नाम हैं, कई धाम हैं,
यह स्थान भी तो सुखधाम है।
हर मंदिर में जोत तुम्हारी,
कहीं योगेश्वरी महिमा न्यारी।
हर जगह उत्सव होते रहते,
हर मंदिर में भक्त हैं कहते।
कात्यायनी रक्षक काया की,
ग्रंथि काटे मोह माया की।
झूठे मोह से छुड़ाने वाली,
जय जय अम्बे, जय कात्यायनी।
जय जगमाता, जग की महारानी,
अपना नाम जपाने वाली।
बृहस्पतिवार को पूजा करियो,
ध्यान कात्यायनी का धरियो।
हर संकट को दूर करेगी,
भंडारे भरपूर करेगी।
जो भी मां को भक्त पुकारे,
कात्यायनी सब कष्ट निवारे।
जय जय अम्बे, जय कात्यायनी,
जय जगमाता, जग की महारानी।
नवरात्रि के छठे दिन मां कात्यायनी की पूजा के साथ ग्रे (धूसर) रंग का विशेष महत्व माना जाता है। यह रंग जीवन में संतुलन, स्थिरता और धैर्य का प्रतीक होता है। कहा जाता है कि इस दिन ग्रे रंग के कपड़े पहनकर पूजा करने से मन शांत रहता है और जीवन में उतार-चढ़ाव के बीच संतुलन बनाए रखने की शक्ति मिलती है।
मां कात्यायनी की विधि-विधान से पूजा करें
व्रत रखें
मंत्र जाप करें
दुर्गा सप्तशती का पाठ करें
दान-पुण्य करें
किसी का अपमान न करें
नकारात्मक सोच से दूर रहें
पूजा में लापरवाही न करें
तामसिक भोजन से बचें
नवरात्रि का छठा दिन शक्ति और आत्मविश्वास का प्रतीक होता है। इस दिन मां कात्यायनी की पूजा करने से जीवन की रुकावटें धीरे-धीरे दूर होने लगती हैं और रिश्तों में मधुरता आती है। अगर आप सच्चे मन से मां की भक्ति करते हैं, तो उनकी कृपा से जीवन में सुख, शांति और सफलता का मार्ग खुलता है। इस पावन दिन मां दुर्गा की आराधना करें और अपने जीवन में सकारात्मक बदलाव का स्वागत करें।
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| दिनाँक | Friday, 27 March 2026 |
| तिथि | शुक्ल दशमी |
| वार | शुक्रवार |
| पक्ष | शुक्ल पक्ष |
| सूर्योदय | 6:17:40 |
| सूर्यास्त | 18:36:43 |
| चन्द्रोदय | 13:1:29 |
| नक्षत्र | पुनर्वसु |
| नक्षत्र समाप्ति समय | 15 : 25 : 56 |
| योग | अतिगंड |
| योग समाप्ति समय | 22 : 10 : 30 |
| करण I | तैतिल |
| सूर्यराशि | मीन |
| चन्द्रराशि | कर्क |
| राहुकाल | 10:54:49 to 12:27:12 |