गणेश जयंती 2026

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Ganesh Jayanti 2026: भगवान श्री गणेश के अवतरण दिवस को गणेश जयंती के रूप में मनाया जाता है। हिन्दू पंचांग के अनुसार यह उत्सव माघ मास के शुक्ल पक्ष की चतुर्थी तिथि को पड़ता है, जो सामान्यतः ग्रेगोरियन कैलेंडर के जनवरी और फरवरी के बीच आता है। माघ शुक्ल गणेश जयंती का उत्सव मुख्य रूप से महाराष्ट्र और कोंकण के तटीय क्षेत्रों में बड़ी श्रद्धा के साथ मनाया जाता है। भारत के अन्य हिस्सों में भाद्रपद मास की चतुर्थी को गणेश चतुर्थी के रूप में अधिक प्रसिद्धि प्राप्त है। इसके अतिरिक्त, मध्याह्न व्यापिनी पूर्वविद्धा चतुर्थी को भी कई स्थानों पर गणेश जयंती माना जाता है। 

महाराष्ट्र में माघ शुक्ल गणेश जयंती को माघ शुक्ल चतुर्थी, तिल कुंड चतुर्थी और वरद चतुर्थी के नाम से भी जाना जाता है।

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गणेश जयंती 2026 की तिथि और पूजा मुहूर्त (Ganesh Jayanti 2026 Date and Muhurat)

हिन्दू पंचांग के अनुसार, गणेश जयंती माघ मास के शुक्ल पक्ष की चतुर्थी तिथि 22 जनवरी 2026,  गुरुवार को है। 

मध्याह्न गणेश पूजा मुहूर्त

समय: सुबह 1:29 बजे से दोपहर 01:37 बजे तक।

अवधि: 2 घंटे 8 मिनट

वर्जित चंद्रदर्शन का समय (चंद्र दर्शन वर्जित)

समय: सुबह 09:22 बजे से रात 09:19 बजे तक।

अवधि: 11 घंटे 57 मिनट

चतुर्थी तिथि

प्रारम्भ: 22 जनवरी 2026 को रात 02:47 बजे से,

समाप्त: 23 जनवरी 2026 को रात 02:28 बजे तक।

गणेश जयंती की पूजा विधि (Ganesh Jayanti Puja Vidhi)

गणेश जयंती के दिन घर में भगवान गणेश की पूजा करना अत्यंत शुभ और फलदायी माना जाता है। पूजा की विधि इस प्रकार है:

सुबह जल्दी उठकर स्नान करें और स्वच्छ वस्त्र पहनें। पूजा स्थान को गंगाजल या स्वच्छ जल से पवित्र करें। एक चौकी पर लाल या पीला कपड़ा बिछाकर उस पर भगवान गणेश की प्रतिमा या चित्र स्थापित करें।

सबसे पहले दीपक जलाएँ और संकल्प लें- “हे विघ्नहर्ता गणेश जी, मैं आज संपूर्ण श्रद्धा और भक्ति के साथ आपकी पूजा कर रहा हूँ, कृपया मेरे जीवन की सभी बाधाएँ दूर करें।” इसके बाद गणेश जी को जल, अक्षत, पुष्प, दूर्वा और चंदन अर्पित करें।

अब पंचामृत (दूध, दही, घी, शहद, शक्कर) से भगवान गणेश का अभिषेक करें, फिर स्वच्छ जल से स्नान कराएँ। इसके उपरांत लाल पुष्प, मोदक, लड्डू, गुड़ और नारियल अर्पित करें।

इसके बाद गणेश मंत्र का जाप करें और मंत्र-जप पूर्ण होने पर आरती उतारें। आरती के बाद प्रभु के समक्ष अपनी इच्छाओं और मनोकामनाओं को विनम्र भाव से प्रस्तुत करें।

पूजा पूर्ण होने पर मोदक या लड्डू का प्रसाद सभी में बाँटें। परिवार के सदस्य मिलकर आरती करें और भगवान गणेश का आभार व्यक्त करें।

मान्यता है कि गणेश जयंती पर श्रद्धापूर्वक की गई आराधना से साधक को समृद्धि, सौभाग्य और बुद्धि-विवेक का विशेष आशीर्वाद प्राप्त होता है।

गणेश जयंती की व्रत विधि (Ganesh Jayanti Vrat Vidhi)

व्रत रखने वाला व्यक्ति प्रातः स्नान करके स्वच्छ वस्त्र धारण करे और पूरे दिन भगवान गणेश की उपासना का संकल्प ले।

व्रत के दौरान फल, दूध, दही, गुड़ तथा तिल से बनी वस्तुओं का सेवन किया जा सकता है।

नमक, तामसिक भोजन और अनाज का ग्रहण वर्जित माना गया है।

दोपहर में भगवान गणेश की विधि-विधानपूर्वक पूजा करें और मंत्र-जप करें।

पूजा के पश्चात मोदक, लड्डू और तिल-गुड़ से बने प्रसाद का भोग अर्पित करें।

दिनभर गणेश जी के नाम का स्मरण करते रहें। व्रत तभी पूर्ण माना जाता है जब साधक मन, वचन और कर्म से संयम बनाए रखे।

शाम को आरती करने के बाद व्रत खोल सकते हैं।

गणेश जयंती 2026 महत्व (Ganesh Jayanti 2026 Mahatav)

सनातन परंपरा में गणेश जयंती का अत्यंत पवित्र और विशेष धार्मिक स्थान है। मान्यता है कि इसी दिन माता पार्वती की प्रार्थना पर भगवान शिव ने गणेश जी को जन्म प्रदान किया। भगवान गणेश को प्रथम पूज्य देव माना गया है, अर्थात किसी भी शुभ कार्य की शुरुआत गणपति की आराधना के बिना पूरी नहीं मानी जाती।

इस दिवस पर भगवान गणेश के “विघ्नहर्ता” स्वरूप की विशेष उपासना होती है। यह पर्व यह प्रेरणा देता है कि जीवन में आने वाली हर बाधा को बुद्धि, धैर्य और भक्ति के बल पर पार किया जा सकता है।

शास्त्रों के अनुसार, माघ मास में गणपति की पूजा-अर्चना करने से बुद्धि और विवेक की वृद्धि होती है, जीवन में सुख-समृद्धि आती है और परिवार में शुभता का निवास होता है। इस दिन किया गया जप, तप, व्रत और दान सामान्य दिनों की अपेक्षा कई गुना अधिक फलदायी माना जाता है।

गणेश जयंती के लाभ (Ganesh Jayanti Benifits)

बाधाओं से मुक्ति- भगवान गणेश को “विघ्नहर्ता” कहा गया है। उनकी उपासना से जीवन की रुकावटें, समस्याएँ और नकारात्मक प्रभाव दूर होने लगते हैं।

बुद्धि और विवेक की वृद्धि- गणेश जी ज्ञान, बुद्धि और विवेक के देवता हैं। जो साधक श्रद्धा से उनकी पूजा करता है, उसके भीतर निर्णय लेने की क्षमता, स्पष्ट सोच और मानसिक स्थिरता बढ़ती है।

सुख–समृद्धि- गणपति की कृपा से घर-परिवार में सुख, शांति और समृद्धि आती है। व्यापार, नौकरी और अन्य कार्यक्षेत्रों में उन्नति प्राप्त होती है तथा नए कार्यों की शुरुआत शुभ फल देती है।

मन की शांति- व्रत और ध्यान के दौरान साधक के भीतर संचित नकारात्मकता दूर होती है, जिससे मन शांत, स्थिर और सकारात्मक बनता है।

पारिवारिक सौहार्द- गणेश जी को मंगलमूर्ति कहा गया है। उनके स्मरण से परिवार में सौहार्द, प्रेम, आपसी समझ और एकता बढ़ती है।

कार्य में सफलता- गणेश जयंती के दिन आरंभ किए गए नए कार्यों में निरंतर सफलता मिलने की मान्यता है।

यह थीं गणेश जयंती से जुड़ी प्रमुख जानकारियाँ। इस शुभ अवसर पर श्री मंदिर प्रार्थना करता है कि विघ्नहर्ता गणपति बप्पा आपके जीवन से सभी बाधाएँ दूर करें, आपको सही निर्णय लेने की शक्ति दें और आपके परिवार को सुख-समृद्धि से परिपूर्ण रखें।

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चन्द्रराशि तुला
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