कालाष्टमी 2026 - डेट लिस्ट, व्रत नियम और पूजा विधि

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Kalashtami 2026: कालाष्टमी हिंदू धर्म में भगवान कालभैरव को समर्पित एक महत्वपूर्ण तिथि है, जिसे काला अष्टमी भी कहा जाता है। यह हर महीने कृष्ण पक्ष की अष्टमी को मनाई जाती है। इस दिन भक्त भगवान कालभैरव की विशेष पूजा करते हैं और व्रत रखते हैं। मान्यता है कि कालभैरव भगवान शिव का ही एक उग्र रूप हैं, जो अपने भक्तों की रक्षा करते हैं और बुरी शक्तियों का नाश करते हैं।

कालाष्टमी 2026 की तिथियां (Kalashtami 2026 Date and Time)

तारीख व दिन पर्व / तिथि अष्टमी तिथि समय
जनवरी 10, 2026, शनिवार कालाष्टमी (माघ, कृष्ण अष्टमी) प्रारम्भ - 09 जनवरी 2026 को रात 10:53 बजे से, समाप्त - 11 जनवरी 2026 को रात 12:50 बजे तक।
फरवरी 9, 2026, सोमवार कालाष्टमी (फाल्गुन, कृष्ण अष्टमी) प्रारम्भ - 08 फरवरी 2026 को शाम 7:31 बजे से, समाप्त - 09 फरवरी 2026 को रात 9:57 बजे तक।
मार्च 10, 2026, मंगलवार कालाष्टमी (चैत्र, कृष्ण अष्टमी) प्रारम्भ - 10 मार्च 2026 को शाम 4:24 बजे से, समाप्त - 11 मार्च 2026 को शाम 6:49 बजे तक।
अप्रैल 9, 2026, बृहस्पतिवार कालाष्टमी (वैशाख, कृष्ण अष्टमी) प्रारम्भ - 09 अप्रैल 2026 को सुबह 11:49 बजे से, समाप्त - 10 अप्रैल 2026 को दोपहर 1:45 बजे तक।
मई 9, 2026, शनिवार कालाष्टमी (ज्येष्ठ, कृष्ण अष्टमी) प्रारम्भ - 09 मई 2026 को रात 4:32 बजे से, समाप्त - 10 मई 2026 को सुबह 5:36 बजे तक।
जून 7, 2026, रविवार अधिक कालाष्टमी (ज्येष्ठ, कृष्ण अष्टमी) प्रारम्भ - 07 जून 2026 को शाम 5:54 बजे से, समाप्त - 08 जून 2026 को शाम 5:53 बजे तक।
जुलाई 7, 2026, मंगलवार कालाष्टमी (आषाढ़, कृष्ण अष्टमी) प्रारम्भ - 07 जुलाई 2026 को रात 3:54 बजे से, समाप्त - 08 जुलाई 2026 को रात 2:51 बजे तक।
अगस्त 5, 2026, बुधवार कालाष्टमी (श्रावण, कृष्ण अष्टमी) प्रारम्भ - 05 अगस्त 2026 को सुबह 11:12 बजे से, समाप्त - 06 अगस्त 2026 को सुबह 9:22 बजे तक।
सितम्बर 3, 2026, बृहस्पतिवार कालाष्टमी (भाद्रपद, कृष्ण अष्टमी) प्रारम्भ - 03 सितम्बर 2026 को शाम 4:55 बजे से, समाप्त - 04 सितम्बर 2026 को दोपहर 2:43 बजे तक।
अक्टूबर 3, 2026, शनिवार कालाष्टमी (आश्विन, कृष्ण अष्टमी) प्रारम्भ - 02 अक्टूबर 2026 को रात 10:29 बजे से, समाप्त - 03 अक्टूबर 2026 को रात 8:21 बजे तक।
नवम्बर 1, 2026, रविवार कालाष्टमी (कार्तिक, कृष्ण अष्टमी) प्रारम्भ - 01 नवम्बर 2026 को सुबह 5:21 बजे से, समाप्त - 02 नवम्बर 2026 को सुबह 3:40 बजे तक।
नवम्बर 30, 2026, सोमवार कालभैरव जयन्ती / कालाष्टमी (मार्गशीर्ष, कृष्ण अष्टमी) प्रारम्भ - 30 नवम्बर 2026 को दोपहर 2:41 बजे से, समाप्त - 01 दिसम्बर 2026 को दोपहर 1:43 बजे तक।
दिसम्बर 30, 2026, बुधवार कालाष्टमी (पौष, कृष्ण अष्टमी) प्रारम्भ - 30 दिसम्बर 2026 को रात 3:06 बजे से, समाप्त - 31 दिसम्बर 2026 को रात 3:02 बजे तक।

क्यों खास होती है मार्गशीर्ष या कार्तिक महीने में पड़ने वाली कालाष्टमी?

साल में आने वाली सभी कालाष्टमी महत्वपूर्ण होती हैं, लेकिन मार्गशीर्ष या कार्तिक महीने में पड़ने वाली कालभैरव जयंती सबसे खास मानी जाती है। इस दिन भगवान भैरव के प्रकट होने की मान्यता है। कालाष्टमी व्रत का सही दिन वही माना जाता है जब अष्टमी तिथि रात में प्रभावी होती है। इसलिए पंचांग देखकर ही व्रत रखा जाता है, ताकि पूजा का पूरा फल प्राप्त हो सके।

कालाष्टमी का धार्मिक महत्व

कालाष्टमी हिंदू धर्म में भगवान भगवान काल भैरव की उपासना का अत्यंत महत्वपूर्ण दिन माना जाता है। यह हर माह कृष्ण पक्ष की अष्टमी तिथि को मनाई जाती है। मान्यता है कि इस दिन व्रत और पूजा करने से भय, संकट और नकारात्मक शक्तियों से रक्षा होती है। भक्त विशेष रूप से रात्रि में काल भैरव की आराधना करते हैं और काले कुत्ते को भोजन कराते हैं, जिसे शुभ माना जाता है। यह दिन पापों के नाश, मनोकामनाओं की पूर्ति और जीवन में सुख-शांति प्राप्त करने का प्रतीक है।

कालाष्टमी पूजा विधि

कालाष्टमी के दिन भगवान काल भैरव की पूजा विशेष फलदायी मानी जाती है। इस दिन सही विधि से पूजा करने पर भय, कष्ट और नकारात्मक ऊर्जा दूर होती है।

प्रातःकाल की तैयारी: सुबह जल्दी उठकर स्नान करें और साफ वस्त्र धारण करें। व्रत का संकल्प लें और मन में भक्ति भाव रखें।

पूजा स्थान की स्थापना: घर के मंदिर में काल भैरव की मूर्ति या चित्र स्थापित करें। गंगाजल छिड़ककर स्थान को पवित्र करें।

पूजा सामग्री:

सरसों का तेल

काले तिल

फूल (विशेषकर लाल/पीले)

धूप, दीप

नारियल, मिठाई

काला कपड़ा (यदि संभव हो)

विधिवत पूजन: 

  • दीपक में सरसों का तेल डालकर जलाएं

  • भगवान को फूल, अक्षत और काले तिल अर्पित करें

  • “ॐ काल भैरवाय नमः” मंत्र का जाप करें

  • भैरव चालीसा का पाठ करें

रात्रि पूजा का महत्व: कालाष्टमी की रात्रि में पूजा करना अत्यंत शुभ माना जाता है। इस समय भैरव जी शीघ्र प्रसन्न होते हैं।

विशेष उपाय: काले कुत्ते को रोटी या मिठाई खिलाना शुभ होता है। इससे शनि दोष और बाधाएं कम होती हैं।

व्रत का पारण: अगले दिन स्नान कर पूजा के बाद व्रत खोलें और जरूरतमंदों को दान दें।

इस विधि से की गई पूजा जीवन में सुरक्षा, सफलता और मानसिक शांति प्रदान करती है।

कालाष्टमी पर कुत्ते को भोजन क्यों कराते हैं?

कालाष्टमी के दिन भगवान काल भैरव की पूजा के साथ कुत्ते को भोजन कराना एक विशेष धार्मिक परंपरा है। इसके पीछे गहरा आध्यात्मिक महत्व माना जाता है।

भैरव जी का वाहन: धार्मिक मान्यता के अनुसार कुत्ता, काल भैरव का वाहन होता है। इसलिए कुत्ते को भोजन कराना सीधे भैरव जी की सेवा और प्रसन्नता से जुड़ा माना जाता है।

नकारात्मक शक्तियों से रक्षा: कहा जाता है कि कुत्ते को भोजन कराने से घर और जीवन से नकारात्मक ऊर्जा, भय और बाधाएं दूर होती हैं।

शनि और राहु दोष शांति: ज्योतिष के अनुसार कुत्ते को रोटी, तेल लगी रोटी या मिठाई खिलाने से शनि और राहु के अशुभ प्रभाव कम होते हैं।

पापों से मुक्ति और पुण्य लाभ: गरीब या जीव-जंतुओं को भोजन कराना दान का एक रूप है, जिससे पापों का क्षय होता है और पुण्य की प्राप्ति होती है।

करुणा और सेवा का संदेश: यह परंपरा हमें सभी जीवों के प्रति दया, प्रेम और सेवा भाव रखना सिखाती है।

इसलिए कालाष्टमी पर कुत्ते को भोजन कराना केवल परंपरा नहीं, बल्कि आध्यात्मिक और ज्योतिषीय दृष्टि से अत्यंत लाभकारी माना जाता है।

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कालाष्टमी
कालाष्टमी
Friday, April 10, 2026
Paksha:कृष्ण
Tithi:अष्टमी
वरुथिनी एकादशी
वरुथिनी एकादशी
Monday, April 13, 2026
Paksha:कृष्ण
Tithi:एकादशी
वल्लभाचार्य जयन्ती
वल्लभाचार्य जयन्ती
Monday, April 13, 2026
Paksha:कृष्ण
Tithi:एकादशी
बैसाखी
बैसाखी
Tuesday, April 14, 2026
Paksha:कृष्ण
Tithi:द्वादशी
अम्बेडकर जयन्ती
अम्बेडकर जयन्ती
Tuesday, April 14, 2026
Paksha:कृष्ण
Tithi:द्वादशी
मेष संक्रान्ति
मेष संक्रान्ति
Tuesday, April 14, 2026
Paksha:कृष्ण
Tithi:द्वादशी

अन्य त्यौहार

Delhi- Thursday, 09 April 2026
दिनाँक Thursday, 09 April 2026
तिथि कृष्ण सप्तमी
वार गुरुवार
पक्ष कृष्ण पक्ष
सूर्योदय 6:2:50
सूर्यास्त 18:43:59
चन्द्रोदय 0:37:29
नक्षत्र पूर्वाषाढ़ा
नक्षत्र समाप्ति समय 35 : 28 : 48
योग परिघ
योग समाप्ति समय 17 : 58 : 54
करण I बव
सूर्यराशि मीन
चन्द्रराशि धनु
राहुकाल 13:58:33 to 15:33:41
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